बलिदान दिवस:शहीद चौहान के गांव रातातलाई जाकर स्मारक को युवाओं ने किया साफ

हरदा2 महीने पहले
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हरदा। गांव में शहीद के स्मारक काे किया युवाओं ने नमन। - Dainik Bhaskar
हरदा। गांव में शहीद के स्मारक काे किया युवाओं ने नमन।
  • जिले के गाैरव और पहले शहीद दीप सिंह चाैहान के नाम पर हरदा में बनी है संभाग की पहली शहीद गैलरी
  • महाराणा सेना ने गांव में चौहान के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की

मणिपुर के सुगनु मार्केट में आतंकियों से मुठभेड़ के दाैरान शहीद हुए हरदा जिले के रातातलाई के अमर जवान दीप सिंह चाैहान के बलिदान दिवस पर महाराणा सेना ने गांव में उनके स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। युवाओं ने उन्हें अपना आदर्श व प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके संकल्पों काे आचरण में उतारने की बात कही।

इसके बाद युवाओं ने शहीद गैलरी में जाकर भी उन्हें याद किया। ग्राम रातातलाई निवासी दीप सिंह का जन्म 12 जून 1979 काे हुआ था। 1995 से 1999 तक वे शा. बहु उद्देश्यीय हासे स्कूल अब डाॅ. भीमराव आंबेडकर उत्कृष्ट स्कूल में पढ़े। वर्ष 2002 मेें वे सीआरपीएफ की 132वीं बटालियन में सीमा रक्षक के पद पर भर्ती हुए।

मणिपुर के थांबाेल के सुगनु मार्केट में ड्यूटी के दौरान 20 सितंबर 2003 काे आतंकियों ने अचानक वहां हमला कर दिया। दीप सिंह ने पराक्रम का परिचय देते हुए माैके पर ही 3 आतंकियों काे ढेर कर दिया और वे भी शहीद हाे गए थे।

जिला बनने के बाद दो जवान हो चुके हैं शहीद
6 जुलाई 1998 काे हरदा जिला बना। जिला गठन के बाद पहले शहीद का गाैरव दीप सिंह के नाम है। नई पीढ़ी और युवा दीपसिंह के अदम्य साहस और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा ले सकें, इसके लिए नपा ने 2005 में शहीद गैलरी का निर्माण कराया। जिसका नामकरण शहीद दीपसिंह के नाम पर किया।

यहां कई शहीदों की मूर्तियां लगवाई गई। मूर्तियों के नीच शिलालेख पर उनका जीवन परिचय और संघर्ष का ब्यौरा है। सीएम शिवराज सिंह चाैहान, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, पूर्व राज्यपाल बलराम जाखड़ समेत कई नामी हस्तियां इसे देखकर प्रशंसा कर चुके हैं।

शहीदाें के बलिदान दिवस पर प्रशासन को करना चाहिए याद
महाराणा सेना के मीडिया प्रभारी सुरेंद्र सिंह चाैहान ने बताया कि जिला प्रशासन शहीदों के जन्मदिवस और बलिदान दिवस पर उन्हें याद नहीं करता। उन्होंने बताया कि महाराणा सेना की टीम रातातलाई शहीद के गांव पहुंची, जहां स्मारक स्थल पर सफाई नहीं थी, युवाओं ने सफाई की। नपा में भी माल्यार्पण किया।

प्रशासनिक ताैर पर शहीदों की याद में काेई कार्यक्रम नहीं हुआ। ऐसे में नई पीढ़ी तक शहादत का संदेश कैसे पहुंचेगा। जिले के साल्याखेड़ी निवासी इलाप सिंह पटेल भी छत्तीसगढ़ में हुए एक हमले में शहीद हुए हैं। अब तक जिले से दाे अमर जवान शहीद हाे चुके हैं।

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