MP में पांच शाखाओं वाला छिंद का पेड़:खजूर प्रजाति के पेड़ से साइंटिस्ट हैरान, देश में यह दूसरा; छत्तीसगढ़ में भी 6 टहनियों वाला छिंद

बैतूल23 दिन पहले

बीते दिनों एक VIP पेड़ की चर्चा खूब हुई। श्रीलंकाई राष्ट्रपति के हाथों लगे पेड़ की सुरक्षा से लेकर विशेष साजो-संभाल के कारण यह सुर्खियों में रहा। आज हम आपको एक ऐसे पेड़ से रूबरू कराएंगे, जो पूरे देश में न केवल खास है बल्कि बेहद अनोखा भी है। यह पांच शाखाओं वाला एक ऐसा पेड़ है, जो आमतौर पर ऐसा होता ही नहीं है। देश में अब तक ऐसा यह दूसरा पेड़ सामने आया है। इस पर रिसर्च की जरूरत महसूस हो रही है।

त्रिशूल आकार की पांच टहनियों वाला पेड़
आमतौर पर छिंद का पेड़ एक शाखा वाला होता है, जो बेहद लंबा होता है। इसमें अन्य शाखाएं नहीं होती। बैतूल के बारहवीं गांव के पास एक पांच टहनियों वाला दुर्लभ छिंद का पेड़ मिला है। गांव से दो किमी दूर बगई नामक स्थान पर एक छोटी नदी के किनारे यह पेड़ कुदरती पर्यावास में है। किसान अमरलाल के खेत में लगे इस बरसो पुराने पेड़ पर त्रिशूल आकार लिए पांच टहनियां हैं। पेड़ अब आस्था का केंद्र बन गया है। इस स्थान पर भोलेनाथ की प्रतिमा विराजमान की गई है। मान्यता है कि इस दुर्लभ छिंद के पेड़ की पांच या तीन परिक्रमा लगाने से कई बीमारियां ठीक हो जाती हैं।

जानिए, यह पेड़ दुर्लभ क्यों है
इस पेड़ की खासियत यह है कि करीब 12 फीट ऊंचाई के बाद इस पेड़ में पांच टहनियां निकली हैं, जो एक जैसी गोलाई, आकार और ऊंचाई की हैं। इस पेड़ में गर्मियों के मौसम में छिंद के फूल तो आते हैं, लेकिन फल कभी नहीं लगते। एकल शाखा वाले छिंद के पेड़ पर पांच टहनियां देखकर ग्रामीण इसे पंचमुखी नागेश्वर मानने लगे हैं। यही वजह है कि यहां दूर-दूर से लोग संतान सुख से लेकर मानसिक रोगों का इलाज कराने पहुंचते हैं। लोग आस्था के साथ पेड़ के चक्कर लगाते हैं।

पांच टहनियों वाला दुर्लभ वृक्ष
पांच टहनियों वाला दुर्लभ वृक्ष

जानकार भी नहीं बता पाए कारण
इस पेड़ को लेकर वनस्पति शास्त्री प्रोफेसर सुदामा लहरपूरे मानते हैं कि यह दुर्लभ है। उनका मानना है कि पेड़ की प्रारंभिक अवस्था में इसका तना डैमेज हुआ होगा। इसके बाद कोपलों से शाखाओं का निर्माण हुआ होगा। प्रकृति जैसा चाहती है, होना वही है। जानकार भी यह नहीं बता सके कि आखिर इस पेड़ की पांच शाखाएं कैसे बन गईं।

आस्था का केंद्र बना वृक्ष।
आस्था का केंद्र बना वृक्ष।

रायकोट में आया था पहला मामला
छग के रायकोट जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर और एनएच 16 गीदम रोड पर स्थित रायकोट गांव में इसके पहले ऐसा ही दुर्लभ पेड़ 2005 में मिला था। बॉम्बे नेचर हिस्ट्री ऑफ सोसाइटी ने 2005 में अपनी पत्रिका हार्नबिल में इस बात का उल्लेख किया था कि देश में छह शाखाओं वाला एकमात्र छिंद का पेड़ बस्तर के रायकोट में है। इससे पहले दो शाखाओं वाला छिंद पेड़ 1986 में सौराष्ट्र में पाया गया था। इस छिंद के पेड़ में छह शाखाएं थी। एक शाखा चूहों के कारण सुख गई थीं। इस पेड़ पर दूरदर्शन 25 मिनट की एक डॉक्यूमेन्ट्री भी बना चुका है।

खजूर प्रजाति का है छिंद
छिंद को खजूर प्रजाति का पेड़ माना जाता है। इसके पेड़ व फल हू-ब-हू खजूर की तरह ही होते हैं, लेकिन फल आकार में कुछ छोटे होते हैं।