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पीडब्ल्यूडी की कागजी तैयारी:खतरनाक पुलियाएं पूर आने लगीं, लोगों को राेकने वाला काेई नहीं, अफसर बोले- बैरियर चोरी हो गए

बैतूलएक महीने पहले
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  • बाढ़ में ऐसे पुलाें पर अक्सर होती हैं वाहन बहने की घटनाएं, अस्थायी चौकी के नाम पर खानापूर्ति
  • पीडब्ल्यूडी का दावा है कि अस्थाई चाैकी बनाई थी, बैरियर से बाेरियां तथा लकड़ी अज्ञात चुरा ले गए

बारिश शुरू होते ही जिले की 19 खतरनाक रपट-पुलियाओं पर लगाए गए बेरिकेड्स, बैरियर और अस्थाई नाके गायब हैं। बारिश होने पर इन कम ऊंचाई के पुलियाओं पर नदी-नालाें का पानी ऊपर से बहने लगता है और तेज बारिश होते ही कभी भी बाढ़ का पानी आ जाता है। ऐसे में किसी के मौजूद नहीं रहने पर वाहन चालक जान जोखिम में डालकर पानी से रास्ता पार करते हैं और बह जाते हैं।

ऐसा ही एक हादसा जून में हाे चुका है। लेकिन पीडब्ल्यूडी का कहना है कि 19 जलमग्न के खतरे वाली पुल पुलियाओं को चिन्हित कर इन पर मजदूरों और टाइम कीपरों की ड्यूटी लगाई है। वहीं अस्थाई नाके या बैरियर के इंतजाम भी करने के निर्देश संबंधित इंजीनियरों और एसडीओ को दिए हैं। भास्कर ने पड़ताल की तो ऐसा कुछ नहीं मिला। पीडब्ल्यूडी का कहना है कि इस साल भरपूर बारिश की संभावनाओं को देखते हुए नदियों और नालों पर 19 पुल पुलियाओं को संवेदनशील मानकर दोनों ओर बेरिकेड्स, बैरियर और अस्थाई नाके बनाए हैं। वहीं कर्मचारियों काे तैनात किया था। अब कह रहे हैंं कि अस्थाई नाकाें और बैरियर से चोर बाेरियां तथा लकड़ी चुराकर ले गए हैं। 

इस तरह के थे हालात
भास्कर संवाददाता ने शहर से सटे हुए क्षेत्रों की नदियों के ऊपर स्थित संवेदनशील पुल-पुलियाअाें का जायजा लिया। हमलापुर-मलकापुर मार्ग पर माचना नदी के ऊपर स्थित संवेदनशील पुलिया के दोनों ओर कोई बैरियर या नाका नहीं था। हालांकि एक बोर्ड जरूर लगा हुआ था, कि रपटे पर पानी होने पर पुलिया पार ना करें। इसी तरह के हालात माचना नदी के ही कर्बला पुल पर भी थे। यहां भी किसी तरह का अस्थाई नाका नहीं था। जबकि इस पुल पर कई हादसे पूर्व में हो चुके हैं।

पिछले साल की तुलना में इस साल कम की हैं खतरनाक पुल-पुलियाएं
पिछले साल पूरे जिले में 27 पुल पुलिया को बारिश के पहले संवेदनशील घोषित कर चिन्हित किया गया था। इस साल 8 संवेदनशील पुल-पुलिया कम हुई हैं। इस साल केवल 19 पुलिया को चिन्हित किया गया है।

तेज बारिश के कारण अंबोरा नदी के पुल पर से निकला पानी
तेज बारिश के कारण पुल-पुलिया के ऊपर से पानी निकलने से यहां बेरिकेड्स और अस्थाई नाके जरूरी हैं। इन पुलियाओं के ऊपर से नदी नालाें का पानी बहने लगे ताे यहां से निकलने वाले वाहन चालकों को रोका जा सकें। रविवार दोपहर 2.25 पर अंबोरा नदी की संवेदनशील पुलिया के ऊपर से पानी गुजर गया। पानी दो फीट ऊपर तक बहा। 3:45 पर यह पानी उतरा था।

हमलापुर-मलकापुर मार्ग की पुलिया पर पिछले साल था बैरियर, अभी है गायब
पिछले साल हमलापुर-मलकापुर मार्ग पर स्थित पुलिया पर बांस और रस्सी का बैरियर बनाया गया था। पुलिया पर पानी ऊपर आने पर इस बैरियर को बंद कर दिया जाता था। इससे वाहन चालक पुल को पार ना कर सकें। इस साल इस पुल पर पानी काफी करीब आ गया है, लेकिन फिर भी नाका अब तक नहीं बनाया गया है।

15 जून को 40 साल का आलमगढ़ निवासी राधे बटके बह गया था

15 जून को तेज बारिश में मोरंड नदी के चिचोली-चूड़ियां मार्ग पर स्थित पुल पर 40 साल का आलमगढ़ निवासी राधे बटके बह गया था। उसकी बाइक कुछ दूरी पर मिली और शव 2 किमी दूर मेलघाट में मिला था। पुल पर पानी आने के बाद राेकने के लिए रोकने के पुख्ता इंतजाम नहीं थे। न ही बैरियर लगा था ताकि रास्ता बंद किया जा सकता था।

पुलियाओं पर मजदूरों और टाइम कीपरों की ड्यूटी लगाई है
जिले में इस साल 19 जलमग्न के खतरे वाली पुल-पुलियाओं को चिन्हित किया है। इन पर मजदूरों और टाइम कीपरों की ड्यूटी लगाई गई है। अस्थाई नाके या बैरियर के इंतजाम भी करने के निर्देश संबंधित इंजीनियरों और एसडीओ को दिए गए हैं। जिससे किसी भी प्रकार की बारिश में घटना न हो सकें। - डीसी बरेले, कार्यपालन यंत्री, पीडब्ल्यूडी

असामाजिक तत्व चुरा ले गए नाका की लड़की और रस्सी
मलकापुर- हमलापुर मार्ग के संवेदनशील पुलिया पर बेरिकेड्स और अस्थाई नाका बनाया गया था। लगभग 15 दिन पहले यह काम किया गया था। लेकिन कुछ चोर और असामाजिक तत्व ने लकड़ी और रस्सी चुरा ली है। - अखिलेश कवड़े, सब इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी, बैतूल 

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