व्यवस्था / अहमदाबाद से गोरखपुर पहुंचने 3200 रुपए एक सीट का किराया लिया तब मिली बस में जगह

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  • होटल वाला बोला-अब अपना रिश्ता खत्म, तुम अपने घर जाओ, मजबूरी में लौटे, नेपाल और गोरखपुर के रहने वाले शेफ और वेटर

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

शिवपुरी. लॉकउाउन के दौरान हम अहमदाबाद में ही फंसे रहे। जहां होटल मालिक को विश्वास था कि जल्द लॉकडाउन खत्म हो जाएगा और हमारा भी ऐसा ही मानना था इसलिए हम वहीं रुक गए और इस दौरान दाल चावल खाकर हमने दिन गुजारे, लेकिन चौथा लॉकडाउन शुरू होते ही हमें होटल मालिक ने घर जाने को कहा और बोला कि कब तक मैं तुम्हारा खर्चा उठाऊं। यहां तुम्हारा कुछ होने वाला नहीं हैं इसलिए अपने घर चले जाओ। इसके बाद मजबूरी में हमने अपनी जमा पूंजी से 3200 रुपए खर्च कर प्रति सवारी रुपया जब बस संचालक को दिया तो वह हमें अहमदाबाद से गोरखपुर पहुंचाने के लिए राजी हुआ। उसमें भी वह हमें कानपुर तक छोड़ने राजी हुआ जहां से हमें गोरखपुर के लिए अलग से साधन देखना होगा और नेपाल के लिए भी अलग से कुछ यात्रियों को जाना होगा। 
गुरुवार को बस में सवार गोरखपुर के लिए चले होटल कर्मचारी टेक बहादुर ठाना, नरेंद्र सोनी, रमेश शाही, तेज बहादुर, हिमाल सोनी, राजू थापा, वीरेंद्र लोकमान ने बताया कि वह दो महीने तक वहां अपनी सेवाएं देते रहे और इस दौरान जब खाने की बात आई तो हमें दाल चावल ही उपलब्ध कराया गया। होटल मालिक ने जब आगे भोजन देने से मना किया तो हमने फिर अपने घर जाने की तैयारी की। जिस बस में हम सवार होकर जा रहे हैं इसमें  4 महिला, 9 बच्चे, 52 पुरुष शामिल हैं। यह बस शिवपुरी में गुना बायपास पर खराब हो गई जिससे हमें 2 घंटे यहां रुकना पड़ा। इस दौरान वैभव पर्यावरण संस्था के वीरेंद्र शर्मा, सुशील दीक्षित, डॉ. सीताराम गुप्ता, ओमपुरी गोस्वामी, रेखा श्रीवास्तव, सुनील सेन, डॉ. धर्मेंद्र दीक्षित,नीतेश शर्मा ने वहां पहुंचकर हमें भोजन उपलब्ध कराया। इसके बाद हमने कानपुर के लिए बस ठीक होने पर रवानगी डाली। 

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