बैतूल में 35 करोड़ में बनेगा वुडन क्लस्टर:बैतूल के सागौन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयास, बस्तर के ट्रेनर करेंगे स्थानीय कारीगरों को प्रशिक्षित

बैतूलएक महीने पहले
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बैठक करते अधिकारी। - Dainik Bhaskar
बैठक करते अधिकारी।

अच्छी क्वालिटी के सागौन के लिए प्रसिद्ध बैतूल के सागौन की जीआई टैगिंग कराकर अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की शुरुआत हो रही है। इसके लिए बस्तर के मास्टर ट्रेनरों को बुलाकर स्थानीय कारीगरों को प्रशिक्षित किया जाएगा। यहां वुडन क्लस्टर बनाकर लकड़ी की कारीगरी से जुड़े व्यापारियों को ई मार्केटिंग प्लेटफार्म भी उपलब्ध कराया जाएगा।

प्रदेश के वन विभाग के प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल ने गुरुवार को बैतूल में सागौन उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की। बैतूल में इसके लिए अधिकारियों के साथ विचार मंथन करते हुए वर्णवाल ने कहा कि बैतूल वनसंपदा से भरपूर है। यहां के उत्कृष्ट गुणवत्ता का सागौन पैदा होता है।

जीआई टैगिंग कराकर बैतूल के सागौन को अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि बैतूल के पास डूडाबोर गांव में प्रस्तावित वुडन क्लस्टर की स्थापना में वुडन कार्य से जुड़े उद्यमियों को नियमानुसार तमाम सहूलियतें दी जाएंगी।

बैठक में वर्णवाल ने कहा कि जिले में वुडन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए वुड उत्पादों में बेहतर गुणवत्ता एवं आधुनिकता लाना जरूरी है। इसके लिए जोधपुर वुड प्रोडक्ट क्लस्टर का भ्रमण कर वहां की टेक्नॉलॉजी शेयर की जाएगी। साथ ही बस्तर की काष्ठ कलाकृतियों जैसी कलाकृतियां जिले में तैयार करवाने के लिए स्थानीय आईटीआई के माध्यम से वुडन कोर्स भी प्रारंभ किए जाएं।

इसके लिए बस्तर के मास्टर ट्रेनर्स को जिले में बुलाया जाए। उन्होंने कहा कि इस बात का ध्यान रखा जाना भी जरूरी होगा कि वुड प्रोडक्ट में सागौन की गुणवत्ता बहुत अच्छी हो, बाहरी लोग बैतूल को सागौन के नाम से पहचाने।

35 करोड़ से होगा क्लस्टर का निर्माण

वुडन क्लस्टर के लिए जिला स्तर पर वुडन उद्यमियों को आवश्यक सहूलियतें मुहैया कराने के लिए लगभग 35 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव पर सहमति दी गई है। इससे गठित क्लस्टर के माध्यम से लोगों को सीधे रोजगार की प्राप्ति होगी एवं उत्पादित काष्ठ का अधिक से अधिक उपयोग मूल्य संवर्धन के साथ किया जा सकेगा।

इसके अलावा कृषि वानिकी योजनांतर्गत जिले के लगभग 74 बड़े किसान जिनका रकबा 25 एकड़ या इससे अधिक है, के खेतों में सागौन प्रजातियों का रोपण किया जाकर इमारती काष्ठ के उत्पादन में वृद्धि के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इससे एक निश्चित समयावधि के बाद किसान की आय में वृद्धि हो सकेगी।

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