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गाैर कराे सरकार!:सालों से उखड़ी सड़कें नहींं बनी ताे ग्रामीण चंदा करके खुद ही बनवा रहे

श्योपुर6 दिन पहलेलेखक: जावेद आलम
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जनपद पंचायत श्योपुर की पांडोली और मेवाड़ा के कछार में ग्रामीण खुद ही कर रहे विकास। - Dainik Bhaskar
जनपद पंचायत श्योपुर की पांडोली और मेवाड़ा के कछार में ग्रामीण खुद ही कर रहे विकास।
  • श्योपुर की कई पंचायतों में सड़क, श्मशान के रास्तों को लेकर नहीं हुई सुनवाई तो ग्रामीण खुद ही आगे आए

सरकार गांव के विकास के लिए मनरेगा में निर्माण कार्य करा रही है। लेकिन गांवों की समस्याओं का निराकरण होता नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि यहां ग्रामीणों की समस्याओं का निराकरण नहींं हो पा रहा है। दो-तीन सालों से सड़क बनने की मांगें जब पूरी नहींं हो रही तो ग्रामीणों का सरकार व प्रशासन से ही विश्वास उठ गया। इसी के चलते उन्होंने खुद ही चंदा कर निजी राशि से गांव की सड़कें बनवा दी। यहां पांडोली गांव में ग्रामीण चंदा करके सड़क बनवा चुके हैं तो मेवाड़ा पंचायत के कछार, पीपलमेटा व मेवाड़ा का टपरा को जोड़ने वाली सड़क को भी ग्रामीणों ने खुद चंदा कर बनवाया है।

क्योंकि ग्रामीणों की समस्या का निदान न तो पंचायतों ने किया और न ही जनसुनवाई में दिए गए आवेदन पर अफसरों ने कोई गौर किया। इसी के चलते ग्रामीणों को खुद ही सड़कें बनवानी पड़ी। इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ राजेश शुक्ल ने कहा कि मेरे समक्ष ऐसी कोई बात नहीं आई है। इसके साथ ही जनपद सीईओ से भी संपर्क किया गया, पर उनका कॉल रिसीव नहीं हुआ।

ग्रामीणों ने बनवाई सड़कें व कराए अन्य निर्माण: मेवाड़ा पंचायत के कछार और पांडोली पंचायत में सड़क बनवाने के अलावा इसके पहले नंदापुर गांव में ग्रामीण चंदे से सड़क बनवा चुके है। इसके अलावा बारिश के दौरान बागल्दा समेत अन्य गांवों में कच्ची सड़कों पर मुरम व ईंटें भी ग्रामीण ही चंदा कर डलवाते आए है।

पंचायतें करती रहीं अनदेखी... यहां ग्रामीण खुद आए विकास के लिए आए, अफसर समाधान ही नहींं कर पाए

पांडोली पंचायत सचिव ने दो साल में भी नहीं सुनी, 1.20 लाख रु. चंदे से ग्रामीणों ने बनवाई सड़क

1. श्योपुर जपं की ग्राम पंचायत पांडोली में खेतों की ओर जाने वाला गांव का रास्ता कच्चा तो है ही। साथ ही यह रास्ता निचाई में होने के चलते बारिश में पूरी तरह से डूब जाता है। ऐसे में ग्रामीण यहां से अपने खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे थे। पांडोली गांव के रामप्रसाद शर्मा, गजानंद मीणा समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वह सड़क बनाने के लिए पंचायत सचिव से मिले, पर दो साल बाद भी कोई निराकरण नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने उक्त आधा किमी लंबी सड़क को ऊंचा उठाने के लिए उस पर मिट्टी डलवाई, जिसमें 1.20 लाख रुपए का खर्च आया। रोजगार सहायक नागर ने भी माना कि उक्त सड़क ग्रामीणों ने चंदे से बनवाई, लेकिन उसे स्वीकृति क्यों नहीं मिली उन्हें नहीं मालूम।

जब इस संबंध में पंचायत के सचिव गिर्राज शर्मा के मोबाइल नंबर 99826285716 पर संपर्क किया तो बंद था।

मेवाड़ा पंचायत में नहीं सुनी अर्जी, तीन गांव के ग्रामीणों ने 5 लाख खर्च कर ऊंची उठाई सड़क

2. श्योपुर जपं की ही ग्राम पंचायत मेवाड़ा के कछार, पीपलमेटा, मेवाड़ा का टपरा तीन गांवों के लिए नहर के पास से रास्ता है। यह रास्ता न सिर्फ कच्चा है बल्कि, काफी निचाई पर भी है। ऐसे में यहां खेतों का पानी और बारिश में नाला बन जाता है। इसे लेकर कई बार गांव के लोगों ने पंचायत में अर्जी लगाई, जनसुनवाई में भी आवेदन दिए। पर उनके आवेदन पर किसी ने कोई सुनवाई नहीं की। ऐसे में ग्रामीण बलविंदर सिंह, भूरा खां और मदरुप बैरवा ने बताया कि 1.5 किमी लंबी इस सड़क को बनाने में उन्हें 5 लाख रुपए का खर्च आया। जिसके लिए तीनों गांवों के लोगों ने मिलकर चंदा दिया। इसी चंदे की बदौलत उक्त सड़क 8 फीट तक ऊंची मिट्टी डालकर उठाई गई ताकि पानी न भरें और ग्रामीणों को परेशान न होना पड़े।

इस संबंध में मेवाड़ा पंचायत के सचिव इंदर आदिवासी के मोबा. 9826749938 पर कॉल किए पर वह बंद मिलता रहा।

मेरे समक्ष नहीं आई ऐसी बात

^मेरे समक्ष ऐसा कोई मामला अब तक सामने नहींं आया कि सड़क निर्माण खुद ग्रामीणों का कराना पड़ रहा है। पंचायतों में अगर यह स्थिति है तो मैं इसे दिखवाता हूं।
राजेश शुक्ल, सीईओ, जिपं श्योपुर

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