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कमाई पर नजर:कच्चे बिल पर नकद भुगतान ले रहे कई अस्पताल, एंटीइवेजन और इनकम टैक्स विभाग रख रहा नजर

बैतूलएक महीने पहले
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  • लश्करे हॉस्पिटल के मामले से सबक लेते हुए प्रशासन ने वैष्णवी हॉस्पिटल से तत्काल मांगा जवाब

निजी अस्पतालों में की जा रही अवैध वसूली के मामले एक-एक करके लगातार सामने आने के बाद प्रशासन के साथ-साथ, आयकर और वाणिज्य कर विभाग के राडार पर भी ये निजी अस्पताल आ गए हैं। बैतूल से कच्चे-पक्के सभी तरह के बिल इन टैक्स विभागों की फाइलों में जमा होकर भोपाल तक जा रहे हैं।

प्रत्यक्ष कार्रवाई से ये अस्पताल भले ही हथकंडे अपना कर बच जाएं लेकिन आगामी साल का रिटर्न भरते समय इन्हें बेहद सख्त पड़ताल का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं कोरोना नियंत्रण में आने के बाद इन्हें सर्वे टीम से भी दो चार होना पड़ सकता है। इनकम टैक्स विभाग और वाणिज्य कर विभाग की हेल्थ सेक्टर पर पैनी नजर है। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले बिलों से लेकर हर तरह के उपलब्ध करवाए जा रहे दस्तावेजों का पूरा रिकॉर्ड रख रहा है। यहां तक कि प्रत्येक समाचार और आम लोगों की ओर से उपलब्ध करवाए जा रहे कच्चे बिल भी रिकॉर्ड में रखे जा रहे हैं। मुख्यालय को भी ये विभाग जानकारियां भेज रहे हैं। रिटर्न भरते समय भी इन्हें आमदनी का ब्यौरा भरते समय काफी सख्त पड़ताल का सामना करना पड़ सकता है।

बड़ी राशि नकद जुटाने में हो रही परेशानी
शहर के अधिकांश प्राइवेट अस्पताल मरीजों के परिजनों को कैश पेमेंट करने को कह रहे हैं। ऑनलाइन बैंकिंग, पेटीएम के जमाने में नकद जमा इसलिए कराया जा रहा है कि ऑनलाइन भुगतान होने पर यह जानकारी रिकॉर्ड में आ जाएगी। इसका रिर्टन में हिसाब देना पड़ेगा। कैश लेने पर इस तरह की आशंका नहीं रहेगी। लेकिन दो से तीन लाख रुपए की राशि नकद जमा करवाना परिजनों के लिए बेहद मुश्किल हो रहा है। कोठी बाजार निवासी एसके शर्मा ने बताया कि उनके कई परिचितों सेे कैश में हॉस्पिटल का चार्ज जमा करवाने को कहा जा रहा है। हालांकि उपचार चल रहा है और आगे भी डॉक्टर की जरूरत पड़ेगी। इस कारण वे शिकायत नहीं कर रहे हैं। इसे रुकवाया जाना चाहिए। चेक और ऑनलाइन पेमेंट लेने में इन अस्पताल संचालकों को दिक्कत क्यों आ रही है। इस पर आला अधिकारियों को कार्रवाई करना चाहिए।

रिटर्न का बारीकी से एनालिसिस करेंगे
निजी अस्पतालों की ओर से जो ओवरबिलिंग की जा रही है। यह पूरा मामला हमारी जानकारी में है। सभी अस्पतालों से सामने आ रहे बिलों और खबरों पर हमारी नजर है। वित्तीय वर्ष 2021-2022 का रिटर्न फाइल करते समय हम हर अस्पताल की रिटर्न का बारीकी से एनालिसिस करेंगे।
- राजेन्द्र चौहान, आयकर अधिकारी, बैतूल

रेडक्राॅस और अस्पताल के बिल हमारे पास हैं
लश्करे हॉस्पिटल की ओर से ओवरबिलिंग किए जाने का मामला हमारी जानकारी में है। इसके पूरे बिल, रेडक्रॉस के बिल सभी हमारे पास उपलब्ध हैं। इसी तरह अन्य हॉस्पिटल के बिल भी हमें मिल रहे हैं। ये चीजें मुख्यालय को भेजी जा रही हैं। हम फिलहाल सर्वे की परमिशन लेंगे तो मिलेगी नहीं। लेकिन सारा मामला जानकारी में है।
- युवराज पाटीदार, वाणिज्य कर अधिकारी

