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तीसरी लहर से निपटने की तैयारी:जिला अस्पताल में ऑक्सीजन स्टोर करने बनेगे दो अंडरग्राउंड टैंक, जल्द हाेंगे टेंडर

बैतूल14 दिन पहले
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  • कम मरीज हाेने पर प्लांट से ऑक्सीजन हाेती है बर्बाद, इसे राेकने बनाएंगे स्टोरेज टैंक

सिलेंडर भरे जाएंगे, बाहर से आएगी ऑक्सीजन

कोरोना की तीसरी लहर को लेकर जिला अस्पताल में जल्द ही लिक्विड ऑक्सीजन स्टाेरेज के लिए अंडरग्राउंड टैंक बनाया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य संचालनालय की ओर से बैतूल समेत प्रदेश के 9 जिलों में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट बनाने की तैयारी चल रही है। दरें तय कर दी हैं।

जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी करके एजेंसी फिक्स करके काम शुरू करवाया जाएगा। लिक्विड ऑक्सीजन के इस अंडरग्राउंड बनाए जाने वाले टैंक में बाहर से टैंकरों से लिक्विड ऑक्सीजन लाकर स्टोर की जाएगी। जिला अस्पताल में 6 महीने में दो ऑक्सीजन प्लांट बनाए हैं।

पहले 300 लीटर प्रति मिनट क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट बनाया। इसके बाद प्रधानमंत्री राहत कोष से 1 हजार लीटर प्रति मिनट क्षमता का बड़ा ऑक्सीजन प्लांट लगाया। लेकिन समस्या यह आ रही है कि इक्का-दुक्का मरीजों के भर्ती होने पर केवल इनके लिए प्लांट को नहीं चलाया जा सकता है।

इससे बेतहाशा बिजली बिल आएगा और अधिकांश ऑक्सीजन बर्बाद होगी। अब भी कम मरीज होने पर उन्हें लिक्विड ऑक्सीजन सिलेंडर ही लगाए जा रहे हैं। इसीलिए इन परेशानियों को देखकर स्वास्थ्य संचालनालय की ओर से अब प्रदेश के 9 जिला अस्पतालों में लिक्विड ऑक्सीजन टैंक स्थापित करने की तैयारी की जा रही है।

इन टैंकों को प्राइवेट एजेंसियों को टेंडर देकर बनवाया जाएगा। इसके बाद इन एजेंसियों को ही इन अंडरग्राउंड प्लांट का संचालन करना होगा। अस्पताल की ओर से इनसे प्रति महीने का रेंट लिया जाएगा और ली गई ऑक्सीजन के एवज में भुगतान किया जाएगा।

जल्द ही इसके लिए टेंडर प्रक्रिया की जाएगी। बैतूल जिले के अलावा प्रदेश के हाेशंगाबाद, बालाघाट, छिंदवाड़ा जबलपुर, कटनी, मंडला, नरसिंहपुर, सिवनी में इसी तरह के अंडग्राउंड टैंक बनाए जाएंगे।

अब जिला अस्पताल में बनेंगे लिक्विड ऑक्सीजन के अंडरग्राउंड टैंक

लिक्विड ऑक्सीजन स्टोर करने केवल दो टैंक
फिलहाल जिला अस्पताल में लिक्विड ऑक्सीजन स्टोर करने के लिए केवल दो टैंक हैं। प्रत्येक टैंक से 7 हजार लीटर क्षमता के 12 से 13 जंबो सिलेंडर भरे जा सकते हैं। इस तरह दो टैंकों से लगभग 26 जंबो सिलेंडर भरे जा सकते हैं।

बताया जा रहा है कि जो अंडरग्राउंड ऑक्सीजन प्लांट बनाया जाएगा। उससे कम से कम 100 से अधिक जंबो सिलेंडर एक बार में भरे जा सकेंगे। हालांकि फिलहाल टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण क्षमता निर्धारित नहीं है।

प्राइवेट एजेंसी से टैंक बनवाने के रेट तय किए

शासन की ओर से प्रदेश के 9 जिलों के लिए ये लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट बनाए जाएंगे। प्राइवेट एजेंसियों को टेंडर देकर ये प्लांट बनवाए जाएंगे। प्लांट बनने के बाद प्राइवेट एजेंसियों को ही इन अंडरग्राउंड ऑक्सीजन टैंकों के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

शर्त यह रहेगी कि 99 प्रतिशत से कम शुद्धता इस ऑक्सीजन की नहीं रहेगी। हर महीने 57 हजार रुपए का रेंटल चार्ज भी इन एजेंसियों के लिए फिक्स किया है। एजेंसियों की ओर से जो प्रपोजल आएंगे उस हिसाब से छोटे और बड़े टैंक बनाए जाएंगे।

सुरक्षा के लिहाज से अंडरग्राउंड रखना जरूरी

ऑक्सीजन गैस ज्वलनशील है। लिक्विड ऑक्सीजन को तो बेहद एहतियात के तौर पर निश्चित तापमान और दबाव में रखना होता है। लिक्विड ऑक्सीजन गैस के टैंक को सुरक्षित रखने के लिए इसे अंडरग्राउंड तरीके से रखा जाएगा।

बाहर से बड़े टैंकरों से गैस लाई जाएगी। इस लिक्विड ऑक्सीजन को टैंकों में डालकर स्टोर किया जाएगा। इसीलिए इसे अंडरग्राउंड रखकर स्टोर किया जाएगा। जल्द ही जिला अस्पताल कैंपस में इसके लिए जगह तय की जाएगी।

संचालनालय स्तर से चल रही कार्रवाई

जिला अस्पताल परिसर में जल्द ही लिक्विड ऑक्सीजन का अंडरग्राउंड टैंक बनाया जाएगा। इसके लिए संचालनालय स्तर से कार्रवाई चल रही है। टेंडर और एजेंसी फिक्स करके शासन स्तर से ही काम करवाया जाएगा। इससे लिक्विड ऑक्सीजन के सिलेंडर भरे जा सकेंगे। लगातार ऑक्सीजन प्लांट को चलाने के विकल्प के रूप में यह व्यवस्था रहेगी।

- डॉक्टर एके तिवारी, सीएमएचओ

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