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सिंचाई की चिंता:कोटा बैराज से राजस्थान के किसानों को पानी, मप्र सीमा में चंबल नहर सूखी, फसल पर संकट

श्योपुर13 दिन पहले
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  • मानसून की बेरुखी से भू-जल में अा रही गिरावट ने किसानों की चिंता अाैर बढ़ा दी है
  • दाहिनी चंबल नहर में पानी के लिए किसान संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बाद जनप्रतिनिधियों ने लिखे मुख्यमंत्री काे पत्र- जल संसाधन विभाग ने सीएडी को भेजी 2 हजार क्यूसेक पानी की डिमांड
  • ईई बोले खरीफ फसलाें की सिंचाई के लिए मध्यप्रदेश की सीमा में तीन दिन बाद पहुंचेगा पानी

सावन का महीना सूखा ही जाने से जमीन का हलक सूखने लगा है। मानसून की बेरुखी से भू-जल में आ रही गिरावट ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। हजारों हेक्टेयर रकबे में सोयाबीन और धान की फसल पर संकट के बादल मंडराते देख अब किसानों की उम्मीद चंबल नहर पर टिक गई है। सीएडी प्रशासन द्वारा काेटा बैराज से चंबल दाहिनी मुख्य नहर में राजस्थान के किसानों के लिए दाे हजार क्यूसेक पानी छाेड़ा जा रहा है, लेकिन यह पानी अंता -मांगराेल तक सीमित है। लगातार मांग के बावजूद मध्यप्रदेश की सीमा में चंबल नहर अभी भी सूखी ही पड़ी है। चंबल कमांड क्षेत्र में कराेड़ाें रुपए की फसल दांव पर लगने से क्षेत्रीय किसान चिंतित है। चंबल दाहिनी मुख्य नहर में पानी छाेड़ने की मांग काे लेकर किसान संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बाद शुक्रवार काे जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चाैहान काे पत्र लिखकर मध्यप्रदेश के किसानों के लिए चंबल नहर से अविलंब जलप्रदाय शुरू कराने की मांग की है।

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि धान व सोयाबीन की प्यासी फसलाें काे जल्द पानी नहीं मिला ताे किसानों काे नुकसान हाे जाएगा। वहीं खरीफ फसलाें की सिंचाई के लिए किसानों की बढ़ती मांग काे देखते हुए जल संसाधन विभाग की ओर से सीएडी प्रशासन काे पानी की डिमांड भेज दी गई है। जल संसाधन विभाग के ईई सुभाष गुप्ता ने काेटा बैराज से चंबल दाहिनी मुख्य नहर में छाेड़ा जा रहा पानी राजस्थान काे पार करके अगले तीन दिन में मध्यप्रदेश की सीमा में प्रवेश करने की उम्मीद जताई है।

पूर्व विधायक ने मुख्यमंत्री काे पत्र भेजकर कहा- मप्र के किसानों काे अविलंब नहर से पानी दाे
पूर्व विधायक बृजराज सिंह चाैहान ने शुक्रवार काे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चाैहान काे पत्र फैक्स किया। जिसमें श्री चाैहान ने कहा कि पर्याप्त वर्षा न होने के कारण चंबल कमांड क्षेत्र में हजाऱों हेक्टेयर सोयाबीन व धान की फसलें सूखने के कगार पर आ गई है। चंबल दाहिनी मुख्य नहर से राजस्थान के किसानों काे पानी दिया जा रहा है,तुरंत प्रभाव से मध्यप्रदेश के किसानों के लिए नहर में जल प्रवाह चालू करने की दरकार है। गांधी सागर बांध में पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध होने से खरीफ फसलाें की सिंचाई के लिए नहरों में पानी छाेड़ने से कोई दिक्कत नहीं होगी। अगर फसलाें काे जल्द पानी नहीं मिला ताे चंबल कमांड क्षेत्र में कराेड़ाें रुपए की फसल बर्बाद हाे जाएगी।

अब चंबल नहर से किसानों काे अास, सीएम को लिखा है पत्र
धान व सोयाबीन सहित खरीफ की मुख्य फसलें पानी के बिना मुरझाने लगी है। चंबल कमांड क्षेत्र में किसानों ने खेतों में खड़ी फसल अब भगवान भरोसे छोड़ रखी है। बरसात नहीं हाेने से गिरता भूजल स्तर भी चिंता बढ़ा रहा है। ट्यूबवेल कुछ घंटे चलकर हवा फेंकने लगे हैं। बोरिंग भी धान को नहीं बचा सकते। पानी के लिए अब चंबल नहर से किसानों की उम्मीद टिकी हुई है। इस संबंध में मुख्यमंत्री काे पत्र लिखा है।
बाबू जंडैल मीणा, विधायक, श्योपुर

औसत से कम बारिश, फसलाें काे अब पानी मिलना जरूरी
इस बार औसत से कम बारिश के कारण खरीफ फसलों की बाेवनी का काम पिछड़ गया। जिले में छितराई बारिश हुई है ,इकसार नहीं। कहीं पानी बरसा ताे सूखा रह गया। खासकर धान व सोयाबीन की फसल काे इस समय पानी की सख्त जरूरत है। यदि प्यासी फसलाें काे जल्द पानी नहीं मिला ताे किसानों काे नुकसान उठाना पड़ेगा।
डाॅ. लाखनसिंह गुर्जर, कृषि वैज्ञानिक ,कृषि विज्ञान केंद्र बड़ाैदा

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