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सफलता:5 साल के सैंपल पेपर, 2 घंटे रोजाना तैयारी से मिली सफलता

शिवपुरी22 दिन पहले
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चयनित होने पर प्रतिभाओं को बुके देकर सम्मानित करते हुए। - Dainik Bhaskar
चयनित होने पर प्रतिभाओं को बुके देकर सम्मानित करते हुए।
  • पहली बार जिले से एनटीएसई में 5 होनहार, जब तक पढ़ेंगे तब तक सरकार से मिलेगा वजीफा

एनटीएससी (नेशनल टैलेंट सर्च एग्जाम) के सिलेबस में एसएसटी (सोशल स्टडीज) के 40 फीसदी सवाल पूछे जाते हैं, लेकिन विद्यार्थी इनकी तैयारी परीक्षा के अंतिम वक्त पर करता है, जिसकी वजह से कई बार उन्हें असफलता हाथ लगती है इसलिए एनटीएसई के 5 साल के पूछे गए सवालों का बार-बार अध्ययन करने और परीक्षा के 2 महीने पहले से विषय पर फोकस करने से पहली बार शिवपुरी से नेशनल टैलेंट सर्च एग्जाम अर्थात एनटीएसई में 5 छात्रों का चयन हुआ, जबकि इससे पहले 2020 में सिर्फ एक छात्र को यह सफलता मिली थी।

टीचर का टिप्स- सफल होना है तो एसएसटी पर भी फोकस करना: 172 अंक लेकर एनटीएसई एग्जाम में सफल हुए शिक्षक कोमल जैन के बेटे आदित्य बताते हैं कि उन्हें इंडक्टेंस के सर ने टिप्स देकर बताया था कि कक्षा 10वीं में आमतौर पर विद्यार्थी साइंस और मैथ की तैयारी तो कर लेते हैं लेकिन एसएसटी छोड़ देते हैं।

इसी वजह से कई विद्यार्थी योग्य होने के बाद भी सफलता नहीं हासिल कर पाते। क्योंकि साइंस और मैथ विद्यार्थी द्वारा पड़ा हुआ होता है इसलिए इनके सवाल तो आसानी से हल कर लेते हैं, पर एसएसटी के डीप क्वेश्चन उनकी समस्या रहते हैं इसलिए वह सफल नहीं हो पाते।यही कारण है कि पिछले 5 साल के एनटीएसई में पूछे गए सवालों के जवाब हल करके समझा और फिर मेंटल एबिलिटी के साथ-साथ 2 घंटे अतिरिक्त पढ़ाई के लिए दिए, फिर सफलता मिल गई। अब आदित्य चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने के सपने को साकार करना चाहते हैं।

किसान की बेटी बोली घर में सबसे बड़ी है इस वजह से कुछ करके दिखाना चाहती थी, तैयारी की और मिल गई सफलता: कृषक बलराम धाकड़ की बेटी शिवानी धाकड़ ने बताया कि वह घर में सबसे बड़ी है, बेटी भी है। इस वजह से उस पर सबसे ज्यादा दायित्व था कि वह कुछ करके दिखाए। मैंने बस संकल्प लिया और एसएसटी के साथ-साथ अन्य विषयों पर भी फोकस किया। जिससे मुझे सफलता मिल गई ।अब में भविष्य में आईआईटी करके अपने परिवार के साथ-साथ छोटे भाई बहनों के लिए भी आइडल बनना चाहती हूं।

शिवपुरी के लिए फक्र की बात है

शिवपुरी शहर के लिए फक्र की बात है कि शहर के बच्चों ने स्थानीय स्तर पर ही पढ़ाई करके सफलता हासिल की। अब तक के इतिहास में यह पहला अवसर है जब जिले से एक साथ 3 बच्चे इंडक्टेंस ने दिए और दो बच्चे त्रिलोक धाकड़ और विकास जाटव भी इस परीक्षा में सफल हुए। अब इन्हें एक और परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी इसके बाद इन्हें सरकार की ओर से जब तक पढ़ेंगे तब तक वजीफा मिलेगा। -विवेक श्रीवास्तव, शिक्षाविद और संचालक इंडक्टेंस शिवपुरी

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