छोटी दीपावली पर जलाए कृतज्ञता के दीप:बैतूल में शहीदों और सरहद पर तैनात सैनिकों के लिए जलाए दिए

बैतूलएक वर्ष पहले
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बैतूल में दीपावली पर्व पर आमतौर पर घरों, दुकानों के सामने दीए जलाए जाते हैं, लेकिन बैतूल में शहीदों की याद और बॉर्डर पर तैनात जवानों के उत्साह वर्धन के लिए दस सालों से दीए जलाए जा रहे हैं। सामाजिक कार्यों से जुड़ी समिति की एक छोटी सी पहल अब परंपरा सी बन गई है, जो घर से निकलकर शहीद स्तंभ तक पहुंच गई। इसमें जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी शामिल होने लगे हैं।

बुधवार देर शाम समिति के आह्वान पर शहीद भवन पहुचे सैनिकों, पुलिस अधिकारियों, नेताओं और समाजसेवियों ने शहीदों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने दीप जलाए। समिति के अनुसार यह दीये सरहद पर तैनात सैनिकों के उत्साह वर्धन और शहीद हुए सैनिकों की याद में जलाए जाते हैं। इन दीयों के माध्यम से सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है, वे त्योहार, बारिश, धूप में सरहद पर तैनात होकर हमारी और पूरे देश की रक्षा करते हैं।

ऐसे हुई शुरुआत

दरअसल, बैतूल में बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति सक्रिय है। यह समिति बॉर्डर पर सैनिक जवानों को राखी बांधने समेत सैनिकों से जुड़ी गतिविधियों व कार्यक्रमों का आयोजन करती है। यह समिति 1999 में हुए कारगिल विजय के बाद ही अस्तित्व में आई। इस युद्ध में बैतूल के जवान भी शहीद हुए थे।

जब यह युद्ध जीता गया, तो सैनिकों की हौसला अफजाई और उनके स मान की शुरूआत हुई। इस पहल के तहत समिति ने राष्ट्र रक्षा मिशन की शुरुआत की।

समिति की संस्थापक एवं अध्यक्ष गौरी बालापुरे पदम ने धनतेरस और दीपावली पर घर पर एक दीया शहीदों के नाम से जलाने की पहल की। समिति में सदस्य जुडऩे के साथ-साथ यह पहल अब परंपरा का रूप ले चुकी है। अब घर की जगह बैतूल के शहीद भवन के पास स्थित शहीद स्तंभ पर दीए जलाए जाते हैं।