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शुभ मुहूर्त:14 दिन में सर्वार्थ सिद्धि सहित 9 श्रेष्ठ मुहूर्त व पर्व का याेग

हरदाएक महीने पहले
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  • गंगा दशहरा अबूझ मुहूर्त मानते हैं, इसलिए इस दिन शुरू कर सकते हैं शुभ कार्य

जून माह के शेष 12 दिनाें में भी शुभ कार्याें के लिए 9 श्रेष्ठ मुहूर्त व पर्व याेग के संयाेग हैं। इन दिनाें में की गई खरीदारी या साैदा लाभदायक माना जाता है। पंडित व ज्योतिष के अनुसार इस अवधि में सभी प्रकार के मांगलिक व शुभ कार्य करना भी श्रेष्ठ फलदायी रहेगा। इधर व्यापारियाें की मानें ताे अनलाॅक हाेने के बाद बाजार भी सभी प्रकार के काराेबार में पहले की तुलना में उछाल आया है।

बाजार में पहले जैसी राैनक लाैटने लगी है। रविवार को कोरोना कर्फ्यू के दौरान भले ही रवि पुष्य योग बीत गया हो और बाजार बंद होने से लोग खरीदी नहीं कर पाए हों, लेकिन उदास होने की जरूरत नहीं है। अनलॉक के बाद अब जून के शेष दिनों में खरीदी और मांगलिक व शुभ कार्य के लिए अभी 9 श्रेष्ठ मुहूर्त व पर्व हैं। इन दिनों में की गई खरीदारी या सौदा लाभदायक माना जाता है। सभी प्रकार के मांगलिक व शुभ कार्य करना श्रेष्ठ होगा। गंगा दशहरा भी इसी माह है।

20 जून गंगा दशहरा और भैरव जयंती
ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष की दशमी को ये व्रत किया जाता है। इस तिथि को शास्त्रों में अबूझ मुहूर्त की श्रेणी में रखा है। इस दिन गृह प्रवेश, गृहारंभ, विवाह, मुंडन जैसे कार्यों को भी किया जा सकता है। गंगा दशमी के दिन गंगा स्नान और विशेष पूजा की जाती है। इसके साथ ही इस दिन दान का भी महत्व है। इसी दिन श्री बटुक भैरव जयंती होने से भैरव पूजन किया जाता है।

23 जून को सर्वार्थ सिद्धि एवं अमृत योग
पं. विजय काशिव ने बताया कि 23 जून को सर्वार्थ सिद्धि एवं अमृत योग सुबह 5.50 से रात 11:47 बजे तक रहेगा। 26 जून-शनिवार सर्वार्थ सिद्धि योग शाम 5 से रविवार सुबह 5.52 बजे तक रहेगा। इस दिन रवि योग भी रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग के नाम से ही स्पष्ट है कि इस दिन शुभ कार्य यदि किया जाता है वह सफल होता है। इस दिन भूमि, भवन खरीदी के लिए एडवांस देना, वस्त्र, आभूषण और वाहन खरीदने के लिए शुभ माना जाता है।

इस दिन रहेगा शुभ योग

21 जून निर्जला एकादशी : ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि (21 जून) को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। इस व्रत में पानी पीए बिना रहा जाता है। इस दिन भगवान को आम का फल चढ़ाकर उसे ग्रहण किया जा सकता है। 22 जून को प्रदोष व्रत : ज्येष्ठ माह द्वादशी 22 जून-मंगलवार को मंगल प्रदोष रहेगा। इस दिन शाम को संध्या वेला में भगवान शिव-पार्वती का पूजन करना चाहिए। 24 जून को वट सावित्री व्रत : स्कंद पुराण तथा भविष्योत्तर पुराण के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को वट सावित्री व्रत करने का विधान बताया गया है।

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