स्मृति शेष / जापान के प्रधानमंत्री को जिस यथार्थ गीता को प्रधानमंत्री मोदी ने भेंट किया उसका प्रकाशन करने वाले स्वामी वज्रानंद ब्रह्मलीन

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  • जापानी भाषा में रची यथार्थ गीता की जिस प्रति को प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी प्रधानमंत्री को सौंपा था
  • स्वामी अड़गड़ानंद महाराज के शिष्य स्वामी वज्रानंद ने 23 साल पहले शिवपुरी आकर परमहंस आश्रम की स्थापना की

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

शिवपुरी. जापानी भाषा में रची  यथार्थ गीता की जिस प्रति को प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी प्रधानमंत्री को सौंपा था। उस कृति का प्रकाशन करने में अपना योगदान देने वाले स्वामी वज्रानंद जी महाराज   शनिवार की रात ब्रह्मलीन हो गए। वह 67वर्ष के थे। खास बात यह है कि 1997 में जब वह अपने गुरु स्वामी अड़गड़ानंद के कहने पर 23साल पहले जब शिवपुरी आए थे तब  बियाबान जंगल में परमहंस आश्रम पर महज  कुटी थी। जहां अब जड़ीबूटी और फलदार वृक्ष 100 बीघा क्षेत्र में फैले हैं।
 शहर से 8 किमी दूर ग्वालियर एबी रोड पर विनेगा ग्राम में परमहंस आश्रम की स्थापना 1997 में हुई। तब वहां सिर्फ एक पर्ण कुटी और शिवालय था। स्वामी वज्रानंद चूंकि धर्मशास्त्रों के ज्ञाता होने के साथ उनका सभी धर्मग्रंथों पर समान अधिकार था। जब उनके गुरु स्वामी अड़गड़ानंद ने यथार्थ गीता की रचना की तो विभिन्न भाषाओं में यथार्थ गीता का अनुवाद क्रम विनेगा स्थित परमहंस आश्रम पर स्वामी वज्रानंद महाराज के सान्निध्य में किया गया। उनसे जुड़े भक्त नीरज तोमर ने बताया कि मलयालम, कन्नड़, मराठी,अ ंग्रेजी, जापानी, स्पेनिश सहित विभिन्न भाषाओं में उसे स्वामी जी के मार्गदर्शन में लिपिबद्ध  किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चाइना और जापान के प्रधानमंत्रियों को उपहार में यही यथार्थ गीता भेंट की गई थी। उर्दू में जब इसका प्रकाशन पूर्ण हुआ तब स्वामी जी को अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में इसके अनावरण के लिए बुलाया गया था। वह वाक शैली और प्रवचन कला में सिद्घ हस्त थे। यही कारण है कि जो भी उनसे एक बार मिल लेता  था वह उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाता था। उनसे मिलने राजमाता सिंधिया। माधवराव सिंधिया, यशोधरा राजे सिंधिया, ज्योतिरादित्य सिंधिया, डॉक्टर केपी यादव, केपी सिंह, वीरेंद्र रघुवंशी, देवेन्द्र जैन,जितेंद्र जैन गोटू सहित कई नेता आते थे।
उनसे जुड़े भक्त जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद धाकड़ की माने तो जब वह शिवपुरी आए थे तो विनेगा का परमहंस आश्रम वीरान जंगल था, लेकिन इस क्षेत्र में तकरीबन 100 बीघा जगह में फलदार और औषधीय गुणों से भरपूर पौधरोपण कर इसे सुंदरता का केंद्र उन्होंने बनाया। यहां  अखंड भंडारा   होता था।

उप्र के बांगा रियासत में जन्मे थे वज्रानंद,स्वामी अड़गड़ानंद के संपर्क  में आए तो वैराग्य आया
स्वामी जी से निकटता से जुड़े नीरज तोमर ने बताया कि 2दिसंबर 1953 को उप्र के बांदा के अन्तर्गत बांगा रियासत में जन्मे स्वामी जी जब स्वामी अड़गड़ानंद के संपर्क में आए तो उन्हें संसार से वैराग्य आया और घर छोड़ दिया। पलवल के पास यमुना नदी के पास1971 में आश्रम को उन्होंने साधना केंद्र बनाया। इसके बाद गुरु आज्ञा से वह 1997 में शिवपुरी आ गए और विनेगा को उन्होंने साधना स्थली बनाया। 9 मार्च को अचानक उनका स्वास्थ्य बिगड़ा और उन्हें उपचार के लिए दिल्ली भेजा गया। यहां से 24 अप्रैल को शिवपुरी एमएम हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। यहां शनिवार की  रात 1.30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार आश्रम में समाधि बनाकर रविवार को किया जाएगा।

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