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आपदा में अवैध अस्पताल:बिना परमिशन अस्पताल में भर्ती कर लिए 12 काेरोना संदिग्ध मरीज, कोरोनाकाल तक अस्थायी लाइसेंस दे दो

बैतूल14 दिन पहले
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बैतूल। चैतन्य अस्पताल में कार्रवाई करते सीएमएचओ और एसडीएम। - Dainik Bhaskar
बैतूल। चैतन्य अस्पताल में कार्रवाई करते सीएमएचओ और एसडीएम।
  • आजाद वार्ड के चैतन्य अस्पताल में सीएमएचओ और एसडीएम का छापा

आजाद वार्ड में चैतन्य अस्पताल में 12 कोरोना संदिग्ध मरीजों का उपचार किया जा रहा था। यहां दो वेंटिलेटर पर भी मरीज थे। एसडीएम सीएल चनाप और सीएमएचओ डॉ. एके तिवारी ने छापा मारकर बिना परमिशन अवैध रूप से चलाए जा रहे इस कोरोना अस्पताल से मरीज शिफ्ट करके इसे बंद करवाने की हिदायत दी। बिना रजिस्ट्रेशन के अस्पताल चल रहा था।

सीएमएचओ डॉ. एके तिवारी ने बताया कि तीन साल पहले चैतन्य हॉस्पिटल डॉ. शैलेन्द्र पंद्राम ने बंद कर बाहर शिफ्ट हो गए थे। कुछ दिन पहले अचानक यहां कंस्ट्रक्शन चालू करवा दिया। साथ ही बिना परमिशन अस्पताल चालू कर मरीजों का उपचार भी शुरू कर दिया। जबकि 2018 में अस्पताल की रिनुवल अवधि निकल चुकी थी। डाॅ. तिवारी ने कहा एक दिन पहले हमने डाॅ. पंद्राम काे मरीजों को शिफ्ट कर अस्पताल बंद करने को कहा था। लेकिन वे नहीं माने और मरीजों काे भर्ती कर उपचार कर रहे थे। इसमें कुछ लोग कोरोना पॉजिटिव भी हैं। रविवार को जांच करने पहुंचे तो 12 मरीज मिले, वहीं दाे वेंटिलेटर पर भर्ती थे। उन्हें सरकारी अस्पताल में शिफ्ट कर अस्पताल बंद करने को कहा है।

इधर हॉस्पिटल संचालक डॉ. शैलेंद्र पंद्राम का कहना है कि कहीं ऑक्सीजन बेड नहीं मिलने के कारण एक डॉक्टर का फर्ज निभाते हुए मैंने इनकी जान बचाने इन्हें भर्ती किया है। जान बचाना मेरा लक्ष्य है। चैतन्य अस्पताल के संचालक डॉ. शैलेंद्र पंद्राम ने बताया कि कई मरीजों को सांस लेने में तकलीफ थी, बेड नहीं मिल रहे थे। ऑक्सीजन लगाकर वेंटिलेटर पर रखवाने की व्यवस्था मैंने उनकी जान बचाने के लिए बनाई है। यदि शासन को लगता है कि यह सब गलत है तो टेंपरेरी रजिस्ट्रेशन दे दिया जाए मेरे पास उपचार का लाइसेंस है। यहां कंस्ट्रक्शन चल रहा है। रिनुवल के लिए लाइसेंस दिया था।

रिनुवल हुआ नहीं है। यदि शासन को लगता है कि रजिस्ट्रेशन नहीं है तो अस्थाई लाइसेंस कोरोना काल तक के लिए दिया जा सकता है। प्रशासन के कहने पर हमने रात में मरीजों काे शिफ्ट कर रहे हैं, लेकिन कुछ मरीज और उनके परिजन जाने काे तैयार नहीं हैं। पुलिस से शिफ्ट कराने जवान भेजने को कहा है।
व्यवस्थाएं बनाकर उपचार चालू रखने की उठी मांग

पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष समीर खान ने बताया कि डॉ. शैलेन्द्र पंद्राम काफी समय से लोगों का उपचार कर रहे हैं। शासन चाहे तो उनकी डिग्री की जांच कर ले। शासन को नियम- कानून देखने की जगह डॉक्यूमेंट देखकर उनकी सेवा लेनी चाहिए। यह समय जांच का नहीं है। सेवा में लगाने का है। वहां पर एडमिट लोगों को हॉस्पिटल खाली करने का कहा जा रहा है जो कि गैरजिम्मेदाराना तरीका दर्शाता है। जबकि स्वास्थ्य अमले को यदि शिफ्टिंग करवानी है तो किसी दूसरे अस्पताल में स्वयं शिफ्ट करवाना था।

मरीजों को शिफ्ट करवाकर आगे कार्रवाई की जाएगी

- डॉ. एके तिवारी, सीएमएचओचैतन्य अस्पताल के नाम से एक हॉस्पिटल चलाकर इसमें कोरोना मरीजों को भर्ती किया गया था। इस नाम से यह अस्पताल जाना जरूर जाता है लेकिन रजिस्ट्रेशन नहीं है। यहां पर कोविड या संदिग्ध कोरोना के मरीजों का उपचार तो किया ही नहीं जा सकता है। फिर भी यहां कोविड के मरीज भर्ती थे। मरीजों को शिफ्ट करवाने के लिए हिदायत दी है। मरीज शिफ्ट हुए बिना इसे सील नहीं कर सकते हैं। मरीजों को शिफ्ट करवाकर आगे कार्रवाई की जाएगी।

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