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21वीं सदी में भी अंधविश्वास जिंदा:कांसे की थाली में सरसों का तेल; दूर्वा डालकर बीमार के सामने घुमाता पड़िहार- तेल का रंग गहरा हुआ तो समझो पीलिया, गले में डालता माला

इटारसी4 महीने पहलेलेखक: शैलेष जैन
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सुखतवा। थाली में दूर्वा, सरसों के तेल से झाड़ता पड़िहार। - Dainik Bhaskar
सुखतवा। थाली में दूर्वा, सरसों के तेल से झाड़ता पड़िहार।
  • कोरोना के बाद की थकावट, कमजोरी को पीलिया मानकर झड़वा रहे, केसला बीएमओ बोले- झाड़फूंक के लिए सख्ती से मना करें तो दवा बंद कर देते लोग
  • एलोपैथी इलाज से ज्यादा झाड़फूंक पर भरोसा

कोरोना की दूसरी लहर थमने के बाद केसला ब्लाॅक के गांवों में ग्रामीण आदिवासियों को थकावट और कमजोरी पीलिया लग रही है। बुखार, थकावट, कमजोरी, भूख नहीं लगना, उल्टी या दर्द पर ग्रामीण झाड़फूंक करा रहे हैं। हर कोई पीलिया मानकर गले में कांस या गिलोय की माला डालकर घूम रहा है। यह नजारा है इटारसी मुख्यालय से 27 किमी दूर चौकीपुरा का।

आबादी लगभग 3000 है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक गांव में दो माह में कोरोना से 3 लोग (एक महिला और दो पुरुष) संक्रमित हुए। गांव में आदिवासी समुदाय 31 प्रतिशत है। गांव में पड़िहार के घर के सामने रोज सुबह झाड़फूंक होती है। झाड़ने वाला मंत्र बुदबुदाते हुए कांसे की थाली में सरसों का तेल व हरी दूर्वा डालकर पीड़ित व्यक्ति के सामने घुमाता है। अगर तेल का रंग गहरा होने लगता है तो समझ लो बीमारी है। झाड़ने की यह क्रिया तीन दिन से लेकर सात दिन चलती है। पीढ़ियों से यह काम कर रहा पड़िहार कोई दान-दक्षिणा नहीं लेता। सरकारी अस्पताल के मुफ्त इलाज से ज्यादा आदिवासियों को पड़िहार की झाड़फूंक पर भरोसा है। जबकि स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी में पीलिया के लक्षण वाले मरीज एक-दो ही आ रहे हैं। कई मरीज कोरोना से ठीक हो गए और पता भी नहीं चला।

हद है: माला का बताएंगे तो ठीक नहीं हाेंगे

केसला ब्लाॅक के लक्ष्मण ने कहा, दो-ढाई महीने से पीलिया की माला लेने 15-20 लोग रोज आए। इनमें रैसलपाठा के छत्रपाल और सिलवानी के पांडू विश्वकर्मा भी थे। उन्होंने कहा- गले में माला पहनने के बारे में किसी को बताएंगे तो ठीक नहीं होंगे। पड़िहार नागेश्वर (परिवर्तित नाम) ने कहा गांव के लोग पीलिया झड़वाने आते हैं तो झाड़ देते हैं। फीस नहीं लेते। उसका दावा है-सब बीमारी टोने-टोटके से होती है।

यहां के ग्रामीण ओझा के चंगुल में

चौकीपुरा पंचायत ही नहीं-सहेली, ताकू, हिरणचापड़ा, साधपुरा, मोरपानी, कोहदा, कालाआखर, दौड़ी-झुनकर, घोघरा रयैत, छीतापुरा, चारटेकरा, चांदकिया में अगर किसी की तबीयत बिगड़ी तो वह पीलिया मानकर गले में कांस या गिलोय की माला डालकर घूम रहा है।

लोगों के नाखून व चेहरा पीला, पीलिया का सर्वे हो

केसला की सामाजिक कार्यकर्ता तारा बरकड़े ने बताया, बीमारी कोई भी हो सब पीलिया ही बता रहे हैं। इन पंचायतों में स्वास्थ्य विभाग को पीलिया का सर्वे करवाना चाहिए। गांव के लोगों ने कोरोना के समय भी खूब झाड़-फूंक करवाई थी। अब इनको अपने नाखून व चेहरा पीला दिख रहा है।

झाड़फूंक कराने वाले पोस्ट कोविड मरीज हो सकते हैं..

केसला बीएमओ डॉ. सपन गोयल का मानना है कि ओपीडी में पीलिया के एक-दो केस ही होंगे। कोविड वार्ड के 15 बेड भी खाली पड़े हैं। झाड़-फूंक करवाने वाले पोस्ट कोविड मरीज हो सकते हैं। अगर हम झाड़फूंक के लिए सख्ती से मना करें तो कई लोग एलोपैथिक दवा भी नहीं खाएंगे।

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