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शिवपुरी में बाढ़ में फंसे परिवार की कहानी, VIDEO:ऑटो छोड़कर जाने को तैयार नहीं हुई पत्नी, बोली- घरवाला 1kg आटा और सेव लाया है, काम चल जाएगा

शिवपुरी11 दिन पहले

हम तो मेले में दुकान लगाने जा रहे थे, गुरुवार रात 2 बजे हम यहां पहुंच गए थे, एक रपटे में पानी कम था तो नदी पार कर ली। आगे वाले में कुछ ज्यादा पानी था, टैंपो डूब जाता, इसलिए यहीं रुक गए। सुबह सोचा बारिश तो हो नहीं रही है, 2 घंटे में पानी उतर जाएगा, पर पानी उतरा ही नहीं। फिर हम खाना खाकर सो गए, 6 बजे उठकर देखा तो नदी में और पानी बढ़ गया था। एक किलो आटा था, उसी की रोटी बनाकर खा लिया।

रात में नदी थोड़ी उतरी तो घरवाला गुटखा के 6 पैकेट और 10 बंडल बीड़ी ले आया। इसके अलावा 5 माचिस, 15 रुपए की सेव और एक किलो आटा भी लेकर आया था। इसी में गुजारा किया। वो टीम जो सुरक्षित हमें लेने आई है, उसे तो अफसरों से फोन आया होगा, वो हमें लेकर चले जाएंगे, लेकिन हमारा ऑटो और सामान यहीं रह जाएगा। वही तो हमारी रोजी-रोटी है। उसे कैसे छोड़ दें। हमें तो नहीं जाना। ये शब्द थे देव बाई के। वह शिवपुरी में अपने पति और दामाद के साथ टापू में फंसी हुई थी।

नदी के उफान पर आने से फंस गए थे।
नदी के उफान पर आने से फंस गए थे।

देव बाई अपने पति लल्लू राम और गागोनी चक निवासी दामाद बादल को लेकर कोलारस तहसील स्थित लेवा गांव में लगने वाले मेले में दुकान लगाने जा रही थी। ये रेशम माता मंदिर के पास रात में फंस गए। सुबह जब आंख खुली तो नदी उफान पर थी और पूरा क्षेत्र टापू में तब्दील हो गया था।

ऑटो ड्राइवर लौटा, लेकिन फंसे लोग नहीं
अशोकनगर के माधवपुर के रहना वाला लल्लू राम गुरुवार को लेवा गांव में लगने वाले मेले में प्रसाद की दुकान लगाने के लिए निकला था। उसने ऑटो में सामान भर लिया। फिर एक और एक ऑटो कर पत्नी, दामाद को लेकर चल दिया। रात में एक रपटा तो पार कर लिया, लेकिन सिंध नदी के दूसरे रपटे पर पानी होने के कारण वे वहीं पर रुक गए जब नदी में पानी बढ़ा तो ऑटो वाले ने तीनों से रात में ही चलने को कहा, हालांकि वे जाने को तैयार नहीं हुए। इस पर वह इन्हें वहीं छोड़कर रात में ही ऑटो लेकर रवाना हो गया।

शुक्रवार को जब तीनों उठे तो चारों तरफ वे पानी में घिरे हुए थे। शुक्रवार को उन्होंने पानी उतरने का इंतजार किया, लेकिन पानी नहीं उतर तो उन्होंने खाना बनाया और रात में खाना खाकर सो गए। शनिवार सुबह प्रशासन को मामले की जानकारी लगी तो रेस्क्यू टीम टापू पर भेजी गई।

रेवा बाई अपना सामान से भरा टैंपो छोड़कर आने को तैयार नहीं थी।
रेवा बाई अपना सामान से भरा टैंपो छोड़कर आने को तैयार नहीं थी।

दामाद को मनाकर ले आए
SDOP अमरनाथ वर्मा का कहना है कि समझाने के बाद दामाद बादल तो बाहर आ गया, लेकिन उसके सास-ससुर आने को तैयार नहीं हुए। इस पर टीम उन्हें वहीं, छोड़कर बादल को लेकर लौट आई। इसके बाद टीम फिर से शनिवार शाम को टापू पर पहुंची और उन्हें समझाकर ले आई।

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