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  • After Inspecting The Procurement Centers, The Collector Said Greet The Farmers With Folded Hands, Give Them Cold Water To Drink.

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समर्थन मूल्य पर खरीदी:खरीदी केंद्रों का निरीक्षण कर कलेक्टर बोले- किसानों काे हाथ जोड़कर नमस्कार करो, उन्हें ठंडा पानी पिलाओ

शिवपुरीएक महीने पहले
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अफसरों ने किया फसल खरीदी केंद्रों का निरीक्षण, दिए जरूरी निर्देश - Dainik Bhaskar
अफसरों ने किया फसल खरीदी केंद्रों का निरीक्षण, दिए जरूरी निर्देश
  • देर से पैसा मिलने के कारण पंजीकृत किसान फसल बेचने नहीं आ रहे
  • पंजीकृत किसानों को मोबाइल से मीठे अंदाज में बात कर बुलाएंगे

समर्थन मूल्य पर चना और सरसों की खरीदी शुरू हो गई। इसके लिए 20 केंद्र जिले में बनाए गए। हालात यह है कि सुबह से शाम तक शनिवार को एक भी किसान खरीदी केंद्र पर फसल बेचने नहीं आया। जिसकी अहम वजह मंडी में समर्थन मूल्य से ₹100-200 कम दाम किसान को मिल रहे है। ऐसे में किसान तुरंत फसल बेचकर नगद दाम पाना चाहता है। जबकि समर्थन मूल्य पर फसल बेचने पर उसे 15 दिन से लेकर महीने भर तक का इंतजार पैसे के लिए करना पड़ता है।

ऐसे में अधिकारियों की परेशानी यह है कि वह कैसे समर्थन मूल्य पर किसानों को फसल बेचने बुलाएं। इसलिए कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह और एसपी राजेश सिंह चंदेल ने इन खरीदी केंद्रों का निरीक्षण कर केंद्र अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह किसानों के हाथ जोड़कर केंद्र पर फसल बेचने आने के दौरान उनका स्वागत करें,उन्हें ठंडा पानी पिलाएं,व्यवहार में व्यापारी सी नमृता रखें।

साथ ही जो किसान नहीं आ रहे हैं उन्हें फोन पर मीठे ढंग से बात कर बुलाने का प्रयास करें। दरअसल जिले में 20 केंद्रों पर चने की खरीदी शुरू हुई है। पिछली बार चना खरीदी के मंडी में खुले में केंद्र बने। इस वजह से लोगों का चना बारिश आने से भीग गया। और किसानों को भुगतान के लिए परेशान होना पड़ा। कलेक्टर ने निर्देश दिए है कि किसानों के साथ मीठा व्यवहार किया जाना चाहिए।

फसल खरीदी व्यवस्था सही पर भुगतान में देरी
प्रशासन ने इस बार व्यवस्था तो खरीदी की तगड़ी कर दी ।ताकि फसल बेचने पर किसान को नुकसान नहीं हो।लेकिन भुगतान की परेशानी अभी भी किसानों के मन में है। वह ₹100.200 रुपए के लालच में फसल को समर्थन मूल्य पर बने केंद्रों पर बेचने नहीं आना चाहता। क्योंकि यहां फसल बेचने के बाद उसे 15 से 20 दिन इंतजार भुगतान के लिए करना है। जबकि व्यापारी बाजार में सुबह फसल खरीदता है और तोल होते ही शाम को उसे पैसे दे देता है। ऐसे में किसान समर्थन मूल्य पर फसल बेचने में रुचि नही दिखा रहे।

एक साल पहले 2020 में हालात विपरीत थे तब बाजार और सरकारी दामों में ₹1000 रुपए का फर्क था

फसल बेचने वाले किसान बोले अभी तो मंडी में भाव अच्छे है।पैसे का इंतजार कौन करें पडोरा के किसान रामदेव ने बताया कि खरीदी केंद्र पर पैसा ले जाने के लिए भी ट्रैक्टर ट्रॉली निकालो, तौल में पैसा खर्च होता है जबकि पैसा हाथ में महीने भर बाद आता है। कई किसानों का पैसा पिछली बार का अब तक नहीं मिला। इस बार बाजार में ही सोच रहे हैं क्योंकि यहां तुरंत दाम मिल जाएगा। सुबह फसल बेचने पर शाम को पैसे मिल जाते हैं और भाव भी इस समय ₹4800 के आसपास चल रहा है। फिर ₹200 के चक्कर में कौन मगजमारी करें।

खरीदी केंद्र पर मानक और अमानक की लंबी सूची लटकी है। जिसके मुताबिक चने में 14 और सरसों में 8 प्रतिशत से ज्यादा नमी नहीं होनी चाहिए। मौजूदा हमले से जब अधिकारियों ने पूछा कि नमी का इतना सटीक अंदाजा कैसे लगाएंगे तो उनका जवाब था कि दांतों से काट कर देखेंगे अगर कट की आवाज आती है तो उसमें नमी का स्तर ठीक माना जाएगा। हालांकि उनका यह भी कहना था कि इसके लिए एक यंत्र आता है जिससे नमी को मापते हैं।

समर्थन मूल्य पर फसल बेेचने में अरुचि का कारण
समर्थन मूल्य पर चना बेचने में रुचि कम इसलिए भी है कि सन 2020 में चने पर ₹1000 अधिक समर्थन मूल्य मिल रहा था। जबकि इस बार बाजार में ही यानी 4600 से ₹4800 तक भाव मिल रहे।कृषि विभाग के उपसंचालक यूएस तोमर ने बताया कि इस बार समर्थन मूल्य पर खरीदी में चने के किसान कम ही रुचि दिखाएंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि समर्थन मूल्य पर इस बार 51 रुपए दाम रखा गया है।जबकि बाजार में ही 48 से 5000 तक चना बिक रहा है। ज्यादातर किसानों के लिए अंतर ज्यादा मायने नहीं रखता।
बाजार में बेचने पर फसल की नगदी तुरंत मिलती है
फसल लेकर आए किसानों का कहना है कि मंडी के खरीद केंद्र की बजाय खुले बाजारों में फसल बेचने पर उन्हें शाम को ही नगद पैसा मिल जाता है। फसल में होने वाली नमी को लेकर भी बहुत ज्यादा सख्ती नहीं रहती जबकि सरकारी केंद्र पर भेजने के बाद उसे कम से कम 15 दिन तक का भुगतान का इंतजार करना होगा।पेमेंट भी बैंक में आएगा जिसे लेने के लिए उसे दोबारा शहर आना पड़ता है।इस वजह से इस बार कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह ने मंडियों में केंद्र ना बनाकर खरीदी के लिए वेयर हाउस में केंद्र बनाए ताकि चने के भीगने का सवाल ही उत्पन्न ना हो।

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