कैसे हाेगी जांच?:जब संक्रमितों का आंकड़ा बढ़ने लगा ताे सैंपलिंग का टारगेट कर दिया सीमित

हरदा6 महीने पहले
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  • अस्पताल में पहले आओ, पहले पाओ की तर्ज पर ले रहे केवल 50 सैंपल

काेराेना के संक्रमण की बढ़ती चेन ताेड़ने के लिए काेराेना कर्फ्यू लगाया गया। खुद सीएम शिवराज सिंह चाैहान वीडियो कांफ्रेंसिंग में ज्यादा से ज्यादा सैंपलिंग पर जाेर दे रहे हैं। जिससे समय रहते संक्रमितों काे पहचान कर उन्हें उपचार दिया जा सके और अन्य लाेगाें तक संक्रमण काे फैलने से राेका जा सके।

लेकिन इसके विपरीत हरदा के जिला अस्पताल में आरटीपीसीआर का टारगेट 50 तय कर दिया है। इससे ज्यादा संख्या में संदिग्धों के आने और एक से डेढ़ घंटे लाइन में लगकर इंतजार करने के बाद भी नंबर आने पर इनकार कर दिया जाता है। इसका काेई ठाेस कारण भी नहीं बताया जा रहा है। बीते 8 दिनाें से जिला अस्पताल में सैंपलिंग की संख्या कम करने से संदिग्ध परेशान हाे रहे हैं। प्रबंधन ने गुपचुप तरीके से 50 का टारगेट तय कर रखा है। संदिग्ध लाेग जांच के लिए सुबह से काउंटर खुलने से पहले कतार में लग जाते हैं। 10 बजे काउंटर खुलता है।

पहले आओ पहले आओ की तर्ज पर केवल 50 लाेगाें काे सैंपल लेकर काउंटर बंद कर दिया जाता है। शेष काे अगले दिन आने काे कहा जाता है। अगले दिन फिर नए सिरे से कतार में लगकर उतना इंतजार करना पड़ता है।

आंकड़ाें का खेल : सीएम के ज्यादा सैंपलिंग के आदेश हरदा में बाैने

दलील: एम्स से माैखिक निर्देश हैं कि 150 से ज्यादा सैंपल न भेजें

राेज 50 सैंपल से ज्यादा न लिए जाएं ऐसा काेई आदेश वरिष्ठ कार्यालय से प्रबंधन काे नहीं मिला है। अस्पताल में भी कहीं ऐसा काेई नाेटिस नहीं लगाया है। इस कारण संदिग्ध लाेग टेस्ट के लिए सैंपल देने राेज लाइन में लगते हैं। लेकिन 12 बजे काउंटर बंद कर मना कर दिया जाता है।

अस्पताल सूत्राें की मानें ताे एम्स भाेपाल से माैखिक निर्देश मिले हैं कि जिले से आरटी-पीसीआर के 150 से ज्यादा सैंपल न भेजे जाएं। जिससे समय पर जांच कर रिपोर्ट भेजी जा सके। अधिकारी इसकी पुष्टि करने से भी बच रहे हैं। इससे संदिग्धों में चिंता बढ़ रही है।
इसी तरह सैंपलिंग नहीं हुई ताे बेकाबू हाेंगे जिले में हालात
अस्पताल सूत्राें के अनुसार पूर्व में ज्यादा सैंपलिंग हाेने से पॉजिटिव लाेगाें की संख्या भी ज्यादा आने लगी। इससे जिले की स्थिति बेकाबू हाेने की प्रदेश स्तर पर रिपोर्टिंग हाेने लगी। इससे चिंतित जिम्मेदार अधिकारियों ने एम्स का हवाला देकर सैंपलिंग कम कर दी।

निजी डाॅक्टराें का कहना है कि संदिग्धों का टेस्ट नहीं करने से स्थिति और बिगड़ने की आशंका बढ़ेगी। ऐसे व्यक्ति परिवार व समाज के लिए खतरा बनेंगे। उनकी जान भी खतरे में पड़ सकती है। समय रहते जांच से ऐसे लाेगाें काे चिन्हित कर आइसाेलेट कर इलाज दिया जा सकेगा

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