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बैठक:स्कूल संचालक बोले- बसों की फिटनेस, बीमा, ड्राइवर नहीं, अब कैसे आपको बसें दें

शिवपुरी10 दिन पहले
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  • प्रशासन ने स्कूल संचालकों को बैठक में बसें उपलब्ध कराने के दिए निर्देश

बसों की न फिटनेस है, न बीमा है, न ही इन दिनों बसों के चालक। ऐसे में हम कैसे आपको बसें दे दें। हर बार चुनाव में हम आपको बसें देते हैं लेकिन इस बार हमें बसें देने में कठिनाई इसलिए है कि मार्च से स्कूल बंद हैं और 8 महीने से बसें फिट नहीं हैं और चालक भी नहीं हैं। स्कूल संचालकों के इस जवाब पर जिला प्रशासन ने दो बसों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। यह वाक्या स्कूल संचालकों की प्रशासन के साथ आयोजित हुई चुनाव तैयारी की बैठक का है।

स्कूल संचालकों के साथ हुई बैठक में प्रशासन ने कहा कि इस बार कोविड के चलते बसों की आवश्यकता अधिक रहेगी। मतदान केंद्र भी अधिक हैं। इसलिए पार्टियों को भेजने के लिए बसों की आवश्यकता है। आप सभी को प्रशासन की मदद करनी चाहिए और हमें बसें उपलब्ध करानी चाहिए।

इस पर स्कूल संचालकों ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि 20 मार्च से स्कूल बंद हैं। तब से एक दिन को भी बसें नहीं चली हैं। इन 8 महीनों में हालात यह हो गई कि कई बसों की बैट्रियां खराब हैं तो कई बसों की बायरिंग ही चूहे कुतर गए हैं। ऐसे में हम कैसे बसें आपको दें। स्कूल संचालकों की इस परेशानी पर प्रशासन ने उन्हें सहयोग तो नहीं किया, लेकिन निर्देश जारी कर यह अवश्य कहा कि आप बसों की अविलंब व्यवस्था करें। बसें आज से ही प्रशासन ने अधिग्रहित कर ली हैं।

स्कूल संचालकों की परेशानी

  • स्कूल 8 महीने से बंद होने से बसें चली नहीं, अब एक दम कैसे रोड पर बसों को उतार दें।
  • अधिकांश स्कूल संचालकों पर ठेकेदार ऑपरेटरों की बसें हैं, जिनसे कांटेक्ट के आधार पर बसों का संचालन होता है।
  • मार्च से बसें न चलने से कई बसों के चालक काम छोड़ बैठे हैं और उन पर वाहनों की किस्त जमा करने का भी पैसा नहीं है।
  • बीमा के पैसे जमा नहीं किए क्योंकि बसें चली ही नहीं। बसों की फिटनेस की भी समस्या। आगामी दिनों में भी स्कूल खुलने के आसार नजर नहीं आ रहे ऐसे में एक बस के बीमा की राशि ही 60-70 हजार रुपए होती है, सभी बसों की बीमा राशि वह कहां से इसे भरें।
  • ऑनलाइन कक्षाएं संचालित होने से कई बच्चे ऐसे है जिनके अभिभावकों ने स्कूल फीस ही जमा नहीं कराई। नई कक्षाओं की फीस तो अलग है पुरानी फीस भी जमा नहीं हो सकी है। इन सब वजहों से स्कूल संचालकों को परेशानी है।

प्रशासन की यह है मजबूरी

  • प्रशासन की मजबूरी यह है कि इस बार कोविड के चलते बसों में ज्यादा कर्मचारियों को नहीं बैठा सकते इसलिए अधिक बसों की आवश्यकता है।
  • उपचुनाव के लिए इस बार पोहरी और करैरा में अधिक मतदान केंद्र बने हैं इसलिए पार्टियों को रवाना करने के लिए अधिक बसों की आवश्यकता होगी।
  • प्रशासन स्कूल संचालकों की परेशानी को मानता है, लेकिन चुनाव कराना उनकी मजबूरी है इसलिए बसों की अतिरिक्त व्यवस्था यदि जिले के बाहर से भी करना पड़ा तो वह इस दिशा में प्रयास कर रहे हें।
  • 80 बसों की आवश्यकता के लिए जिले के बाहर से मंगाने पर भी प्रस्ताव दिया गया है।
  • मतदान पार्टियों के अलावा पुलिस को भी चुनाव केंद्रों तक जाने वाहन उपलब्ध कराने हैं इसलिए इनकी व्यवस्था में भी महकमा तैयारियों में जुटा है।
  • स्कूल संचालकों पर 150 बसें हैं। ये बसे मिल जाती हैं तो मतदान दलों तक पार्टियों को भेजने में आवागमन की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

हम प्रशासन के साथ
^ऐसा कौन सा चुनाव है जिसमें स्कूल संचालकों ने बसें ना दी हों। हम तो सदैव प्रशासन के साथ रहते हैं, चुनाव में बसें उपलब्ध कराना हमारी भी जिम्मेदारी है। लेकिन सवाल यह है कि 8 महीने से स्कूल नहीं खुले, और बसों की फिटनेस ठीक नहीं है तो फिर हम क्या करें।
शिव कुमार गौतम,पूर्व अध्यक्ष, सीबीएसई,आईसीएसी स्कूल एसोसिएशन

जो बसें फिट हैं उन्हें हम दे सकते हैं
^स्कूल में अधिकांश वाहन, बस ऑपेरटर यूनियन के हैं। उनके वाहनों की फिटनेस, बीमा तक नहीं है। क्योंकि 8 माह से स्कूल ही बंद हैं। ऐसे में प्रशासन से साथ बैठक हम कर चुके हैं। जो वाहन सही सलामत हैं वह हम दे सकते हैं। लेकिन सारी बसें तो हम नहीं दे सकते न। प्रशासन को इस दिशा में भी सोचना चाहिए।
गीता दीवान, अध्यक्ष टीचर्स एसोसिएशन सीबीएसई आईसीएसई एसोसिएशन

स्कूल संचालकों को दिशा निर्देश दिए हैं
^चुनाव अत्यावश्यक कार्य है। बसों की आवश्यकता इस बार अधिक है। हमने स्कूल संचालकों को दिशा निर्देश जारी कर दिए है। वह कुछ बसें हमें दे रहे हैं। अधिकारियों से भी उनसे बात करने को कहा है। दूसरे जिले से भी वाहनों की जरूरत पढ़ी तो हम व्यवस्था करेंगे।
अक्षय कुमार सिंह, कलेक्टर

चुनाव के लिए 300 बसों के मेनेजमेंट में जुटा प्रशासन

स्कूल बसें- 150 हैं और निजी बसें 150 बसें जुटाई जा रही हैं। इनमें से पुलिस पार्टियों के लिए 106 बसें चाहिए और मतदान दलों के लिए के लिए 200 बसें चाहिए।

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