MP में बाढ़ से तबाह गांव से रिपोर्ट:शिवपुरी के मदनपुरा में 150 में से 25 घर बहे, जो बचे वे कभी भी गिर सकते हैं; बरसाती-बांस के सहारे 5 दिन से छतों पर डटे हैं लोग

शिवपुरी3 महीने पहले
सिंध नदी की बाढ़ में गिरे अपने घर के साथ मदनपुरा गांव की इमरत।

5 दिन पहले तक शिवपुरी का मदनपुरा गांव पूरी तरह से आबाद था। यहां ज्यादा खुशहाली तो नहीं थी, लेकिन दो जून की रोटी के लिए भटकना नहीं पड़ता था। मगर आज हर तरफ तबाही का मंजर ही दिखाई दे रहा है। सिंध नदी की बाढ़ ने यहां सब कुछ तबाह कर दिया है। इस गांव में 150 आदिवासियों के घर हैं। इसमें से 25 बह गए हैं या खाक में मिल गए हैं। जो बचे भी हैं वो रहने लायक नहीं हैं। वह इतने जर्जर हो चुके हैं कि कभी भी गिर सकते हैं। गांव में अब तक मदद नहीं मिल पाई है। शिवपुरी से देवेंद्र समाधिया की रिपोर्ट...

शिवपुरी शहर से 50 किलोमीटर दूर बसे मदनपुरा गांव में पहले जैसा कुछ भी नहीं रह गया है। यहां की इमरत ने बताया कि अचानक सिंध नदी का पानी बढ़ने ने कुछ घंटों में पूरे गांवों में पानी भर गया था। मैं किसी तरह से अपने दोनों बच्चों को बाहर निकाल पाई। कुछ देर में ही मेरा कच्चा मकान गिर गया। अब तक कोई मदद नहीं मिली है। प्लास्टिक की आड़ में हम लोग रह रहे हैं। घर में जो कुछ था वह बचा नहीं है। पता नहीं आगे की जिंदगी कैसे कटेगी।

गांव के ही रामू आदिवासी की टपरी और कच्चा मकान गिर गया है। अब प्लास्टिक की छत के नीचे उनका परिवार रह रहा है। तेज बारिश होते ही परेशानी खड़ी हो जाती है। रामू ने कहा, इस तबाही के बाद पेट पालने की समस्या बड़ी है। घर में जो अनाज थे वे बह गए। हम प्रशासन से मदद की आस लगए हुए हैं। इस गांव में ऐसे डेढ़ सौ परिवार हैं, जिन्हें मदद का इंतजार कर रहे हैं।

मदनपुरा गांव में घर ऐसे ही मलबे में बदल गए हैं।
मदनपुरा गांव में घर ऐसे ही मलबे में बदल गए हैं।

मदनपुरा की तरह ही कोलारस के पचावली गांव में 80 घर बाढ़ में ढह गए हैं। नरवर के पीपलखड़ी गांव में 200 घर में से 50 बर्बाद हो चुके हैं। ख्याबदा गांव में 20 मकान में हैं, जहां बाढ़ ने सिर से ना सिर्फ छत छीन ली है, बल्कि उनके घर में रखे अनाज को भी बहा दिया है। बाढ़ के पांच दिन बाद भी उनके पास अभी तक कोई राहत नहीं पहुंची है। यह स्थिति सुदूर जंगल स्थित गांवों की ही नहीं बल्कि शहरी सीमा से लगे गांवों की भी है।

बेघर हुए आदिवासी परिवार को 5 दिन बाद भी राहत का इंतजार।
बेघर हुए आदिवासी परिवार को 5 दिन बाद भी राहत का इंतजार।

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बजट के लिए लिखा है पत्र
इस पूरे मामले में जब कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह से बात की गई तो उनका कहना था कि यह बात सही है कि आदिम जाति विभाग के पास बजट नहीं है, लेकिन बजट के लिए पत्र लिखा है। उम्मीद है कि यह बजट जल्द ही सेंशन होकर आ जाएगा और जल्द ही सभी पीड़ितों को राहत मिलेगी। आपदा राहत के संबंध में कलेक्टर का कहना है कि गुरूवार तक तो हमने रेस्क्यू का काम ही किया है, आज से आपदा राहत पहुंचना शुरू हुई है। राहत सामग्री जल्द ही इन लोगों तक पहुंच जाएगी।

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