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खेल मैदान नहींं:हकीकत: 605 सरकारी स्कूलों के पास मैदान ही नहींं, 235 स्कूली खेल मैदान अतिक्रमण में खाेए

श्योपुर10 दिन पहले
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चंबल कॉलोनी में एक ही परिसर में संचालित शासकीय प्राइमरी व मिडिल स्कूल जिनका अपना खेल मैदान है।
  • जिले में 1326 स्कूलों में खेल मैदान व संसाधनों की जानकारी जुटा रहा विभाग
  • लाेक शिक्षण संचालनालय के आदेश पर शिक्षा विभाग ने जिले के सभी शासकीय एवं मान्यता प्राप्त स्कूलों में खेल मैदान एवं सुविधाओं की जानकारी मंगाई
  • शहरी क्षेत्र में सभी प्राइमरी, मिडिल व हाईस्कूल मैदान विहीन

लाॅकडाउन के बीच लाेक शिक्षण संचालनालय द्वारा सभी स्कूलों में खेल संसाधन और खेल मैदान की जानकारी शिक्षा विभाग से मांगी है। लाेक शिक्षण संचालनालय आयुक्त के आदेश पर डीईओ द्वारा जिले के तीनाें ब्लाॅक शिक्षा अधिकारी, जन शिक्षा केंद्र प्रभारी और संस्था प्रधानों से विद्यालयवार खेल संसाधनों की जानकारी जुटाई जा रही है। लाेक शिक्षण संचालनालय ने गत वर्ष भी खेल मैदानों की रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन बच्चे सालभर खेल सुविधाओं काे तरस गए।

दरअसल स्कूलों में बच्चों को खेलने के लिए मैदान नहींं है। स्थिति यह है कि जिलेभर में कुल 1326 स्कूल संचालित है। इनमें 154 सरकारी और 172 प्राइवेट स्कूल शामिल हैं। इनमें जिले के 605 शासकीय स्कूलों के पास ही खेल मैदान नहींं है। अधिकांश प्राइवेट स्कूलों में बच्चों काे खेलने के लिए मैदान ताे दूर बैठने की पर्याप्त जगह नहींं है। राजस्व दस्तावेजों में 840 सरकारी स्कूलों के नाम खेल मैदान के लिए जमीन आवंटित है।

वर्तमान में स्थिति यह है कि सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र के 235 स्कूल में ही खेल मैदान हैं। शहर में संचालित स्कूलों में खेल मैदान के लिए जगह नहींं है। शहर के शासकीय मॉडल स्कूल को स्थापना के छह साल से मैदान नहींं मिला है। कई स्कूलों के खेल मैदान पर लोगों ने अतिक्रमण कर लिए हैं। प्रधानाध्यापकों से रिपोर्ट मंगाने के बाद खेल मैदानों पर हाे रहे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर हर साल अमल पर आकर बात अटक जाती है। इस संबंध में डीईओ का कहना है कि सभी स्कूलों से खेल संसाधनों की भौैतिक स्थिति के आधार पर कार्यवाही आगे बढ़ाई जाएगी, इसमें जरूरत पड़ने पर जिला प्रशासन का सहयाेग लिया जाएगा।

जिले के 80 फीसदी सरकारी स्कूलों में खेल गतिविधियां ठप है। मान्यता के लिए अनिवार्य शर्त लागू होने के बावजूद जिले में 172 मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में 90 प्रतिशत स्कूल के पास भी खेल मैदान नहीं है। शिक्षा विभाग स्कूलों में खेल सुविधाएं मुहैया कराने के लिए गंभीरता नहींं दिखा रहा है। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी वकील रावत का कहना है कि शहर को छोड़कर सरकारी स्कूलों में सभी जगह खेल मैदान हैं, विभागीय स्तर पर होने वाली खेलकूद प्रतियोगिताओं के लिए कभी मैदान की समस्या नहींं आती है। शिक्षा विभाग द्वारा जिले के श्योपुर, विजयपुर एवं कराहल विकास खंड में 1154 स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। लेकिन इन स्कूल में न खेल मैदान हैं, न खेल सामग्री है और न ही खेल शिक्षक। हाईस्कूल और हायर सेकंडरी स्कूल में भी पीटीआई के पद बरसों से खाली पड़े हैं।

आरटीई एक्ट लागू होने के साथ ही शिक्षा विभाग द्वारा हर स्कूल में खेल मैदान बनाने की कवायद तीन साल से चल रही है। खेल मैदानों को लेकर शिक्षा विभाग ने संकुल स्तर पर संस्था प्रधानों से ग्राउंड लेवल रिपोर्ट मंगाई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार जिले में प्राइमरी से लेकर हाईस्कूल तक 840 स्कूल के पास जमीन है। इनमें 235 स्कूल में खेल मैदान बनाए गए हैं। 605 स्कूल खेल मैदान विहीन बताए गए हैं।

प्राइवेट स्कूलों के पास भी नहींं है खेल मैदान

प्राइवेट स्कूलों की मान्यता के लिए खेल मैदान होना अनिवार्य शर्त है। लेकिन जिले में अधिकांश प्राइवेट स्कूल में खेल मैदान नहींं है। जिले में 168 मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल में ज्यादातर स्कूल सिर्फ 2-3 कमरे के आवासीय भवन में संचालित हो रहे हैं। जबकि आरटीई के प्रावधान के मुताबिक स्कूल की मान्यता के लिए 2 एकड़ जमीन होना जरूरी है।

अतिक्रमण की चपेट में खो गए खेल मैदान

जिले के कई कस्बे और गांव में सरकारी स्कूलों के खेल मैदान के लिए आरक्षित जमीन पर लोगों ने अतिक्रमण कर रखे हैं। मानपुर, बड़ागांव, टेकना, सोईंकलां में खेल मैदान की जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत ग्रामीण कर चुके हैं। डीईओ ने संकुल प्रभारियों को अपने संकुल के जितने भी सरकारी स्कूल में अतिक्रमण की स्थिति है, वहां पंचायत, अभिभावक और प्रशासन के सहयोग से खेल मैदान से कब्जे हटवाने की पहल करने को कहा गया था। लेकिन विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते खेल मैदान अतिक्रमणमुक्त नहींं हो सके हैं।

सिर्फ शहरी क्षेत्र काे छाेड़कर ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश स्कूलों में ताे है खेल मैदान

लाेक शिक्षण संचालनालय के आदेश से जिले के सभी शासकीय एवं अशासकीय स्कूलों में खेल मैदान व अन्य संसाधनों की जानकारी जुटाकर इसकी भौैतिक रिपोर्ट तैयार करवा रहे हैं। जिले के शहरी क्षेत्र को छोड़कर ग्रामीण क्षेत्र में संचालित सरकारी विद्यालयों के पास खेल मैदान है। सरकारी स्कूलों में कहां कहां खेल मैदान पर अतिक्रमण की स्थिति है इसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई जिला प्रशासन के सहयाेग से पूरी की जाएगी। वैसे जिले में शहरी क्षेत्र काे छाेड़कर ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादातर स्कूलाें के पास खेल मैदान उपलब्ध है।
वकील सिंह रावत, डीईओ, श्योपुर


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