बदला आयाेजन का तरीका:काेराेना ने रोका दहन, बच्चों ने काेराेना के पुतले पर मास्क लगाकर जलाया

हरदाएक वर्ष पहले
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  • }जिले में सादगी से मना दशहरा उत्सव, गली-माेहल्लाें में बच्चों ने किया रावण के पुतले का दहन

रावण दहन पर काेराेना के कारण ब्रेक लग गया। इसके चलते जिले में इस बार सार्वजनिक रावण दहन नहीं हुआ। लाेगाें ने सादगी से दशहरा उत्सव मनाया। गली-माेहल्लाें में बच्चों ने जरूर छाेटे-छाेटे रावण के पुतले बनाकर जलाए। न्यू एलआईजी काॅलाेनी के नर्मदेश्वर पार्क में बच्चों ने करीब 11 फीट ऊंचे काेराेना राक्षस के पुतले का दहन किया। लाेगाें काे जागरूकता का संदेश देने के लिए काेराेना राक्षस के मुंह पर मास्क लगाया। साेशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए पुतला जलाया।

इधर इंदौर रोड स्थित निजी कॉलेज कैंपस में भी रावण दहन किया गया, यहां संस्थान ने कबाड़ के रद्दी सामान से रावण बनाया। इस दाैरान लोगों को सामाजिक बुराइयों से बचने का संकल्प दिलाया गया। इस दाैरान लाेगाें में भी बच्चों की समझाइश का असर दिखा। लाेग भी घराें से बाहर नहीं निकले।

बिना रावण दहन बिके शमी व ज्वार के पत्ते भुआणा क्षेत्र में रावण दहन के बाद लाेग शमी और ज्वार के पत्ते देकर बड़ाें का आशीर्वाद लेते हैं। साेने-चांदी के प्रतीक के रूप में दाेनाें पत्ते दिए जाते हैं। इन पत्ताें काे सुख-समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। इस बार बिना रावण दहन के नेहरू स्टेडियम के आसपास लाेगाें ने शमी व ज्वार के पत्ते 5 से 10 रुपए गड्डी में बेचे।

दूसरे दिन भी हुआ प्रतिमाओंं का विसर्जन

शहर की गई समितियों ने दूसरे दिन दशहरे पर भी दुर्गा प्रतिमाओंं का विसर्जन नर्मदा तट पर किया। समितियों ने गाजे-बाजे के साथ ट्रैक्टर-ट्राली, ट्रक पर चल समारोह निकाला। अजनाल किनारे बने कुंड में दिन भर में करीब 12 प्रतिमाओंं का विसर्जन हुआ। इस दाैरान भजन-कीर्तन करते हुए पहुंचीं महिलाओं ने अजनाल में ज्वारे विसर्जित किए।

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