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बैतूल में पुलिस से MLA का सामना:विधायक डागा ने पुलिस के खिलाफ दर्ज कराई अवमानना याचिका, बोले- क्या भाजपा की गुलाम हो गई है पुलिस ?

बैतूल9 महीने पहले
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थाना कोतवाली, बैतूल - Dainik Bhaskar
थाना कोतवाली, बैतूल

बैतूल के कांग्रेस विधायक निलय डागा की मानहानि के एक मामले में भाजपा के मंडल अध्यक्ष और एक अन्य के खिलाफ कोर्ट के आदेशों के बावजूद एफआईआर दर्ज न करने पर बैतूल कोतवाली के प्रभारी के खिलाफ अदालत में अवमानना का प्रकरण दर्ज कराया गया है। भाजपा के नगर मंडल अध्यक्ष पर आरोप है कि वह लंबे समय से फेसबुक पर फर्जी आईडी बनाकर विधायक के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट डाल रहे थे। पुलिस ने जब इस मामले में कार्रवाई नहीं की तो विधायक ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन पुलिस ने अदालत के आदेश को भी दरकिनार कर दिया था।

यह था मामला
विधायक के अधिवक्ता अंशुल गर्ग के मुताबिक विधायक निलय डागा के खिलाफ अनुज पंवार नाम की फेसबुक आईडी से अपमानजनक पोस्ट डाली जा रही थी। इसे लेकर निलय डागा ने पुलिस से शिकायत की थी। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि जिस मोबाइल से फेसबुक पर अपमानजनक पोस्ट की जा रही है। वह मोबाइल भाजपा गंज मंडल के अध्यक्ष विकास मिश्रा के मोबाइल नंबर से की जा रही है। अनुज पवार व्यक्ति के नाम की फेसबुक आईडी बनाई गई। जो पूरी तरह से फर्जी थी। इस आईडी पर जो फोटोग्राफ्स लगाए गए हैं। वे जम्मू कश्मीर के किसी व्यक्ति के हैं। पुलिस ने फेसबुक मुख्यालय अमेरिका से भी इसकी जांच करवाई थी। जांच के बाद जब पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया तब विधायक ने न्यायालय में याचिका दर्ज की थी।

अदालत ने यह दिया आदेश
मामले में सुनवाई के बाद 21 अक्टूबर 2021 को मजिस्ट्रेट पूर्वी तिवारी ने आदेश करते हुए पुलिस थाना बैतूल के भारसाधक अधिकारी को निर्देशित किया था। कोर्ट ने आदेश दिया है कि अंतिम प्रतिवेदन बिना देरी के जमा करें। मामला दर्ज करने के बाद एफआईआर की फोटोकॉपी कोर्ट में जमा करें।

मामले में बैतूल पुलिस का पक्ष सामने आया है। दैनिक भास्कर को एसपी सिमाला प्रसाद ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज न करने को लेकर दिक्कत यह है कि यह आदेश कोर्ट से एकपक्षीय हुआ है। उसने कोर्ट में आवेदन लगाया है। सुनवाई तक कार्रवाई रोकने का निवेदन है। जबकि विकास मिश्रा का कहना है कि उस आईडी से विधायक के खिलाफ एक भी अपमानजनक पोस्ट नही की गई। कोई ऐसा मामला ही नहीं है कि कोई अपराध बने। अनुज पवार के घर का नाम विनय है। उसके पास मोबाइल नहीं है। इसलिए वह मेरे मोबाइल में फेसबुक चलाता था। हमने भी कोर्ट के आदेश के खिलाफ पिटीशन लगाई है।

मामले में विधायक निलय डागा ने कहा कि एक एमएलए को कोर्ट जाकर एफआईआर का आदेश लेकर आना पड़ता है। बावजूद इसके एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इससे ये मालूम चलता है कि कानून व्यवस्था की स्तिथि चरमरा गई है। उन्होंने टिपण्णी करते हुए सवाल उठाया कि क्या पुलिस भाजपा की गुलाम है। या मैं कांग्रेसी विधायक हूं, इसलिए मेरी सुनी नहीं जाएगी।