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किसानों की चिंता:सोयाबीन की बाेवनी पिछड़ी, क्यारियों में धान की पाैध बचाने के लिए किसान कर रहे रतजगा

श्योपुरएक महीने पहले
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समय पर बिजली नहीं मिलने के कारण क्यारियों में उगाई धान की पौध बचाना भी हो रहा मुश्किल। - Dainik Bhaskar
समय पर बिजली नहीं मिलने के कारण क्यारियों में उगाई धान की पौध बचाना भी हो रहा मुश्किल।
  • बारिश हो नहीं रही, बिजली भी समय पर नहीं मिलने से बिगड़ रही है बाेवनी
  • किसान संगठन का गुस्सा... कृषि क्षेत्र काे रात 12 बजे के बजाय सुबह 6 बजे से बिजली सप्लाई का समय नहीं बदला तो आंदोलन करेगा भारतीय किसान यूनियन

जिले में मानसून की बेरुखी के साथ किसानों काे बिजली कंपनी भी झटका दे रही है। जिले में सोयाबीन की बाेवनी पिछड़ गई है ताे बारिश के इंतजार में धान की रोपणी भी शुरू नहीं हा़े पा रही है। क्यारियों में उगाई धान की पाैध बचाने के लिए किसान रतजगा करने काे मजबूर हैं। क्योंकि बारिश की खेंच से खेती के लिए बिजली की मांग के बीच बिजली कंपनी ने कृषि क्षेत्र काे रात 12 बजे से बिजली सप्लाई का शैड्यूल लागू कर दिया है। किसानों काे 10 घंटे थ्री फेज पर बिजली सुबह 6 बजे से दिए जाने की मांग भारतीय किसान यूनियन ने की है।

यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम मीणा ने बुधवार काे बिजली शैड्यूल जल्द नहीं बदलने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। किसानों में राेष इस बात काे लेकर है कि घाेषित शेड्यूल के मुताबिक कृषि लाइन पर इनदिनाें रात 12 बजे से दी जा रही बिजली पूरे 10 घंटे भी नहीं मिल रही है।

बमुश्किल 4 घंटे बिजली आती है, इसमें भी वॉल्टेज इतने कम रहते हैं कि ट्यूबवेल नहीं चलते हैं। घाेषित-अघाेषित कटौती के साथ ही ट्रांसफार्मरों पर कनेक्शनों का लाेड बढ़ने के कारण लाइनाें पर बार बार फाल्ट और ट्रिपिंग से आपूर्ति बाधित रहती है। पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से जिले में करीब 40 हजार हेक्टेयर में धान की फसल पर संकट मंडरा रहा है। क्यारियों में रोपणी के लिए लगाई गई धान की पाैध पानी की कमी और अधिक तापमान के कारण पीली पड़ रही है। हजाराें किसान अभी तक खेताें में धान की राेपाई शुरू नहीं कर सके हैं। अनियमित बिजली सप्लाई एवं जर्जर आपूर्ति तंत्र काे लेकर क्षेत्रीय किसानों में गुस्सा बढ़ रहा है।

किसान उठाते हैं जोखिम, फीडरों पर जोड़ते हैं फ्यूज

बिजली सप्लाई का शेड्यूल गड़बड़ाने के अलावा फीडरों पर क्षमता से ज्यादा कनेक्शनों के लोड के चलते ट्रांसफार्मर का फ्यूज उड़ने, लाइनों में फाल्ट और ट्रिपिंग की समस्या बन रही है। किसानों का कहना है कि कर्मचारी अपने फोन बंद रखते हैं तो अधिकारी फोन नहीं उठाते हैं। ऐसे में किसान खुद फाल्ट सुधारते हैं। चलती लाइन पर किसान अपनी जान जोखिम में डालकर खुद मरम्मत का काम करते हैं। समस्या को लेकर जब बिजली दफ्तर जाते हैं तो वहां भी कोई सुनवाई नहीं होती।

प्रेमसर में ट्रांसफार्मर लगाने में देरी से बिगड़ी व्यवस्था

प्रेमसर क्षेत्र मे किसानों ने बिजली सप्लाई में आ रही समस्याओं काे लेकर बिजली कंपनी के महाप्रबंधक से मुलाकात की। स्वीकृति के बाद ट्रांसफार्मर लगाने में देरी के कारण क्षेत्र की बिजली सप्लाई व्यवस्था बिगड़ रही है।

किसान बोले- बिजली नहीं मिली तो सूख जाएगी धान

जैनी में किसान रामअवतार मीणा के धान की रोपाई के बाद पानी नहीं मिलने से धान के पौधे सूखने लगी है। खेत की मिट्टी में दरारें पड़ने से पौधों की जड़ें कटने के कारण इलाके में करोड़ों रुपए की धान की फसल दांव पर लगी है। किसानों का कहना है कि 3 से 4 घंटे कम वोल्टेज में बिजली मिल रही है। इससे ट्यूबवेल फुंक रहे हैं।

शेड्यूल नहीं बदला ताे आंदोलन ही आखिरी रास्ता

बारिश में विलंब के साथ ही बिजली अव्यवस्था के चलते खरीफ सीजन की शुरुआत में ही बाेवनी का गणित गड़बड़ाने से आम किसानों पर संकट बढ़ रहा है। यदि जल्द शेड्यूल नहीं बदला ताे किसानों के पास आंदोलन ही आखिरी रास्ता है। -राधेश्याम मीणा, प्रदेश अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन, चढूनी

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