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प्रोजेक्ट:चंबल प्रोग्रेस-वे में जमीन के बदले जमीन देने का प्रावधान, किसान बोले- हमें मुआवजा दिया जाए

श्योपुर10 महीने पहले
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  • 593.87 हेक्टेयर निजी जमीन का होगा अधिग्रहण, लेकिन किसानों को मुआवजा देने का प्रावधान नहीं
  • निजी जमीन के अधिग्रहण की तारीख अभी तय नहीं

चंबल प्रोग्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण की तैयारी की जा रही है। सबसे पहले सरकारी जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। इसे लेकर बुधवार को दावे-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासन प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज देगा। हालांकि अभी निजी भूमि के अधिग्रहण और दावे-आपत्ति के लिए कोई तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन किसान निजी भूमि के बदले मुआवजे की मांग कर रहे है जबकि कलेक्टर का कहना है कि ऐसा प्रोजेक्ट की गाइडलाइन में ही नहीं है। किसानों को जमीन के बदले जमीन देने का प्रावधान है।
भिंड-मुरैना-श्योपुर से कोटा जाने वाले 406 किमी लंबे चंबल प्रोगेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण का काम शुरू हो चुका है। इसमें श्योपुर की 960.59 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है। इसमें निजी 593.87 हेक्टेयर भूमि है तो 350.34 हेक्टेयर सरकारी भूमि है। इसके तहत प्रशासन ने सरकारी भूमि अधिग्रहण की तैयारी कर ली है और इस पर बुधवार तक दावे-आपत्ति लेने के साथ ही अधिग्रहण का प्रस्ताव बनाकर शासन को 16 जुलाई को भेज दिया जाएगा। 
प्रोजेक्ट में जमीन के बदले मुआवजे का प्रावधान नहीं
अब तक निजी भूमि पर दावे-आपत्ति लेने को लेकर तारीख तय नहीं हुई है लेकिन इसे लेकर किसान परेशान हैं क्योंकि चंबल प्रोग्रेस-वे के प्रोजेक्ट में वह जमीन के बदले अच्छे खासे मुआवजे की मांग कर रहे हैं, पर इसमें मुआवजे का प्रावधान ही नहीं है। प्रोजेक्ट की गाइडलाइन में साफ है कि इसमें जमीन के बदले सिर्फ जमीन ही दी जाएगी। वहीं माखनाखेड़ली, जलालपुरा, चकआसन, अड़वाड़ सहित अन्य गांवों के किसान भूमि अधिग्रहण के बदले में मुआवजे की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में किसान कलेक्टर से भी मिले। वहीं कलेक्टर राकेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि पहले किसानों से चर्चा करेंगे, फिर शासन स्तर पर प्रयास किए जाएंगे।

47 गांवों की 593.87 हेक्टेयर भूमि, इसमें 17 गांव वीरपुर के भी शामिल
चंबल प्रोग्रेस-वे में जिले के 47 गांवों की निजी भूमि अधिग्रहित की जानी है। इसमें श्योपुर तहसील के 30 और वीरपुर के 17 गांव शामिल है। हालांकि इनकी भूमि अधिग्रहण करने को लेकर शासन स्तर से अभी दावे-आपत्ति लेने को लेकर कोई तारीख तय नहीं की गई है। अफसरों की मानें तो अगले माह तक एक साथ भिंड, मुरैना और श्योपुर में निजी भूमि अधिग्रहण की तारीख तय हो सकती है। इसके लिए प्रशासन ने पहले ही निजी भूमि चिह्नित कर ली है और इसके बाद वह भूमि के किसानों को चिह्नित करेंगे। जिनसे वह दावे-आपत्ति लेकर उसके निराकरण के बाद अधिग्रहण का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।

आवंटन को लेकर सरकारी रकबे की तलाश में जुटे पटवारी

चंबल प्रोग्रेस-वे में निजी भूमि का भी अधिग्रहण होगा, इसलिए अभी से ही प्रशासन ने पटवारी स्तर पर राजस्व भूमि का सर्वे शुरु करा दिया है ताकि वह अधिग्रहित भूमि के बदले उन्हें दूसरी जगह भूमि आवंटित कर सके। इसमें किसानों को सिंचित भूमि के बदले सिंचित भूमि ही दी जाएगी। जिससे की बाद में किसी तरह की परेशानी न हो। इसके अलावा किसानों को उनके क्षेत्र में ही सरकारी भूमि आवंटित करा दी जाए, इसके लिए भी यह सर्वे पटवारियों के स्तर पर कराया जा रहा है।

चंबल प्रोग्रेस-वे से भिंड-मुरैना और श्योपुर को फायदा
भिंड-मुरैना और फिर श्योपुर से कोटा तक जाने वाले चंबल प्रोग्रेस-वे के बनने से श्योपुर सहित मुरैना संभाग के जिलों में परिवर्तन होंगे। इसमें फैक्ट्री से लेकर रोड वे मिलने से कारोबार बढ़ेगा। यहां चंबल के बीहड़ों के बीच भी हलचल होगी और पयर्टन को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा मालवाहक वाहनों को आने-जाने में सुविधा होगी तो यहां कई तरह के डवलपमेंट होंगे। यहां फैक्ट्रियां डलने से भी लोग सीधे रोजगार से जुड़ेंगे। 

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