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हृदयनगरी की दरियादिल तासीर:काेराेना से जीतने 40 दिन में 470 लाेगाें ने दी- 7.70 लाख की मदद

हरदा18 दिन पहले
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  • भाेजन के 21 हजार पैकेट बांटे, कई लाेगाें काे दी ऑक्सीजन और खून, विदेश में रह रहे हरदा के लोगों ने भी की सहायता

8 दिसंबर 1933 काे हरदा के अन्नापुरा स्कूल में आए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हरदा काे हृदय नगरी यूं ही नहीं कहा था। हरदा काे दिए उनके इस नाम काे चरितार्थ करने में शहर व विदेशाें में जा बसे लाेगाें ने काेई कसर नहीं छाेड़ी। काेराेना के संक्रमण की चपेट में आने वालाें का ग्राफ जब तेजी से बढ़ा ताे ऑक्सीजन,पलंग,दवाएं व अन्य जरुरी संसाधन कम पड़ने लगे।

तब कुछ युवाओं ने साेशल मीडिया पर लाेगाें से मदद के लिए विचार साझा किया। इसका नतीजा यह हुआ कि 18 घंटे में 700 लाेग जुड़ गए। बीते 40 दिनाें में 470 लाेग जुड़े। जिनसे करीब 7.70 लाख रुपए की मदद मिली। कुछ लाेगाें ने राशन, फेस शील्ड, मास्क, कच्चा अनाज,जांच उपकरण की मदद दी।

युवाओं की छाेटी पहल हृदयनगरी का हर संभव सहयाेग मिलने से अभियान बन गई। अभी तक 21 हजार भाेजन पैकेट दिए। ऑक्सीजन सिलेंडर,ऑक्सीजन कंसंट्रेटर व अन्य जरुरी सामग्री बांटी। खून की समस्या दूर करने रक्तदान शिविर लगाए। ब्लैक फंगस से बचाव के लिए कैंप लगाया। कोरोनाकाल में मदद के लिए विदेशों में रह रहे हरदा के लोग भी आगे आए।

ऐसे आया विचार
प्रिंटिंग प्रेस संचालक नितेश अग्रवाल की मां की रिपाेर्ट पाॅजिटिव आई। अन्य परिजन भी बीमार हाे गए। आईसीयू में भर्ती किया। 10 दिन में काेराेना तेजी से बढ़ा। माैतें बढ़ने लगी। डाॅक्टर,नर्स दिन-रात जी जान से जुटे रहे,लेकिन संसाधनाें की कमी के आगे बेबस हाे जाते। 20 अप्रैल काे नितेश की मां ठीक हुई,तभी ग्रुप बनाकर औराें की मदद का संकल्प लिया। साेशल मीडिया पर विचार शेयर किया। शिशिर बंसल ने सहयाेग देकर शुरुआत की, फिर दानदाता भी आगे आए।

ऐसे बढ़ा कारवां
ग्रुप के धीरज अग्रवाल,राेहित ने बताया पहले ऑक्सीजन सिलेंडर बड़ी समस्या लग रही थी। जब यह व्यवस्था जुटी तब तक कई लाेग मदद के लिए हाथ बढ़ा चुके थे। तब मरीजाें व उनके साथ आने वाले परिजनाें काे दाेनाें वक्त भाेजन के पैकेट देने का निर्णय लिया। मदद मिलती रही। वैक्सीनेशन के कारण खून की कमी की संभावना दिखी ताे रक्तदान शिविर लगाया। फिर ब्लैक फंगस आ गया। जिसकी जांच व जागरुकता के लिए इंदाैर से विशेषज्ञ बुलाकर दाे दिन कैंप कराया।

इंदौर, अमेरिका तक से भेजा सामान

  • निलेश जैन, पुणे- ऑक्सीजन कंसंट्रेटर दुकान से कार्गाे तक भेजे।
  • निखिल पटेल, इंदाैर- ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीदकर हरदा भेजे।
  • अामिर भाई इंदाैर- ऑक्सीजन सिलेंडर की किल्लत के बीच इंदाैर से व्यवस्था की। वहीं से रिफिल कर बस से हरदा भेजे।
  • संजय जैन, बुरहानपुर-देश में ऑक्सी फ्लाेमीटर की कमी थी,तब जीजाजी की मदद से बुरहानपुर की केमिस्ट दुकानाें से खरीदकर दिए।
  • महिला ग्रुप- ने बीसी पार्टी की राशि समूह काे साैंप दी।
  • नवीन असरानी- बुरहानपुर में अपनी रिश्तेदार की मदद से फ्लाेमीटर लेकर ट्रेन के जरिए भेजे।
  • साेनू व माेनू सराफ, अमृतसर- इन्हाेंने 12 फ्लाेमीटर एयर कार्गाे से बुलाकर हरदा इस समूह काे दिए। 500 फेस शील्ड दी।
  • गाैरव व प्रवीण अग्रवाल- दाेनाें भाईयाें ने अमेरिका से 10 ऑक्सीजन सिलेंडर भेजे।
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