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रिजल्ट 64% से कम ताे प्राचार्यों का इंक्रीमेंट रुकेगा:शिक्षक बाेले- एक शिक्षक के पास चार-चार प्रभार, रिजल्ट खराब हुआ तो विभाग जिम्मेदार

श्योपुरएक महीने पहले
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  • शिक्षकों और प्राचार्यों को इंक्रीमेंट रोकने से लेकर चार तरह की कार्रवाई के लिए चेताया

लाेक शिक्षण संचालनालय की आयुक्त जयश्री कियावत ने परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए एक आदेश जारी कर सभी स्कूलों के शिक्षकों और प्राचार्यों को 64 प्रतिशत से रिजल्ट कम रहने पर इंक्रीमेंट रोकने से लेकर चार तरह की कार्रवाई के लिए चेताया है। लोक शिक्षण आयुक्त के आदेश के बाद ट्राइबल ब्लॉक कराहल में शिक्षक सकते में आ गए हैं।

इस संबंध में मप्र शिक्षक संघ ने गुरुवार काे आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त काे एक पत्र दिया है। इसमें विभागीय कार्यप्रणाली की हकीकत बताते हुए कहा है कि पूरे ब्लॉक में शिक्षकों की बेहद कमी और प्राचार्यों काे चार-चार संस्थाओं के प्रभार सौंपने के कारण शिक्षण व्यवस्था ठप पड़ी है। बिगड़ी हुई व्यवस्था शीघ्र दुरुस्त की जाए, अन्यथा रिजल्ट खराब रहने की जिम्मेदारी विभाग की हाेगी।

उधर इस संबंध में आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त ने प्राचार्यों काे अतिरिक्त प्रभार देना व्यवस्थागत मजबूरी बताई है। जिले के कराहल ब्लॉक में आदिम जाति कल्याण विभाग के अधीन कुल 336 विद्यालय संचालित है। अधिकांश स्कूलों में शिक्षकों के आधे से ज्यादा पद कई साल से नहीं भरे जा सके हैं। यहां तक कि शासन द्वारा 5 साल पूर्व उन्नयन किए गए शासकीय मिडिल और हाईस्कूलों में आज तक प्राचार्य की पदस्थापना नहीं की गई है।

वर्तमान में कराहल ब्लॉक के स्कूलों में शिक्षकों के 335 पद खाली पड़े हैं। कई गांव में एक ही शिक्षक के हवाले दाे से तीन स्कूल है। प्राइमरी से लेकर हायर सेकंडरी तक नामांकित 31 हजार बच्चों की पढ़ाई अतिथि शिक्षकों के भराेसे है। काेराेना महामारी के चलते करीब 7 माह तक बंद रहे सभी स्कूल अब खुुल ताे गए है, लेकिन शासन के निर्देश के अनुसार बच्चों काे अभी भी स्कूल बुलाने के बजाय शिक्षक माेहल्ला क्लास लगाकर पढ़ा रहे हैं।

प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में अर्द्ध वार्षिक मूल्यांकन के लिए ओपन बुक टेस्ट शुरू हाे गए हैं। लेकिन अधिकांश विषयों का कोर्स अधूरा हाेने से परिणाम काे लेकर स्कूल प्रबंधन खुद आश्वस्त नहीं है। जिम्मेदार अधिकारी भी व्यवस्थाओं के आगे बेबस नजर आ रहे हैं।

स्कूलों में शिक्षकों के 315 पद खाली, अतिथियाें के भराेसे पढ़ाई

ट्राइबल ब्लॉक में संचालित प्राइमरी एवं मिडिल स्कूलों में शिक्षकों के 315 पद खाली है। अधिकांश स्कूल में एक ही शिक्षक है। एक शिक्षक काे दो-दाे स्कूल का प्रभार दे रखा है। शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में शिक्षण कार्य के लिए अतिथि शिक्षक लगाए हैं। स्कूलों में नामांकित लगभग 31 हजार 500 छात्र-छात्राअाें की पढ़ाई अतिथि शिक्षकों के भराेसे हैं।

इन उदाहरण से समझिए सहरिया क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था

1. एक ही प्राचार्य संभाल रहे चार स्कूल: कराहल में पदस्थ प्राचार्य बीएल धाकड़ के पास हाईस्कूल सिलपुरी, उत्कृ़ष्ट हायर सेकंडरी स्कूल कराहल, एकलव्य विद्यालय कराहल और माॅडल हायर सेकंडरी स्कूल के प्रिंसीपल का प्रभार है। एक साथ चार स्कूलों काे संभालने के लिए उन्हें कराहल मुख्यालय से 20 किलोमीटर का फेरा लगाना पड़ता है।

2. बीआरसीसी के साथ दाे स्कूल के प्राचार्य का भी जिम्मा: कराहल संकुल के बीआरसीसी पीके श्रीवास्तव काे बरगंवा हायरसेकंडरी स्कूल तथा पटाेदा हाईस्कूल के प्राचार्य का प्रभार भी दे रखा है। उन्हें कराहल संकुल के स्कूलों का निरीक्षण करने के साथ ही 35 किलोमीटर दूर ग्राम बरगंवा और पटाेदा स्कूल की व्यवस्था भी देखनी हाेती है।

3. जाे जाखदा में संकुल प्राचार्य हैं वे ही बगवाज के छात्रावास अधीक्षक भी: धीरज रावत के पास ग्राम जाखदा हाईस्कूल के संकुल प्राचार्य के अलावा ग्राम बगवाज के छात्रावास अधीक्षक का प्रभार भी है। जाखदा और बरगंवा के बीच लगभग 45 किलोमीटर का फासला है। सामंजस्य बैठाना कितना मुश्किल है।

4. बीईओ ही संकुल प्राचार्य और वन्या रेडियाे प्रभारी भी: बीईओ सत्यप्रकाश भार्गव काे कराहल खंड शिक्षा अधिकारी के अलावा सेसईपुरा संकुल प्राचार्य और वन्या रेडियाे के प्रभारी अधिकारी का चार्ज भी साैंप रखा है।

जल्द व्यवस्था दुरुस्त नहीं की ताे रिजल्ट बिगड़ना तय

कराहल ब्लॉक में प्रभारियों के भराेसे शिक्षा व्यवस्था ठप पड़ने से बच्चों का भविष्य चाैपट हाे रहा है। विभाग ने एक प्राचार्य काे तीन से चार संस्थाओं का प्रभार दे रखा है। कई स्कूलों में शिक्षक ही नहीं है। संघ ने सहायक आयुक्त काे पत्र देकर व्यवस्था दुरुस्त करने का आग्रह किया है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी ताे रिजल्ट बिगड़ेगा और इसके लिए खुद विभाग ही जिम्मेदार हाेगा।

-धर्मेंद्र शर्मा, ब्लाॅक अध्यक्ष मप्र शिक्षक संघ कराहल

शासन ने प्राचार्य नहीं दिए ताे हम क्या करें

कराहल ब्लॉक में शिक्षण व्यवस्था के लिए जरूरत के मान से स्टाफ के खाली पद शासन द्वारा लंबे समय से नहीं भरे गए हैं। संस्थाएं चलाने के लिए एक प्राचार्य काे अतिरिक्त प्रभार नहीं दे ताे हम क्या करें। यह हमारी व्यवस्थागत मजबूरी है। रिजल्ट के नाम पर इधर उधर के बहानेबाजी करने के बजाए हमें सरकार से प्राचार्य दिला दें, व्यवस्था ठीक हाे जाएगी।

-एमपी पिपरिया, सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण विभाग श्याेपुर

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