किल कोरोना अभियान:सर्वे में छिपा रहे बीमारी, टीम से कह रहे- घर में सब स्वस्थ हैं, लेकिन पड़ोसी बता रहे हकीकत

श्योपुरएक वर्ष पहले
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  • घर के एक सदस्य से पूछताछ कर नोट कर रही टीम, वास्तविक मरीज नहीं मिल पा रहे

किल कोरोना अभियान में जिले के हर घर में स्वास्थ्य कार्यकर्ता को कोरोना संदिग्ध मरीजों के अलावा मलेरिया के मरीज भी चिह्नित करने हैं लेकिन स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर के सिर्फ एक ही सदस्य से जानकारी लेकर नाेट कर रहे हैं। ऐसे में खांसी, जुकाम और बुखार के मरीज सामने ही नहीं आ पा रहे हैं। लोग टीम से कह देते हैं कि उनके घर में कोई मरीज नहीं है। सभी स्वस्थ हैं लेकिन उनके पड़ोसी या अन्य परिचित टीम को बता देते हैं कि उनके घर में बीमार है। इसके बाद टीम मरीज को चिह्नित करती है। ऐसे में बहुत कम मरीज सामने आ पा रहे हैं। सीएमएचओ का कहना है कि प्रशिक्षण के अनुसार ताे घर के हर सदस्य की जांच के बाद पूछताछ करनी है। ऐसा नहीं हो रहा है तो स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को दोबारा समझाइश देंगे। 1 जुलाई से किल कोरोना अभियान शुरू किया गया है जाे 15 जुलाई तक चलना है। अभियान के दौरान स्वास्थ्य कार्यकर्ता एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के दल घर-घर में सर्वे कर रहे हैं। शहर से लेकर गांव स्तर तक सर्वे किया जा रहा है लेकिन यह सर्वे हकीकत में सिर्फ दिखावा ही साबित हो रहा है। सर्वे टीम घर के एक ही सदस्य से जानकारी ले रही हैं कि कोई बीमार तो नही हैं। ज्यादातर लोग बीमारी के बारे में बताने से परहेज कर रहे हैं। वे कह देते हैं कि उनके घर में सब ठीक हैं। टीम उनके राशन कार्ड व समग्र आईडी से नाम-पते नोट कर आगे बढ़ जाती है। ऐसे में बीमार व्यक्तियों की पहचान ही नहीं हो पा रही है।

2.41 लाख लोगों के सर्वे का दावा, संदिग्ध मिले सिर्फ 74
जिले में 1 लाख 41 हजार घरों में सर्वे किया जाना है। अब तक जिले में 54 हजार घरों में सर्वे पूरा करने की बात कही जा रही है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि 2 लाख 41 हजार लोगों की जांच यानी स्क्रीनिंग कर ली गई है लेकिन इसकी हकीकत सर्वे में उनके द्वारा बताई जा रही बीमारों की संख्या से पता चल रही है। 2.41 लाख लोगों में से टीम को सर्दी, खांसी और बुखार तीनों लक्षण वाले सिर्फ 74 मरीज मिले हैं। सिर्फ बुखार के 122 मरीज मिले हैं। इसके अलावा मलेरिया के 10 केस बताए गए हैं। अब यह आंकड़े ही बता रहे हैं कि सर्वे किस प्रकार किया गया है।

सर्वे की हकीकत... 2.41 लाख लोगों के सर्वे का दावा, लेकिन संदिग्ध मिले सिर्फ 74
दो उदाहरण... रिश्तेदार बताया कि इनके यहां बीमार है

1. ग्राम पंचायत बगडुआ में सर्वे टीम रामप्रसाद के घर पर पहुंची और परिजन के नाम-पते नोट किए। किसी बीमार की जानकारी पूछी गई तो बताया कि यहां कोई बीमार नहीं है। इसके बाद जब टीम वहां से जाने लगी तो उसी के रिश्तेदार दुकानदार ने कह दिया कि उस घर में एक सर्दी-खांसी का मरीज है। इसके बाद में रामप्रसाद के घर पर टीम दोबारा पहुंची और संबंधित बीमार व्यक्ति को चिह्नित किया। गांवों से लेकर शहर में यही हालात बने हैं, क्योंकि टीम एक ही व्यक्ति से जानकारी ले रही है। ऐसे में मरीज सामने नही आ रहे हैं।
2. प्रेमसर पंचायत में सर्वे के दौरान टीम को कोई बीमार नहीं मिला लेकिन एक के बाद एक कुछ ही देर में उन्हें सर्दी-खांसी और मलेरिया के तीन मरीज मिल गए। शिवराज, रामशंकर और बलराज मीणा ने पहले तो घर में किसी को बीमार नहीं बताया। बलराज मीणा के घर से खांसने व छींकने की आवाज टीम को आई तो फिर संबंधित व्यक्त को बीमार चिह्नित किया। इसी तरह शिवराज व रामशंकर ने भी अपने घर में बीमार होने की मना कर दी, लेकिन सर्दी-खांसी का मरीज उसके पड़ोसी ने टीम को बताया।
संदिग्धों को तत्काल नहीं भेजे जा रहे अस्पताल
सर्वे में टीमों को अलग-अलग गांवों में 74 कोरोना संदिग्ध मिले हैं। टीमें उन्हें सैंपल के लिए अस्पताल नहीं भेज रही हैं। सीएमएचओ को कहना है कि ऐसे मरीजों को बाद में अलग से बुलाकर सैंपल ले रहे हैं।
दोबारा देंगे समझाइश
किल कोरोना अभियान में घर के प्रत्येक सदस्य को समक्ष बुलाकर जानकारी लेनी है। अगर एक ही सदस्य से जानकारी ली जा रही है तो यह गलत है। मैं इसे लेकर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को दोबारा समझाइश दूंगा। 
डॉ. एआर करोरिया, सीएमएचओ

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