महिला शक्ति को नमन:पति की नाैकरी छूटी ताे पत्नियों ने आत्मनिर्भर बनकर घर खर्च की जिम्मेदारी संभाली

शिवपुरी9 महीने पहले
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लॉकडाउन में घर के मुखिया का रोजगार छिन जाने से बिगड़े हालात संवारने महिलाओं ने गृहलक्ष्मी बनकर ऐसा संघर्ष किया कि वे परिवार के लिए अन्नपूर्णा साबित हुईं। विपरीत हालात में अपने हुनर से परिवार को नई पहचान दी। किसी महिला ने पति की नौकरी जाने पर नमकीन का व्यवसाय शुरू कर हालात सुधारे तो किसी ने ब्यूटी पार्लर और किराने की दुकान खोलकर अपनों की परवरिश की।

फैक्ट्री से पति को निकाला तो सहारा बनी पत्नी चंदा
कोरोना ने जिस चंदा लोधी के पति गजेंद्र लोधी से उसका पुणे स्थित नमकीन फैक्टरी से रोजगार छीना, पत्नी ने उसी रोजगार को पति की सबसे बड़ी ताकत बनाया। नमकीन उद्योग में वह मजदूर थे और चंदा ने ननद कीर्ति के नाम पर खुद का नमकीन बेचने का काम शुरू करने की ठानी और उसने पति को नमकीन उद्योग का मालिक बना दिया। इसके लिए उसने स्व सहायता समूह से लोन लिया और पति से नमकीन बनाना सीख

खुद तैयारी की। दोनों ने मिलकर न केवल नमकीन फैक्ट्री लगाई बल्कि सप्लाई का जिम्मा भी खुद संभाला। हर महीने 15 से 20 क्विंटल नमकीन बनाकर बेचने लगे। इससे उन्हें हर माह 15 से ₹20 हज़ार का मुनाफा हो रहा है। इस उद्योग से गांव की अन्य महिलाएं भी प्रेरणा लेकर जुड़ रही हैं।

पति की नौकरी गई तो ब्यूटी पार्लर शुरू कर परिवार को उबारा
शहर के पुरानी शिवपुरी निवासी आसमां खान के पति शहजाद खान गाड़ियों पर नंबर प्लेट बनाने का काम करते थे। लॉकडाउन के बाद उनका काम बंद हो गया। इससे घर के आर्थिक हालात बिगड़े गए। ऐसे में कक्षा 6 और कक्षा 7 में पढ़ने वाले 2 बच्चों की परवरिश के लिए आसमां ने शादी से पहले सीखे गए ब्यूटी पार्लर कोर्स को आजीविका का साधन बनाने का फैसला लिया। पति की मदद से बैंक में लोन को आवेदन दिया। 50 हज़ार का लोन स्वीकृत होने पर आसमां ने ब्यूटी पार्लर की शुरुआत की। आसमां इसी ब्यूटी पार्लर से घर का खर्च निकाल रही हैं। वे कहती हैं कोरोना ने शुरू में कष्ट जरूर दिया लेकिन आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी दिया।

लॉकडाउन में काम छिना तो राखी ने खोली किराना की दुकान
मुड़ेरी निवासी राखी रावत के पति शिव सिंह रावत गाड़ी चलाते थे। लॉकडाउन से पहले पति ने एक पुरानी कार लोन लेकर खरीदी। लेकिन लॉकडाउन के बाद सब बंद हो गया। किस्त तक भरने के पैसे नहीं थे। परिवार की आर्थिक हालात बिगड़ गए। ऐसे में राखी ने अपने महिला समूह के साथ घर के हालात संवारने संतोषी महिला समूह के माध्यम से लोन लिया। इससे उन्होंने किराना की दुकान खोली। आज गांव में अधिकांश लोग इसी दुकान से किराने का सामान लेते हैं, क्योंकि राखी कम मुनाफे पर सामान बेचती हैं। इससे आर्थिक हालात सुधर गए। धीरे-धीरे वह आत्मनिर्भर बनकर अपने समूह की 9 और महिलाओं को काम करने की प्रेरणा दे रही हैं।

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