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बैतूल में माता की स्थापना के लिए लंबा इंतजार:मंदिर में मूर्ति स्थापना के लिए करना होगा 22 साल इंतजार, 2043 तक की हो चुकी है बुकिंग

बैतूल7 महीने पहले
मां अम्बा के मंदिर में मूर्ति �

नवरात्रि में श्रद्धा से पूजने की पुरातन परंपरा सदियों से है। आपको माता रानी के उन भक्तों से रूबरू करवाते हैं, जो वर्षों से नवरात्र में उनकी प्रतिमा विराजित करने का इंतजार कर रहे हैं। बैतूल जिले में ऐसा मंदिर है, जहां साल 2043 यानी अगले 22 साल तक की एडवांस बुकिंग है। यानि यहां प्रतिमा स्थापित करवाने के लिए 22 साल का इंतजार करना पड़ेगा। ​​

​आठनेर के बाजार चौक स्थित अंबा मंदिर देश-विदेश में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां देवी अपने आप प्रकट हुई थीं। मंदिर में शारदीय नवरात्रि धूमधाम से मनाई जाती है। इस दौरान देवी प्रतिमा की स्थापना भी की जाती है। नवरात्र में यहां प्रतिमा विराजित कराने की 80 साल पुरानी परंपरा है। इसके लिए कोई एक श्रद्धालु प्रतिमा से लेकर पूजन तक कि व्यवस्था संभालता है।

हर मन्नतें पूरी होती है यहां

यहां 1941 से नवयुवक दुर्गा मंडल द्वारा नवरात्र उत्सव मनाया जा रहा है। मंदिर में प्रतिवर्ष श्रद्धालुओं द्वारा मूर्ति नवरात्रि के दौरान विराजित की जाती है। इस बार नगर के कृष्ण किशोर जायसवाल परिवार को मूर्ति देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उनके द्वारा माता की सुंदर मनोहारी प्रतिमा मंदिर में विराजित की जाएगी। जायसवाल परिवार ने इसके लिए 2001 में मूर्ति स्थापित करने के लिए बुकिंग करवाई थी। इस लिहाज से उन्हें 21 साल बाद यह मौका मिला है।

फिलहाल, मंदिर में 2043 तक मूर्ति देने के लिए श्रद्धालुओं की बुकिंग है। मान्यता है कि यहां मूर्ति विराजित कराने वाले श्रद्धालु की हर मन्नत पूरी होती है। यही वजह है कि शारदेय नवरात्र में प्रतिमा विराजित करवाने वाला भक्त पूरे उत्सव में होने वाले लाखों रुपए का खर्च खुद उठाता करता है।

मंदिर के पुजारी पंडित मनोज जोशी के मुताबिक माता की महिमा दूर-दूर तक फैली है। यहां विराजमान देवी भवानी भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। दूरदराज के क्षेत्रों से भी लोग आकर यहां मन्नत पूरी करते हैं। जायसवाल परिवार इस बार अपना नंबर लगने पर बेहद खुश है। पिछले साल यहां नगर के ही सुराणा परिवार को इसका मौका मिला था।

साक्षात दर्शन दे चुकी देवी
यह मंदिर आठनेर के बाजार चौक में स्तिथ है। करीब 200 साल पुराने इस मंदिर में माता की करीब साढ़े चार फुट ऊंचाई की पाषाण प्रतिमा विराजित है। जिसके बारे में कहा जाता है कि यह यहां स्वयं प्रकट हुईं थीं। बताया जाता है कि कई लोगों ने मंदिर के पास देवी के साक्षात दर्शन भी किए हैं। यहां लोग दूर दूर से दर्शन करने पहुचंते हैं। किसी भी शुभ कार्य या सामाजिक कार्य का लोग सबसे पहले यहां आकर आमंत्रण देते है। लोगो की मनौतियां पूरी होने पर लोगों को यहां गुड़ से तोला जाता है।