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संक्रमण फैलाने में सिस्टम भी कम जिम्मेदार नहीं:जांच कराने आए लाेगों में सोशल डिस्टेंस नहीं, सिर के ऊपर टपक रहा गंदा पानी

हरदाएक महीने पहले
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औराें के लिए दूरी, यहां नहीं है जरूर... औराें काे दे रहे दाे गज की दूरी की समझाइश, स्वयं नहीं करा रहे पालन - Dainik Bhaskar
औराें के लिए दूरी, यहां नहीं है जरूर... औराें काे दे रहे दाे गज की दूरी की समझाइश, स्वयं नहीं करा रहे पालन

काेराेना के संक्रमण से सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य विभाग एक-दूसरे से दाे गज की दूरी रखने का सुबह-शाम ढिंढोरा पीट रहा है। लेकिन अस्पताल में काेराेना की जांच के लिए बनाए काउंटर पर ही साेशल डिस्टेंस की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां इस नियम का पालन विभाग नहीं करा पा रहा है। यहां छांव के अभाव में राेज करीब 150-200 लाेगाें की भीड़ जब एक-दूसरे से सटकर खड़ी हाेती है ताे लगता है कि विभाग की नजर में यह दूरी दूसराें के लिए ही है जरूरी। लाेगाें पर ऊपरी मंजिल के लीकेज पाइप का गंदा पानी भी गिर रहा है।

जिला अस्पताल में काेराेना के सैंपल के लिए काउंटर बनाया है। लेकिन यहां जगह का चयन करते समय परेशानियां का ध्यान नहीं रखा गया। छांव के नाम पर प्लास्टिक शीड का शेड है। यहां राेज करीब 150 से 200 लाेग सैंपल देने सुबह 10 बजे से लाइन में लगते हैं। इस बीच धूप बढ़ने पर छांव के लिए एक-दूसरे से सटकर खड़े हाे जाते हैं। इस दाैरान साेशल डिस्टेंस का पालन नहीं हाे पाता है। यह स्थिति राेज बनती है।

लाेगाें की जुबानी

  • हेमंत कुमार ने बताया कि वे अपने एक रिश्तेदार की तबीयत खराब हाेने पर उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले गए। डाॅक्टर ने काेराेना की जांच के लिए कहा। जहां सैंपल लेने के लिए रैंप के पास काउंटर बनाया है, वहां छांव के नाम पर छाेटा सा शेड है। लंबी लाइन लगती है ताे धूप में खड़ा हाेना मजबूरी है।
  • सुभाष ने बताया कि 3 दिन पहले वह सैंपल देने गया था। करीब 200 लाेगाें की लंबी कतार थी। कई लाेग धूप में खड़े थे। धूप तेज हाेने लगी ताे सभी छांव में एक-दूसरे से चिपक कर खड़े हाे गए। 50 सैंपल पूरे हाेने के के बाद अगले दिन आने का कहकर मना कर दिया।
  • सैंपल के लिए जहां काउंटर बनाया है, वही रैंप है। यहीं पर लाेग खड़े हाेते हैं। करीब 150 से 200 लाेग राेज आते हैं। बाजू में ऊपर की मंजिल से लीकेज पाइप से गंदे पानी की फुहार सैंपल देने के लिए लाइन में लगे लाेगाें पर गिरती है। जिससे खतरा महसूस हाेता है।

जहां व्यवस्थाओंं की कुछ जरूरत है, वहां इंतजाम कराएंगे
सैंपल के लिए किसी काे भी इनकार नहीं किया जा रहा है। आरटीपीसीआर के साथ साथ इससे ज्यादा सैंपल रैपिड एंटीजन के भी हाे रहे हैं। जहां व्यवस्थाओंं की कुछ जरूरत है, वहां इंतजाम कराएंगे।
-डाॅ. सुधीर जेसानी, सीएमएचओ, हरदा

1 दिन बाद भोपाल भेज रहे सैंपल, पाेर्टल पर चढ़ाने में भी अंतर
हठधर्मिता कहें या राजनीतिक दबाव, लेकिन विभाग अघोषित रूप से आरटीपीसीआर के केवल 50 सैंपल ही ले रहा है। इतना ही नहीं जिस दिन सैंपल लिए जाते हैं, उसी दिन भाेपाल नहीं भेजे जा रहे। पाेर्टल पर भी देरी से लाेड किए जा रहे हैं। इसका खुलासा तब हुआ सैंपल देने के तीसरे दूसरे दिन मोबाइल पर मैसेज आया। हरदा में नंबर नहीं लगने पर एक व्यक्ति ने खातेगांव में 24 काे सैंपल दिया। जिसकी रिपोर्ट निगेटिव हाेने का मैसेज 7 मई काे आया।

गड़बड़ी : सैंपल दिया ही नहीं और आ गया पॉजिटिव हाेने का मैसेज
एक बैंक मैनेजर काे रिपोर्ट पॉजिटिव आने का मोबाइल पर मैसेज मिला। वे घबरा गए, क्याेंकि उन्होंने सैंपल ही नहीं दिया था। उन्हीं की बैंक के एक अन्य कर्मचारी ने सैंपल दिया था। उनकी 7 दिन तक रिपोर्ट नहीं आई। जब उन्होंने अस्पताल में संपर्क किया ताे बताया गया कि उनका सैंपल गुम हाे गया है। इसके बावजूद भी विभाग आरटीपीसीआर से ज्यादा रेपिड एंटीजन टेस्ट का दावा कर सैंपलिंग कम करने की बात काे झुठलाने की काेशिश कर रहा है।

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