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कैसे बनेगा रपटा:बजट कम होने से नहीं आए टेंडर जलसंसाधन विभाग फिर रिवाइज करेगा प्रोजेक्ट

उनाव13 दिन पहले
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  • दो विभागों की फाइलों में झूल रही थी पहूज नदी पर रपटा निर्माण की योजना, पीडब्ल्यूडी ने सरेंडर किया प्रस्ताव

पहूज नदी पर रपटा निर्माण की योजना दो विभागों के बीच झूल रही है। सेतु निगम के अधिकारियों द्वारा 12 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्ताव तैयार किया था। लेकिन जलसंसाधन विभाग द्वारा तकरीबन दो करोड़ चौंतीस लाख रुपए की लागत से वेटेज काॅज वे निर्माण के टेंडर जारी कर दिए गए। जिससे लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार की गई सेतु निर्माण की योजना ठंडे बस्ते में डाल दी गई थी। हालांकि लागत कम होने की वजह से वेटेड काॅज वे के लिए किसी ने टेंडर नहीं डाले। जिसके बाद जल संसाधन विभाग के अधिकारी प्रोजेक्ट की लागत बढ़ाने के लिए नए सिरे से प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं।

बता दें कि तकरीबन चार साल से स्थानीय लोगों की बहु प्रतीक्षित मांग पहूज नदी पर रपटा निर्माण की योजना अभी भी दो विभागों की फाइलों में झूल रही है। तत्कालीन कलेक्टर आरपी सिंह जादौन की पहल पर पीडब्ल्यूडी की शाखा सेतु निगम के अधिकारियों ने यहां सर्वे कर पुल निर्माण की योजना 12 करोड़ की अनुमानित लागत से तैयार की थीं।

लेकिन उसी वक्त जल संसाधन विभाग ने दो करोड़ 34 लाख की लागत से वेटेड कॉज वे निर्माण के टेंडर जारी कर दिए थे। जिससे पी डब्ल्यू डी विभाग द्वारा बनाया गया सेतु निर्माण का प्रस्ताव को पीडब्ल्यूडी विभाग ने सरेंडर कर दिया था। अब जल संसाधन विभाग नए सीएसआर के हिसाब से वेटेड कॉज वे निर्माण की दिशा में कवायद शुरू कर रहा है। कुल मिलाकर दो विभागों के बीच झूल रही पहूज नदी पर रपटा निर्माण की योजना अधर में अटकी दिखाई दे रही है। जबकि इसके निर्माण की घोषणा स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा द्वारा की जा चुकी है।

जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे लोग

उनाव से प्रवाहित होने वाली पहूज नदी का जल स्तर तकरीबन तीन साल से बड़ा हुआ है। उनाव बालाजी कस्बे से उत्तरप्रदेश की सीमा से सटे गांव पोहरा में स्टॉपडेम का निर्माण होने से जलस्तर बढ़ जाता है, चूंकि नदी के दूसरी तरफ किसानों के खेत, बगीचे, मुक्तिधाम व मंदिर आदि है। इसलिए लाेगों को नदी पार करनी पड़ती है। बहाव अधिक होने के बावजूद लोग ट्यूब व अन्य साधनों से नदी के दूसरे तरफ जाते हैं, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। समस्या को खत्म करने के लिए नदी पर रपटे या ब्रिज की मांग लंबे समय से की जा रही है।

जिसे देखते हुए लोक निर्माण विभाग की सेतु शाखा द्वारा पहले साढ़े दस करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था। वहीं सितंबर 2020 में दोबारा सर्वे किया गया। इस बीच जलसंसाधन विभाग ने भी सर्वे कर प्रस्ताव भेजा एवं स्वीकृति मिलते ही टेंडर जारी कर दिए। लेकिन प्रोजेक्ट कम राशि का होने की वजह से ठेकेदारों ने दिलचस्पी नही दिखाई। अब नए सिरे से प्रोजेक्ट को रिवाइज किया जा रहा है। यानि दो विभाग भी सटीक एस्टीमेट के हिसाब से प्रोजेक्ट तैयार नहीं कंपा रहे हैं।

लागत बढ़ाकर 6 करोड़ होगी
अब वेटेड काॅज वे के निर्माण की जिम्मेदारी जलसंसाधन विभाग की है। चूंकि कॉस्ट अधिक होने के वजह से विभाग द्वारा कॉस्ट रिवाइज कर प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। बताया जा रहा है कि लगभग दो करोड़ से बढ़ाकर इसकी लागत से 5 से 6 करोड़ रुपए तक की जाएगी। नए प्रस्ताव की स्वीकृति के लिए भोपाल भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद ही इस दिशा में कुछ हो सकता है।
योजना सरेंडर कर दी थी
^सेतु निगम द्वारा पिछले साल पहूज नदी पर पुल के निर्माण के लिए स्थल निरीक्षण कर सर्वे कार्य किया था। लगभग 12 करोड़ की कार्ययोजना पुल निर्माण की तैयार की गई थी। लेकिन उसी समय जलसंसाधन विभाग द्वारा कॉज बे के निर्माण हेतु शासन से टेंडर जारी हो गए थे। इसीलिए सेतु निगम ने प्रस्तावित योजना सरेंडर कर दी थी।
डीएस चौहान, एसडीओ सेतु निगम ग्वालियर
स्वीकृति के लिए भोपाल भेजेंगे

^वेंटेड काॅज वे के निर्माण के लिए पिछले साल टेंडर जारी किए गए थे। कॉस्ट रिवाइज करने के लिए पुनः सीएसआर कर प्रस्ताव के लिए सर्वे गत रोज किया है। जिसे स्वीकृति के लिए भोपाल भेजा जाएगा।
वीके गुप्ता, एसडीओ जल संसाधन, दतिया

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