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CM के सामने हंगामा किया तब हुई सुनवाई:बैतूल में बुजुर्ग को रिश्तेदारों ने कागजों में मार डाला; 17 साल बाद पटवारी, पत्नी व बेटे पर FIR

बैतूल8 महीने पहले

आठ एकड़ जमीन के लिए एक बुजुर्ग को रिश्तेदारों ने कागजों में मार डाला और उसकी जमीन हड़प ली। ये बुजुर्ग अब खुद को जिंदा साबित करने के लिए पिछले 17 साल से सिस्टम से लड़ रहा है। चौंकाने वाली ये कहानी बैतूल में मुलताई तहसील के तांईखेड़ा गांव के तिलकचंद धाकड़ की है। जो दिसंबर 2004 से सरकार के राजस्व रिकॉर्ड में मर चुके हैं। इसके बाद फौतीनामा के जरिए उसके नाम की संपत्ति दूसरों के नाम स्थानांतरित हो गई। पीड़ित ने न्याय पाने के लिए हाल में ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सभा में हंगामा कर न्याय की गुहार लगाई थी। पीड़ित ने दैनिक भास्कर से साझा किया जिंदा होने के बाद भी मृत घोषित होने का पूरा किस्सा...

पटवारी, पत्नी और बेटे पर FIR दर्ज

इस मामले को लेकर CM शिवराज की सभा में हंगामे के बाद प्रशासन और पुलिस हरकत में आई। मुलताई पुलिस ने पटवारी हरिदास क्षीर सागर और पूनम उइके के साथ ही किसान की पत्नी सावित्री बाई और बेटे राजू किराड़ के खिलाफ धारा 420 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। FIR में कहा गया है कि दोनों पटवारियों ने नामांतरण प्रकरण की सूक्ष्म जांच किए बिना फौती नामांतरण दर्ज कर दिया था। इस नामांतरण के समय संशोधन पंजी में किसान की पत्नी सावित्री और बेटे राजू के हस्ताक्षर भी होना पाया गया। इसके अलावा दोनों ने किसान के मृत होने के संबंध में एक झूठा शपथ पत्र भी दिया था, जिसके आधार पर इन चारों पर FIR की गई है।

शिकायतें 60, सुनवाई कहीं नहीं

तिलकचंद के बेटे विजय धाकड़ का कहना है कि तहसील कार्यालय से लेकर सीएम ऑफिस तक करीब 60 बार शिकायत कर चुके हैं। 24 शिकायतें सीएम हेल्पलाइन में पेंडिंग है। विजय धाकड़ का कहना है कि मूलरूप से वह किराड़ समाज का है। 2004 में उसके पिता को रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया था। रिश्तेदारों ने षड्यंत्र कर प्रशासन को गुमराह कर 8 एकड़ जमीन फौतीनामा के आधार पर किसी और के नाम स्थानांतरित करा दिया। षड्यंत्रकारों ने उनके पास जमीन नहीं छोड़ी। अब उन्हें दूसरों की मजदूरी करने के लिए छोड़ दिया।

तिलकचंद धाकड़ बेटे विजय धाकड़ के साथ।
तिलकचंद धाकड़ बेटे विजय धाकड़ के साथ।

सिविल न्यायालय में चल रहा मामला
मुलताई SDM हरसिमरन प्रीत कौर ने बताया कि तिलकचंद धाकड़ का मामला सिविल न्यायालय में चल रहा है। जांच में पता चला कि 2004 में फौतीनामा गलत हुआ है। उस समय एक पटवारी हरिदास श्रीसागर ने ये फौतीनामा किया था। उसमें हस्ताक्षर हरिदास के नहीं हैं, बल्कि एक ट्रेनी महिला पटवारी हरिदास से ट्रेनिंग ले रही थी, उसने हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने यह भी बताया कि 2018-19 में SDM कार्यालय मुलताई से फौती नामांतरण निरस्त कर दिया गया था। मामले में दूसरे पक्ष ने कमिश्नर कार्यालय में अपील कर दी थी। इस कार्यालय के आदेश के बाद फौतीनामा आज भी अस्तित्व में है।

सीएम के सामने भी किया हंगामा
12 फरवरी को बैतूल में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का कार्यक्रम था। तिलकचंद धाकड़ और उसके बेटे विजय धाकड़ सीएम से मिलने आए थे। जब मिलने नहीं दिया गया, तो जमकर हंगामा हुआ था। जिसके बाद से ही तिलकचंद धाकड़ का मामला सुर्खियों में आ गया। जिसके बाद आनन-फानन में FIR की कार्रवाई की गई है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने हंगामे का वीडियो ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधा था।

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