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गंभीर लापरवाही:इनसीनरेटर से नष्ट करने के बजाय आबादी के बीच जला दी एक्सपायर्ड सरकारी दवाएं

बैतूल2 महीने पहले
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  • बायोवेस्ट काे नष्ट करने में सावधानी के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों की भी अवहेलना

जिला अस्पताल के आसपास आबादी क्षेत्र, दुकानें, पार्क और स्टेडियम हाेने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन द्वारा लापरवाही बरती जा रही है। ताजा मामला शुक्रवार को जिला अस्पताल में एक्सपायर हाे चुकी दवाओं काे इंसीनरेटर में नष्ट कराने के बजाए खुले में जलाकर पर्यावरण में प्रदूषण फैलाने का है। बायोमेडिकल वेस्टेज को इंसीनरेटर में नष्ट करवाने का ठेका भले ही दिया हो लेकिन बायोमेडिकल वेस्ट को इंसीनरेटर में भिजवाने की जगह, बायोवेस्ट काे नष्ट करने में सावधानी के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों की अवहेलना कर खुले में सामान्य कचरे की तरह जलाया जा रहा था। हालांकि इस बारे में जब जानकारी लेने का प्रयास किया तो सिविल सर्जन डाॅ. अशोक बारंगा इस मामले में कुछ भी बोलने से बचते रहे, उन्होंने मोबाइल भी रिसीव नहीं किया। वहीं सीएमएचओ डॉ. प्रदीप धाकड़ ने इसे गलत बताया। शुक्रवार काे जलाए गई दवाओं में एलर्जी की क्लोरफेनिरामाईन टेबलेट के साथ ही अन्य टेबलेट भी थी। मामला उजागर हाेते ही आनन-फानन में ये अधजली टेबलेट का कचरा हटवाया दिया गया। इस बारे में अस्पताल प्रबंधन के अधिकारियों ने चुप्पी साध ली और कुछ भी बोलने से बचते रहे। ड्रग टर्मिनेटर जैसे उपकरणों का इस्तेमाल करके दवाएं नष्ट की जा सकती हैं। इलास्टेक ड्रग टर्मिनेटर जैसे उपकरणों को जिला अस्पताल में लाया जा सकता है।

2017 में बनी थी, 1 जनवरी 2019 को एक्सपायर हुई

अधिकांंश दवा के डिब्बों पर क्लोरफेनिरामाईन लिखा हुआ था। ये दवाएं आमतौर पर सर्दी और एलर्जी के लिए इस्तेमाल की जाती हैं। रैपर पर स्पष्ट नॉट फॉर सेल लिखा था, यानी ये दवाएं निःशुल्क वितरण के लिए जिला अस्पताल में ही आई थी। अधजले कचरे में मिले रैपर के अनुसार ये टेबलेट्स फरवरी 2017 को बनी है, एक जनवरी 2019 को एक्सपायर हो चुकी थी।

आनन-फानन में साफ करवाई अधजली दवाएं

बैतूल जिला अस्पताल ने तीन महीने पहले कायाकल्प अभियान के तहत प्रदेश में तीसरी रैंक हासिल की थी। मेडिकल वेस्टेज का उचित निपटारा करने की अच्छी व्यवस्था के कारण भी यह स्थान मिला था। सिवनी को 2019-20 के विनर घोषित करते हुए 40 लाख पुरस्कार, दूसरे नंबर पर रहे भिंड को 10 लाख रुपए तथा तीसरे स्थान पर रहे बैतूल काे 8 लाख रुपए का अवार्ड दिया गया, लेकिन अब व्यवस्थाएं वापस पहले की तरह हो रही हैं।

दवाएं एक्सपायर होना भी लापरवाही का संकेत

पहले तो दवाओं का बड़ी मात्रा में एक्सपायर होना यह संकेत देता है कि दवा जरूरत से ज्यादा मात्रा में बची हुई थी। या तो इस दवा को बेवजह स्टॉक से ज्यादा मात्रा में बुलवा लिया गया था, या फिर ये दवाएं समय पर बांटी नहीं गई। इस तरह की दवाएं समय अंतिम तारीख के पहले भी वापस लौटाई जा सकती थीं। इस तरह की दवाएं एक निश्चित प्रक्रिया के तहत नष्ट की जाती है।

जिम्मेदारों ने कहा

जांच कराई जाएगी, उसी आधार पर कार्रवाई करेंगे ^मामला आपने बताया है ताे इस बारे में अधिकारियों से जानकारी लेकर जांच कराएंगे। जांच में जाे भी तथ्य सामने आएगे उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सतीश एस., डायरेक्टर हेल्थ, मध्यप्रदेश

इस तरह एक्सपायरी दवा जलाना गलत है
^एक्सपायरी डेट की दवाएं यदि खुले में जलाई हैं तो यह गलत है। इन्हें इंसीनरेटर में नष्ट करवाने के लिए वाहन से भिजवाया जाता है। मामला संज्ञान में आया है नाेटिस देकर सिविल सर्जन से जानकारी ली जाएगी।
- डॉ. प्रदीप धाकड़, सीएमएचओ, जिला अस्पताल बैतूल

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से जानकारी ली जाएगी
^ दवा को इस तरह जलाने के मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से जानकारी ली जाएगी। जानकारी लेकर इस पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जाएगी। यदि कोई लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी।
- राकेश सिंह, कलेक्टर, बैतूल

जानकारी जुटा रहे हैं, दवा किसने जलाई है ^ऐसी किसी भी एक्सपायर दवा काे नष्ट करने अनुमति मेरी जानकारी में नहीं है। में टीम का सदस्य हूं, इस प्रकार जलाकर दवा नष्ट करना गलत है। जानकारी जुटा रहे हैं कि दवा किसने जलाई है। डाॅ. एके पांडे, आरएमओ, जिला अस्पताल, बैतूल

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