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काेर्ट की आपत्ति:अवैध कॉलोनियों के वैध होने की उम्मीदें फिर खत्म, न भवन निर्माण की मंजूरी मिलेगी न बैंक से लोन

खिरकियाएक महीने पहले
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  • शासन के नए आदेश के चलते कॉलोनियों के वैध होने की प्रक्रिया उलझी

अवैध कॉलोनियों के वैध होने की उम्मीदों पर एक बार फिर से पानी फिर गया है। 5 दिन पहले मप्र नगरीय प्रशासन विभाग ने कोर्ट की आपत्ति पर अवैध कॉलोनियों को वैध किए जाने वाले नियम को निरस्त दिया है। इस नियम के तहत अब खिरकिया-छीपाबड़ में वैध होने वाली कॉलोनियों अवैध ही रहेंगी।

साथ ही कॉलोनियों के वैध ना होने के कारण उनमें रहने वाले लोगों को अब न तो भवन निर्माण की अनुमति मिल सकेगी और ना ही बैंक से लोन मिलेगा। दरअसल, प्रदेश की सभी अवैध कॉलोनियों को वैध होने की प्रक्रिया में शहरी क्षेत्र की डेढ़ दर्जन कॉलोनी भी शामिल हैं। इन कॉलोनियों के वैध होने के बाद इनमें विकास कार्य किए जाने हैं। नगर परिषद ने अवैध कॉलोनियों को सूची तैयार की थी।

अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को कॉलोनी वैध होने से विकास की उम्मीद जागी थी। लेकिन नए नियम से कॉलोनियों के लोगों को अब निराशा हो रही है। अवैध कॉलोनियों के वैध नहीं होने से नप से नामांतरण की प्रक्रिया भी अधर में पड़ सकती है। मालूम हो शहरी क्षेत्र की अवैध कॉलोनियों में अभी भी लोग मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं।

अधर में है कॉलोनियों से विकास शुल्क वसूली की प्रक्रिया, 9 का तय हो सकता है

अवैध कॉलोनियों से विकास शुल्क वसूल करने की प्रक्रिया भी अधर में ही चल रही है। नप प्रशासन की लापरवाही के चलते शहर की 18 अवैध कॉलोनियों में से 9 कॉलोनियाें का ही विकास शुल्क तय हो सका है। इन कॉलोनाइजरों पर विकास शुल्क की राशि 1 करोड़ 19 लाख 44 हजार रुपए बकाया है।

विकास शुल्क की राशि वसूलने की प्रक्रिया बीते अगस्त माह में शुरू करने तत्कालीन एसडीएम श्यामेन्द्र जायसवाल ने शुरू की थी, लेकिन नप प्रशासन ने अभी तक विकास शुल्क की वसूली नहीं की है। साथ ही शेष 9 कॉलोनियों का तो विकास शुल्क ही नगर परिषद प्रशासन तय नहीं कर सका है। नप प्रशासन की लापरवाही के चलते अवैध कॉलोनियों के विकास शुल्क की वसूली की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है।

शहरी क्षेत्र में नगर परिषद के रिकार्ड में दर्ज हैं 18 अवैध कॉलोनियां

नगर परिषद के रिकार्ड में शहरी क्षेत्र में 18 अवैध कॉलोनियां दर्ज हैं। नप के रिकार्ड के अनुसार वार्ड - 9 में इंदूमति नागड़ा, वार्ड-2 में चेतनदास नागड़ा, वार्ड - 8 में शशिकांत हर्णे, वार्ड-7 में प्रभाकरराव हर्णे, वार्ड - 9 में राधाकिशन गुप्ता, वार्ड - 10 में राम माहेश्वरी, वार्ड - 6 में हरीशचंद्र नागड़ा, वार्ड - 11 में हरिओम राठौर, वार्ड - 3 में रमेशचंद जैन, वार्ड-10 में रंगलाल जैन, वार्ड-3 में लक्ष्मीनारायण माहेश्वरी, वार्ड - 6 में रामस्वरूप प्रजापत, वार्ड-10 में शेषनारायण भगत, वार्ड-10 में शकुंतला देवी माहेश्वरी, वार्ड-10 में गणेश भगत, वार्ड - 8 में मदनमोहन शकरगाए, वार्ड-11 में जयमाला जैन के नाम से अवैध कॉलोनी दर्ज हैं।

इसलिए निरस्त हुई वैध करने की प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार मप्र हाईकोर्ट ने 3 जून 2019 को अवैध कॉलोनियों को वैध करने वाले मध्यप्रदेश नगर पालिका कॉलोनी रजिस्ट्रीकरण, निर्वंधन व शर्त अधिनियम 1998 की धारा 15 ए पर आपत्ति जताई। कोर्ट के इस आदेश के बाद राज्य सरकार ने एडवोकेट जनरल की सलाह और राय पर इस नियम को निरस्त कर दिया है। सरकार अब कॉलोनियों को वैध करने से संबंधित एक अधिनियम लाने पर विचार कर रही है। अधिनियम नहीं होने की वजह से ही कोर्ट ने राज्य सरकार से अवैध कॉलोनियों को वैध करने वाले नियम को समाप्त करने के निर्देश दिए हैं।

शासन ने अवैध कॉलोनियों को वैध करने की प्रक्रिया अभी निरस्त कर दी है। इस संबंध में आदेश जारी हुए हैं। शासन के नए आदेश के अनुसार आगे की प्रक्रिया करेंगे। शहर की अवैध कॉलोनियों से विकास शुल्क की वसूली की प्रक्रिया चल रही है। नप के माध्यम से कॉलोनियों में सुविधा मुहैया करा भी रहे हैं।

-एआर सांवरे, सीएमओ, नगर परिषद, खिरकिया

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