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बलिदान दिवस:रानी लक्ष्मीबाई के व्यक्तित्व से महिलाएं आत्म कौशल, प्रबंधन और उत्कर्ष के गुर सीखें: दुबे

शिवपुरीएक महीने पहले
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  • महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर हुआ संगोष्ठी का आयोजन

महारानी लक्ष्मीबाई सच्चे अर्थों में भारतीय स्वराज के विचार और कार्य रूप को स्थापित करने वाली महान योद्धा थी। आज की महिलाएं उनके व्यक्तित्व से प्रबंधन, आत्म कौशल, प्रशासन, तनाव प्रबंधन और उत्कर्ष के गुर सीख सकती हैं। क्योंकि रानी का अनुकरणीय जीवन दोहरी जिम्मेदारियों के बीच निर्मित था, इसलिए पारिवारिक माहौल में भी हम उनके जीवन से प्रेरणा ले सकते हैं। यह विचार महारानी लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस पर आरएसएस की मातृशक्ति द्वारा आयोजित ई-संगोष्ठी में रक्षा दुबे सहायक जीएसटी आयुक्त ने कही।

श्रीमती चौबे ने कहा कि आज महिलाओं को स्वानुशासन, स्वावलंबन, स्व सरंक्षण और स्व धर्मपरायणता के लिए रानी के जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। उन्होंने स्व सरंक्षण को सामयिक आवश्यकता बताते हुए कहा कि हमें यह मणिकर्णिका से सीखना चाहिए।

हमें ऊर्जा को सकारात्मक रूपांतरण की आवश्यकता

  • स्तंभकार दर्शनी प्रिया ने कहा कि एक पुरुष सम्मत माहौल में रानी ने शौर्य, अदम्य साहस और प्रशासन की अनुकरणीय नजीर आधुनिक समाज को दी है। महारानी लक्ष्मीबाई से प्रेरणा लेकर महिलाओं को अनावश्यक रूप से बगैर रुके, बगैर झुके अपने स्वत्व का विकास करना चाहिए।
  • संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे देवेंद्र सुंदरियाल ने कहा कि सृष्टि में ऊर्जा शाश्वत और अविनाशी है, इसे प्रभु के सिवाय कोई पैदा नहीं कर सकता। हर व्यक्ति इस ऊर्जा से युक्त है, हमें केवल इसका सकारात्मक रूपांतरण करने की आवश्यकता होती है। रानी लक्ष्मीबाई ने इस ऊर्जा को परिवार, समाज, राष्ट्र के उत्कर्ष में रूपांतरित कर हमारे लिए चिरकालिक आदर्श प्रस्तुत किया है। संचालन गुंजन शर्मा व आभार प्रदर्शन मातृशक्ति के प्रभारी संघ के सह संघचालक डॉ गोविंद सिंह द्वारा किया गया।
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