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समस्या:चिटौरा में बोर की मोटर खराब, ट्यूबवेल से पानी ढोकर लाना ग्रामीणों की मजबूरी

शिवपुरी6 दिन पहले
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  • ग्रामीणों की पीड़ा- शिकायत के बाद भी जिम्मेदार नहीं कर रहे सुनवाई

शिवपुरी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत चिटौरा की हरिजन बस्ती में लगे शासकीय नलकूप की मोटर महीनों से खराब होने के चलते गांव में भीषण पेयजल संकट गहरा गया है। इससे ग्रामीण खेतों पर लगे ट्यूबवेलों से पानी लाकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं। ग्रामीण गिरवर जाटव ने बताया है कि हमारी हरिजन बस्ती में रखा ट्रांसफार्मर को डेढ़ साल पहले बिजली कर्मचारी उठा ले गए थे। तब से आज तक ट्रांसफार्मर को पुन: रखने की कोई सुध नहीं ली गई है। इतना ही नहीं बस्ती में लगे शासकीय बोर भी एक साल से खराब है।

इसके चलते हमें खेतों पर लगे ट्यूबवेलों से पानी भरकर लाना पड़ रहा है। खास बात यह है कि शासन द्वारा हरिजनों के लिए तमाम योजनाएं चलाई जा रही है। इसमें उन्हें नि:शुल्क पानी व विद्युत व्यवस्था प्रदाय करने की घोषणाएं यहां तोती सावित नजर आ रही हैं।

ग्रामीण बोले- एक साल से मोटर खराब है
ग्रामीणों की मानें तो गांव में विद्युत प्रकाश व पेजयल उपलब्ध कराने के लिए शासन द्वारा फीडर सेपरेशन के तहत रखा गया विद्युत ट्रांसफार्मर को बिजली अधिकारी डेढ़ साल पहले उठा ले गए थे। वहीं एक साल से बोर की विद्युत मोटर खराब पड़ी हुई है। इससे हमें बिजली व पानी दोनों उपलब्ध नहीं होने से परेशान बने हुए हैं। इसके बाद भी न तो पेयजल पर ग्राम पंचायत ध्यान दे रही है और न ही विद्युत व्यवस्था पर बिजली अफसर ध्यान दे रहे हैं। इससे ग्रामीणों कई मूल भूत सुविधाओं से वंचित हैं।

चिटौरीखुर्द के आदिवासियों के खाते में नहीं आई साग-सब्जी के लिए मिलने वाली राशि
करैरा|आदिवासियों के लिए हर माह साग-सब्जी के लिए सरकार द्वारा प्रदाय किए जाने वाले 1 हजार रुपए की राशि चिटौरीखुर्द के आदिवासियों के खाते में इस माह में नहीं आई है। रंजीत आदिवासी ने बताया है कि गांव के 80 से अधिक परिवारों को कुछ को इस माह तो कुछ को कई माह से राशि नहीं मिली है। इससे वह परेशान बने हुए है। आदिवासियों का कहना है कि साग-सब्जी के लिए पैसे दिलाने के लिए गांव में आने वाले जनप्रतनिधियों व अधिकारियों को कई बार अवगत करा चुके हैं।

इसके बाद भी गांव की आदिवासी महिलाओं के खाते में राशि नहीं आई है। उनका कहना है कि सरकार ने सहरिया परिवारों की महिलाओं को साग-सब्जी के रुपए देना शुरू किया लेकिन वे कुछ माह ही खातों में आकर रह गए। सहरिया परिवार की महिलाओं व पुरुषों ने एक हजार रुपए प्रतिमाह की राशि जल्द खातों में डलवाए जाने की मांग की है।
वहीं इस संबंध में विनोद शर्मा, रोजगार सहायक चिटोरा का कहना है कि गांव में बोर खराब पड़ा है इसके लिए सभी बजट सरपंच व सचिव पर ही आते हैं वे ही इस संबंध में बता सकेंगे।

डेढ़ साल से हैं परेशान
^गांव में डेढ़ साल से विद्युत ट्रांसफार्मर व एक साल से बोर खराब होने से हम परेशान बने हुए हैं।
गिरवर जाटव, निवासी चिटोरा


खाते में नहीं आई राशि
^इस माह हमारे खातों में आने वाली साग सब्जी की राशि नहीं मिली है, इससे हम परेशान है।
रंजीत आदिवासी, निवासी चिटौरखुर्द

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