एसडीएम ने जारी किया नोटिस, 24 घंटे में जवाब नहीं दिया ताे वैष्णवी अस्पताल का लाइसेंस होगा निरस्त मरीज की माैत के बाद दुख में डूबे परिजनों से निशुल्क शव वाहन के रुपए मांगने के मामले काे गंभीरता से लेते हुए एसडीएम सीएल चनाप ने वैष्णवी हॉस्पिटल के संचालक को नोटिस जारी किया। इसमें सख्त हिदायत दी कि नोटिस तामीली के 24 घंटे के भीतर जवाब प्रस्तुत नहीं किया तो अस्पताल के संचालन का लाइसेंस निरस्त का दिया जाएगा।

बडोरा निवासी राजेश राठौर ने वैष्णवी अस्पताल के रिसेप्शन पर बैठे कर्मचारी की ओर से चार हजार रुपए शव ले जाने के लिए मांगे जाने की शिकायत की थी। इस मामले में रेडक्रॉस सोसाइटी के चेयरमेन के हस्तक्षेप के बाद रुपए तो नहीं लिए, लेकिन यह मामला जरूर उजागर हो गया कि पूर्व सांसद हेमंत खंडेलवाल द्वारा संचालित निशुल्क वाहन का शुल्क लिया जा रहा है। इस मामले में पूर्व सांसद खंडेलवाल ने कलेक्टर से जांच करने की मांग की थी। कलेक्टर अमनवीर सिंह बैस के आदेश पर इंसीडेंट कमांडर और अनुविभागीय दंडाधिकारी सीएल चनाप ने बताया वैष्णवी अस्पताल के संचालक को नोटिस जारी करके तत्काल जवाब मांगा है। इस मामले में दोनों पक्षों को सुनना जरूरी है। यदि अस्पताल प्रबंधन दोषी पाया जाता है तो लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।

अस्पताल संस्थागत रूप से कालाबाजारी कर रहा ताे एफआईआर हाेगी
जब भी कहीं अनियमितता पाई जाएगी यदि ब्लैक मार्केटिंग पाई जाती है तो अस्पताल हो या न हो उसके खिलाफ एफआईआर होगी। अगर रेट काे लेकर शिकायत मिलती है ताे रुपए वापस कराए जाएंगे। यदि ब्लैक मार्केटिंग और पेशेंट के साथ लापरवाही हो रही है जिससे मौत हो रही है तो मुझे अस्पताल में ताला लगाने में कोई परेशानी नहीं है। अभी तक मेरी जानकारी में ज्यादातर शिकायत ज्यादा चार्ज लेने की आई हैं, चार्ज बताया कुछ जा रहा और लिया कुछ जा रहा है, ऐसे 100 प्रतिशत केस में हम रुपए वापस दिला रहे हैं वहीं अर्थदंड लगा रहे हैं। इससे ज्यादा गंभीर अपराध हमारे संज्ञान में आता है ताे एफआईआर होगी और ताला भी लगाया जाएगा। अस्पताल की कालाबाजारी की शिकायत नहीं है, व्यक्तिगत कालाबाजारी की शिकायत है, यदि अस्पताल संस्थागत रूप से कालाबाजारी कर रहा है और अस्पताल की लापरवाही से किसी काे माैत हाेती है ताे दाेनाें केसाें में एफआईआर होगी काेई छूट नहीं रहेगी। पर रेट ज्यादा लगाने पर एफआईआर नहीं हाेगी।
- अमनवीर सिंह बैस, कलेक्टर

भास्कर की खबर का हवाला देकर की कार्रवाई
एसडीएम ने नोटिस में लिखा कि दैनिक भास्कर में 7 मई को प्रकाशित खबर में शव वाहन के रुपए मांगे जाने संबंधी मामले को उजागर किया है। इस मामले में राजेश राठौर ने शिकायत की है कि वैष्णवी अस्पताल के रिसेप्शन पर बैठे कर्मचारी की ओर से 4 हजार रुपए मांगे गए थे।

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