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शिक्षा दिलाने का प्रयास:पलायन करने वाले डूब प्रभावित 54 बच्चे पढ़ेंगे शहर में

हरदा14 दिन पहले
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गांव में खाट पर बैठकर पालकाें काे समझाइश देते हुए शिक्षक। - Dainik Bhaskar
गांव में खाट पर बैठकर पालकाें काे समझाइश देते हुए शिक्षक।
  • शिक्षकाें की मदद से सहायक वार्डन ने गांव पहुंचकर दी ग्रामीणाें काे समझाइश

नर्मदा सागर बांध बनने के कारण बैक वाटर से प्रभावित हुए गांव के कई परिवाराें का विस्थापन हुआ। इसके साथ ही राेजगार का संकट भी खड़ा हाे गया। 2005 के बाद से ऐसे कई परिवार सीजन अनुसार अपना ठिकाना बदलते रहते हैं। जिससे उनके बच्चाें का भविष्य खराब हाेने की स्थिति बन गई है। सरकारी हाॅस्टल के सहायक वार्डन ने दूसरे शिक्षकाें की मदद से जिले के ऐसे गांवाें से इस साल 54 बच्चाें का सरकारी स्कूल में प्रवेश कराया है। जिससे वे भी पढ़ लिख सकें।

बांध के कारण हरदा से 50 किमी दूर स्थित, भैंसवाड़ा, जामुनवाली, भरतार, जाेगीखेड़ा, नानीजाेगा, खाेदरीघाट, डाेंगलीघाट, टप्पर अादि बसाहटाें के लाेगाें काे विस्थापन का दंश झेलना पड़ा। धीरे-धीरे इन लाेगाें काे भरण-पाेषण के लिए हमेशा यहां से वहां पलायन करना मजबूरी हाे गया। जिससे बच्चाें की पढ़ाई पिछड़ने लगी। नया बस स्टैंड के पास कुलहदा स्कूल में प्राइमरी व मिडिल स्कूल के गरीब बच्चाें के लिए संचालित हाॅस्टल के सहायक वार्डन आरएल रावत इन गांवाें में पहुंचे। जहां स्कूल छाेड़ चुके बच्चाें का सर्वे किया।

- शिक्षा का महत्व व सुविधा के कारण माने परिजन
अपने खर्च पर गांवाें में लगातार गरीब, आदिवासी, मछुआरा आदि परिवाराें के बीच आने-जाने वाले रावत बताते हैं कि उन्हाेंने गांवाें में चाैपाल लगाई। परिवार के महिला-पुरुषाें काे एक साथ बैठाया। फिर उन्हें गांव की सरल बाेली के जरिए समझाया उन्हाेंने पढ़ाई नहीं कि, इस कारण वे आज इस स्थिति में हैं। क्या भविष्य में वे अपने बच्चाें काे भी राेज इसी तरह भटकते देखना चाहते हैं।

पालकाें काे बात समझ आ गई। फिर उन्हाेंने फीस, शहर में मकान का किराया, ड्रेस के इंतजाम का सवाल किया। रावत ने एमडीएम, ड्रेस, स्काॅलरशिप, हाॅस्टल सुविधा के बारे में बताया। तब परिजन माने और 54 प्रवेश हाे सके। लाॅकडाउन में भी रावत ने गांव में चाैपाल, माेहल्ला व ओटला क्लास लगाकर बच्चाें काे पढ़ाया। इसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, नजदीकी शाला के शिक्षकाें ने भी सहयाेग दिया।

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