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ईद-उल-अजहा:इस बार ईद पर गले नहीं मिले, दूर से ही अपनों को दी मुबारकबाद

शिवपुरी9 दिन पहले
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मस्जिद में नमाज पढ़ते हुए मुस्लिम बंधु।
  • एक साल में दूसरी बार ईदगाह में नहीं हुई ईद की सार्वजनिक नमाज, मस्जिद में पांच लोगों ने पढ़ी नमाज, शेष लोगों ने घर से नमाज अदा की
  • नमाजियों ने मांगी दुआ-हे मौला! कोरोना से मुक्ति दो और जीवन जीने बारिश दो

कोरोना संक्रमण के कारण एक साल में दूसरी बार ईदगाह पर सार्वजनिक नमाज अदा नहीं की जा सकी। ईद-उल-अजहा पर शनिवार को मस्जिदों में पांच लोगों को ही नमाज अदा करने की अनुमति प्रशासन ने दी थी इसलिए ज्यादा लोग मस्जिदों पर ईद की नमाज अदा करने नहीं पहुंचे। लोगों ने परिवार के साथ घर पर ही ईद की नमाज पढ़ने के साथ अपना फर्ज अदा किया। खास बात यह रही कि ईद की इस नमाज में विश्व को कोरोना से मुक्ति और जीवन जीने के लिए बारिश करने की दुआ मांगी गई।

शहर के इतिहास में ऐसा पहली बार ऐसा हुआ , जब एक साल में दो बार ईद की विशेष नमाज सार्वजनिक रूप से अदा नहीं की जा सकी। शहर का माहौल कैसा भी रहा हो, लेकिन ईद की विशेष नमाज कभी रोकी नहीं गई थी। इसी साल 24 मई को भी कोरोना संक्रमण के कारण ईदगाह पर सार्वजनिक नमाज अदा करने पर रोक लगाई गई थी। इस बार भी यह आदेश लागू रहा। ईद पर शहर के प्रमुख चौराहों, ईदगाह और प्रमुख मस्जिदों के पास पुलिस बल तैनात रहा। सुबह प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने भी मिलकर गश्त किया।

600 साल पहले अलाउद्दीन के दौर में बनी शहर की सबसे पुरानी मस्जिद शाही जामा मस्जिद

पुरानी शिवपुरी स्थित शाही जामा मस्जिद शहर की सबसे पुरानी मस्जिद है। यहां के शाही इमाम मुफ्ति महबूब सुब्हानी की मानें तो अलाउद्दीन के शासनकाल में यह ईदगाह 600 साल पहले बनाई गई थी। शाही तरीके से मस्जिद का निर्माण हुआ था तभी से इसे शाही जामा मस्जिद कहते हैं। पुरानी शिवपुरी के अधिकांश लोग यहां नमाज अदा करने आते हैं, लेकिन 600 साल के इतिहास में यह दूसरी बार हुआ कि यहां सार्वजनिक नमाज अदा नहीं की जा सकेगी। इसके अलावा शहर में ईदगाह सहित मस्जिदे सूबात, इमामबाड़ा मस्जिद, पायगा मस्जिद सहित कई इबादत गाह हैं जहां सामूहिक नमाज नहीं हो सकी।

कुर्बानी हर एक को नहीं जिसके पास 52.50 तोला की चांदी की रकम उसे कुर्बानी बाजिव

शाही इमाम मुफ्ती महबूब सुब्हानी की माने तो 52.50 तोला की चांदी की रकम जिस मुसलमान के पास है उसे ही कुर्बानी देना बाजिब बताया है। हर एक मुसलमान कुर्बानी नहीं दे सकता। इस बार जिनको कुर्बानी जायज थी उन्होंने घर की चारदीवारी के अंदर ही यह क्रम किया।

शहर काजी का संदेश माना, घर पर मनाई ईद

किसी को ईद की दावत न दें, न ही ईद की दावत खाने किसी के घर जाएं,घर पर रहकर ही ईद मनाएं। शहर काजी का यह संदेश सोशल साइटस के माध्यम से जारी हुआ था जिसके चलते लोगों ने इसकी महत्ता समझी और घरों से ही यह पर्व मनाया। इसके अलावा यह भी संदेश भी दिया गया था। कोरोना से मांगी मुक्ति

कोरोना संक्रमण के कारण सभी सार्वजनिक और धार्मिक आयोजनों पर रोक है। हमें मस्जिदों में 5-5 लोगों के साथ नमाज अता करने की अनुमति थी इसलिए कुछ लोगों ने मस्जिद पहुंचकर शेष ने घरों से ही नमाज अता की। सबने एक स्वर से कोरोना से मुक्ति और जल्द अच्छी बारिश की दुआ खुदा से इबादत कर की गई।
मुफ्ती महबूब सुब्हानी, शाही इमाम मस्जिद

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