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  • When The Babri Masjid Was Demolished In Ayodhya On 6 December 1992, The City Which Gave Peace To The Community Of The Community Was No Less

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स्मृति शेष:6 दिसंबर 1992 को जब अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराई गई तब कौम को लोगों को शांति का पैगाम देने वाले शहर काजी नहीं रहे

शिवपुरी9 महीने पहले
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  • वक्त के पाबंद थे शहर काजी, 30 साल से गणेश उत्सव के समापन समारोह में पूरी रात मंच पर बैठकर सांप्रदायिक सद्भाव का संदेश देते थे

अब से 28 साल पहले 6 दिसंबर 1992 को जब अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराई गई थी, तब शहर में अमन चैन कायम करने कौम के लोगों को शांति का संदेश देने वाले शहरकाजी कुतुबुद्दीन सिद्दीकी का रविवार को इंतकाल हो गया। वह 74 वर्ष के थे। खास बात यह है कि 30 साल से शहर में गणेश सांस्कृतिक समरोह समिति के समापन आयोजन के वह अतिथि रहते थे और जब तक वह मंच पर रहते थे तब तक कि पूरा कार्यक्रम नहीं हो जाता था। शहर के पुरानी शिवपुरी में रहने वाले शहर काजी कुतुबुद्दीन सिद्दीकी को शहर काजी का दायित्व उनके अब्बा नूरुद्दीन साहब से मिली थी। उनके सुपुर्दे खाक होने के बाद यह विरासत अब से करीब 30 साल पहले शहर काजी कुतुबुद्दीन सिद्दीकी को मिली। उनसे निकटतम रहे और शहर के वरिष्ठ समाजसेवी अप्पल खान बताते हैं कि हमारी कौम में लोग उनकी ईमानदारी की मिसाल देते थे। जब 1992 में बाबरी मस्जिद गिरी तो कौम को लोगों को समझाइश देते हुए उन्होंने कहा था कि कोई भी शहर का माहौल बिगाड़ने का प्रयास न करें।इसे सांप्रदायिक रंग नहीं देना है। हमें अदालत के निर्णय पर पूरा भरोसा है और अमन चैन बनाए रखें। काजी साहब की इस अपील और पुरजोर प्रयास के बाद शहर में कोई भी दंगा फसाद नहीं हुआ और प्रशासन ने भी काजी साहब को तत्समय अमन का फरिश्ता बताया था।

मुफ्ती- मौलानाओं को एक प्लेटफार्म पर लाने में उनकी अहम भूमिका रही
समाज के लोगों ने बताया कि वह कौमी एकता की मिसाल देते थे और कौम के लिए भी वह ऐसे प्रयास करते थे किसी भी वजह से समाज में तनाव न रहे। हमारी कम्युनिटी के सभी मौलाओं और मुफ्तियों को एकता के प्लेटफार्म पर लाने का कार्य उन्होंने किया। 2003:04 के आसपास जब यहां एसडीओपी उत्तम सिंह सिकरवार पदस्थ थे तब असामाजिक तत्वों ने ईदगाह बुडान सैयद की दरगाह को तोड़ दिया था। प्रशासन ने काजी साहब की मदद से इसे सांप्रदायिक रंग नहीं लेने दिया और फिर से काजी साहब को उम्दा व्यक्तित्व बताया। अब उनके बेटे बलीउद्दीन सिद्दीकी- 38 वर्ष को तीजे की फाता के बाद पगड़ी रस्म के दौरान उन्हें शहर काजी की जिम्मेदारी दी जाएगी।

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