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आर्मी हॉस्पिटल की तर्ज पर बना है:बैलून अस्पताल में नहीं बिजली और टॉयलेट की व्यवस्था

बैतूल3 दिन पहले
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हवा भरकर इस तरह तैयार किया गया है बैलून अस्पताल। - Dainik Bhaskar
हवा भरकर इस तरह तैयार किया गया है बैलून अस्पताल।
  • बैलून हॉस्पिटल के बगल में बनाया जाएगा पक्का टॉयलेट, काम हुआ शुरू, मरीजों को नहीं होगी परेशानी

आर्मी हॉस्पिटल की तर्ज पर जिला अस्पताल में बैलून हॉस्पिटल के दो हाल तो बना दिए लेकिन इसमें टॉयलेट और बिजली व्यवस्था के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही हैं। दरअसल बैलून हॉस्पिटल में केवल एक हाल बनाया है, इसमें अस्थाई टॉयलेट नहीं बनाया जा सकता।

इसीलिए बैलून हॉस्पिटल के दो हाल के बीच में पक्का टॉयलेट बनाया जा रहा है। ईंटों की दीवार खड़ी करके टॉयलेट बनाना शुरू कर दिया है। इसी के साथ इसमें बिजली व्यवस्था भी नहीं है। बिजली व्यवस्था के लिए बिजली के तार बिछाने जरूरी हैं लेकिन बैलून वाले टेंट में तार नहीं बिछाए जा सकते।

इसीलिए इसके लिए विशेष किस्म की शीट्स का पार्टीशन करके रोशनी की जाएगी। इसके लिए जल्द ही काम शुरू किया जाएगा। फिलहाल बिना बिजली के बैलून हॉस्पिटल के दाे हाल बना दिए हैं। इस हॉस्पिटल में 8 आईसीयू बेड, 15 ऑक्सीजन बेड और 27 सामान्य बेड उपलब्ध रहेंगे।

इमरजेंसी में मरीजों को यहां भर्ती करके उपचार दिया जाएगा। ठंड, गर्मी और बरसात का कोई असर इन टैंटनुमा बैलून हॉस्पिटल पर नहीं पड़ेगा। दावे किए जा रहे हैं कि यह टेंट हवा में भी नहीं उड़ेगा। हालांकि इन दावों के बावजूद अस्पताल प्रबंधन को इन बेहद नाजुक और संवेदनशील बैलून हॉस्पिटल की चिंता सता रही है।

हालांकि यह छोटे-छोटे चैंबरों में बंटा है, पूरी हवा एक साथ नहीं निकल सकती। इसके बावजूद दो कर्मचारियों को इसकी निगरानी के लिए लगाया है। वर्तमान में जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम कक्ष के समीप दो बैलून हॉस्पिटल के वार्ड बनाकर खड़े किए हैं।

2.5 लाख रुपयाें से तीन घंटों में इन्हें हवा भरकर खड़ा किया है। इस तरह बेहद तेजी के साथ इन्हें तैयार किया है। इसके साथ ही यदि इन्हें दूसरी जगह शिफ्ट करना हो तो हवा निकालकर बेहद तेजी से शिफ्ट भी किया जा सकता है। पंप की मदद से यह काम किया जा सकता है।

बैलून हॉस्पिटल तैयार किया है। इसमें बिजली की व्यवस्था बैलून हॉस्पिटल हाल के बगल में वाल खड़ी करके की जाएगी। टॉयलेट की व्यवस्था बगल में की जा रही है। इसके लिए टॉयलेट पक्का ही बनाया जाएगा।
- अशोक बारंगा, सिविल सर्जन

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