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विरोध:इंटीग्रेटेड यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट सिस्टम निरस्त करें

शिवपुरी8 दिन पहले
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  • अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इंटीग्रेटेड यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट सिस्टम के विरोध में सौंपा ज्ञापन

विश्वविद्यालय की गतिविधियों का डिजिटल मोड में लाना और ऑटोमेशन किया जाना स्वागत योग्य कदम है। लेकिन जिस तरीके से आईयूएमएस क्रियान्वित किया जा रहा है। इसकी समीक्षा की जानी चाहिए ताकि विद्यार्थियों के हितों से खिलवाड़ न हो। यह बात अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र नेताओं ने कलेक्टोरेट पहुंच अपनी बात राज्यपाल के नाम एसडीएम अरविंद बाजपेई को सौंपे ज्ञापन में कही।

छात्र नेताओं ने कहा कि विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय प्रशासन से संबंधित सभी गतिविधियों को नियंत्रण करने का उद्देश्य से सभी तरह की सूचनाओं को एक ही प्लेटफार्म पर केंद्रित किया जा रहा है इसे लेकर सवाल खड़े हो गए हैं, इस प्रणाली के कारण कई विसंगतियां पैदा होंगी और विश्वविद्यालय की व्यवस्था प्रभावित होगी।

सर्वाधिक महत्वपूर्ण है कि यह प्रणाली शिक्षा नीति की मूल भावना के विपरीत है। एक तरफ पूरे देश में व्यवस्थाओं को विकेंद्रित करने और अधिक स्वायत्तता करने को लेकर कदम उठाया जा रहा है। मध्य प्रदेश में आज भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में इंटरनेट की उपलब्धि का एक समान नहीं है।

ज्ञापन के दौरान मुख्य रूप से जिला संयोजक मयंक राठौर, नगर मंत्री विवेक धाकड़, वेदांश सविता, आदित्य पाठक, प्रद्युम्न गोस्वामी, नगर उपाध्यक्ष कौशल यादव, एकता शर्मा, संदीप शर्मा, अविनाश समाधिया, सचिन सारस्वत, रत्नेश तिवारी, मनशिका गोयल, निहारथी गोयल, प्रियांश दुबे, आदित्य राठौर, पार्थ नरवरिया, सागर तिवारी, मंजीत के साथ 2 दर्जन से अधिक छात्र-छात्रा मौजूद रहे।

ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी कैसे जुड़ेंगे आईएमएस से

ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी उच्च शिक्षा में पढ़ रहे आईएमएस के माध्यम से विद्यार्थी कैसे जुड़ेंगे, यह एक बड़ा प्रश्न है? कई विश्वविद्यालयों के पास आज भी इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को लेकर पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है ऐसे में यह व्यवस्था किस तरीके से संचालित होगी।

विश्वविद्यालय की दिन प्रतिदिन की गतिविधियां परीक्षा नियंत्रक सिस्टम और अकाउंट भी इसके दायरे में आ जाएंगे। आईयूएमएस को संचालित करने वाले विश्वविद्यालय के हाथ में सभी विश्व विद्यालय की व्यवस्था देना अनुकूल नहीं है। यह विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को लेकर भी कुठार घात हैं और यदि सभी विश्वविद्यालय का नियंत्रण एक ही विश्वविद्यालय के पास होगा तो एकाधिकार की भी समस्या रहेगी।

सभी विश्वविद्यालयों की जानकारियों को एक ही प्लेटफार्म पर ले जाना अव्यवहारिक है और अधिक जटिलता पैदा करेगा। कुछ विश्वविद्यालयों में परीक्षा व्यवस्था आज भी पुराने तरीके से संचालित की जा रही है उनमें कुछ सुधार यदि संभव है तो किया जाना चाहिए लेकिन परीक्षा प्रणाली को ऑटोमेशन पर ले जाना परीक्षा की गोपनीयता के दृष्टिकोण से उचित कदम नहीं है।

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