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स्मृति शेष:सक्तापुर गांव आते थे दिलीप कुमार

खिरकिया20 दिन पहले
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  • बैतूल में चुनाव प्रचार के दाैरान संगीतकार नाैशाद के कहने पर पहली बार सक्तापुर आए थे दिलीप कुमार

दिलीप कुमार का नाता सक्तापुर से रहा है। वे यहां कई बार जंगल सफारी के लिए आ चुके हैं। उन्हें यहां के जंगल बहुत भाते थे। उन्हें यहां समय बिताना अच्छा लगा था। दिलीप कुमार का बुधवार सुबह निधन हो गया। उनकी स्मृति अब लोगों के मन में रहेगी। डूब प्रभावित गांव सक्तापुर में अपनी जवानी के दिनों में पटेल परिवार से उनके अच्छे संबंध थे। उनके जीवनकाल में दो से तीन बार गांव के यूसुफ पटेल के घर पहुंचे। चर्चा में बुजुर्ग पटेल ने बताया बैतूल लोकसभा क्षेत्र में हरकचंद डागा के समर्थन में दिलीप कुमार पहुंचे थे।

इसी दौरान गायक नौशाद अली एवं जॉनी वाकर भी आते थे। पटेल के फार्म हाउस पर नौशाद साहब का जन्मदिन मनाया जाता था। एक बार जब बैतूल में रेस्ट हाउस में रुकने की बात हुई तो नौशाद साहब के कहने पर दिलीप कुमार इस गांव पहुंचे और रात गुजारी। इसके बाद यूसुफ पटेल और दिलीप कुमार में गहरी पहचान हो गई। पटेल ने बताया दिलीप कुमार शांत और हंसमुख स्वभाव के थे। दोस्ताना मिजाज होने के कारण अक्सर वे लोगों के बीच घुलमिल जाते थे।

मुंबई पहुंचकर बधाई दी
पटेल ने बताया दिलीप कुमार के राज्यसभा सांसद के तौर पर नामांकित होने पर उन्होंने मुंबई पहुंचकर उन्हें बधाई दी थी। उनसे मुलाकात कर उनके साथ वक्त गुजारा। यूसुफ पटेल के बाद उनके पुत्र फिरोज पटेल मुंबई पहुंचकर दिलीप कुमार से मिले। पटेल का गांव अब इंदिरा सागर डूब में आ चुका है। यूसुफ पटेल का परिवार अब लहाड़पुर में आकर बस चुका है।

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