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स्कूल छोड़ चुके बच्चों के लिए पहल:15 साल से अधिक उम्र के ‘निरक्षर’ को ‘अक्षर साथी’ पढ़ाएगा

शिवपुरी15 दिन पहले
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  • पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को फिर से स्कूल की चौखट पर लाने एप से सर्वे, बच्चों के संग परिजनों का भी सर्वे हो रहा

पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को फिर स्कूल की चौखट तक लाने के लिए प्रदेश सरकार तकनीक की मदद ले रही है। स्कूल छोड़ चुके बच्चों के संग उसके परिवार के 15 साल से अधिक उम्र के अशिक्षित सदस्यों का भी सर्वे अब एप के जरिए किया जा रहा है। इस सर्वे के लिए सरकारी स्कूल के हर शिक्षक को मेंटर्स के रूप में जिम्मेदारी दी है।

सर्वे के दौरान एप में यह व्यवस्था भी रहेगी कि बच्चों के पालकों व परिवार के 15 साल से अधिक साल के अन्य सदस्यों की शैक्षणिक योग्यता के आधार पर निरक्षरों का चिह्निंत भी किया जाएगा। नोडल स्कूल के प्रधान अध्यापक द्वारा 15 साल से अधिक आयु वर्ग के निरक्षरों की सूची तैयार कर इन्हें साक्षर कराने के लिए गांव के शिक्षित महिला या पुरुष को ‘अक्षर साथी’ के रूप में चिंह्नित किया जाएगा। ‘अक्षर साथियों’ के साथ असाक्षरों की बैचिंग-मैचिंग कर गांव में साक्षरता कक्षाओं का संचालन कराकर साक्षरता दर बढ़ाने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। सर्वे 31 जुलाई 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है।

बच्चों व निरक्षरों के साक्षर की मेंटर्स शिक्षक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी

संपर्क के दौरान स्कूल में दर्ज, स्कूल से बाहर, पलायन करने वाले, मृत्यु हो चुकी आदि प्रकार के बच्चे एवं निरक्षण चिह्निंत होंगे। जिसका विस्तृत विवरण चर्चा के समय दर्ज करना है। स्कूल प्रवेश गृह संपर्क के तहत यदि कोई बच्चा कहता है कि मैं तो अध्ययनरत हूं, तो संबंधित मेंटर्स उसके स्कूल जाकर इस बच्चे की पुष्टि करेगा। यदि वह बच्चा दर्ज नहीं है तो पुन: बच्चे के परिवार से संपर्क कर उन्हें मोटिवेट कर स्कूल में दाखिला दिलवाएगा। यदि कोई बच्चा स्कूल से बाहर है तो उसे आवासीय विशेष प्रशिक्षण केंद्र या स्कूल में सीधे दर्ज करवाकर आयु अनुरूप दक्षताएं प्राप्त करवाने और स्कूल में नियमित उपस्थिति व निरक्षरों को साक्षर करवाने की मेंटर्स शिक्षक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी।

बच्चों का फोटो खींचकर जिओ-टैगिंग करनी होगी

एक मेंटर शिक्षक को स्कूल से 10 से 15 बच्चे की जवाबदेही सौंपी है। मेंटर शिक्षक द्वारा संपर्क अभियान के लिए जो स्कूल से वंचित व लक्षित बच्चों की सूची उपलब्ध कराई जाएगी। उसमें छात्र के घर का पता, अंतिम वार किस स्कूल में दर्ज था और बच्चों के परिवार की राशन की दुकान का पता दर्ज है।

इस जानकारी से मेंटर्स शिक्षक एप में बच्चे व परिवार से हुई भेंट को दर्ज कर बच्चों के 100% प्रवेश व स्कूल से बाहर बच्चों का फॉलोअप प्लान की जानकारी भी दर्ज करेंगे। एप में मेंटर्स शिक्षक को बच्चे की भेंट के दिन जियो-टेग फोटो के आधार पर बच्चे से संपर्क की पुष्टि करनी होगी। जिस व्यक्ति से संपर्क किया है, उसका सही नाम, मोबाइल, फोटाे भी लेनी होगी। साथ ही संपर्क के दौरान उस गांव के सरपंच या वार्ड पार्षद का सहयोग लिया जाएगा तथा उनका नाम व मोबाइल नंबर भी लेना होगा।

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