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बिजली बिलों में खेल:30 के बजाय 36 दिन की रीडिंग के बिल देकर छीन ली ‌25 करोड़ की सब्सिडी

हाेशंगाबाद20 दिन पहलेलेखक: सुमित शर्मा
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  • 6 दिन देरी से रीडिंग लेकर उपभोक्ताओं को किया 150 यूनिट के दायरे से बाहर

बिजली कंपनी ने मीटर रीडिंग में देरी कर उपभोक्ताओं से सब्सिडी छीन ली है। मार्च में 61.10 करोड़ और अप्रैल में 61.05 करोड़ की सब्सिडी जिले में बनी थी, जिसका फायदा उपभोक्ताओं को मिला। सब्सिडी की यह राशि घटकर मई में 35.88 और जून में 35.48 करोड़ रह गई। यानी करीब 25 करोड़ की गिरावट आई। भास्कर ने पड़ताल की तो इसमें बिजली कंपनी का बहुत बड़ा खेल सामने आया। बिजली कंपनी ने 30 के बजाय 36 दिन में रीडिंग लेकर उपभोक्ताओं को सब्सिडी के दायरे से बाहर कर दिया। दरअसल कंपनी ने 35 दिन का कैप पीरियड रखा है। यदि रीडिंग 35 दिन की हो तो 5 यूनिट प्रतिदिन खपत पर सब्सिडी का लाभ मिलता है, चाहे उपभोक्ता की कुल यूनिट 150 से ज्यादा बनी हो। 36 दिन की रीडिंग होने पर खपत 5 यूनिट प्रतिदिन होने पर भी लाभ नहीं मिलता है।

भास्कर को ऐसे कई उपभोक्ता मिले हैं, जिनकी रीडिंग 36 दिन में की गई। जबकि उसके पहले वे हर महीने 150 यूनिट से कम खपत कर सब्सिडी के दायरे में बने हुए थे। रीडिंग में देरी करने से उपभोक्ताओं के बिल बढ़े हुए टैरिफ से बने। इससे इतने ज्यादा रुपए चुकाने पड़े कि सब्सिडी के दायरे में रहते हुए बिल आते तो सालभर के उनके बिल चुकता हो जाते।

36 दिन की रीडिंग से ऐसे ठगे गए उपभोक्ता

1- वार्ड 9 निवासी कमल किशोर साहू का उपभोक्ता क्रमांक एन2557004652 है। दिसंबर 2020 में 48 यूनिट खपत। जनवरी-21 में 42, फरवरी में 45, मार्च में 54, अप्रैल में 121 रही। हर महीने सब्सिडी मिलने से बिल 100 से 300 रुपए के बीच ही आ रहा था। 19 अप्रैल को रीडिंग ली गई। जबकि मई में रीडर 25 को आया। 36 दिन की रीडिंग से सब्सिडी से बाहर हो गए। 212 यूनिट का बिल 1861 रुपए आ गया।

2- ग्वालटोली के लज्जाराम बलवंत का क्रमांक एन2757004741 है। फरवरी मं खपत 124 यूनिट थी। मार्च में 85, अप्रैल में 102 यूनिट खपत रही। अप्रैल में रीडिंग 5 तारीख, मई में 11 को हुई। 36 दिन में रीडिंग हुई। बिल 2491 रुपए आया। बिल 300 रुपए से कम ही आ रहा था।

3- आशुतोष नगर निवासी भारती गोविंद पाराशर का उपभोक्ता क्रमांक एन2757004675 है। खपत दिसंबर में 123, जनवरी में 122, फरवरी में 130, मार्च में 111 यूनिट रही। मार्च में रीडिंग 6, अप्रैल में 12 तारीख को ली। 36 दिन के कारण सब्सिडी से बाहर हो गए। 219 यूनिट का बिल बना।

ऐसे समझें कैसे बढ़ता है बिल: बिजली कंपनी 150 यूनिट तक सब्सिडी देती है। सब्सिडी मिलने पर अधिकतम 385 रुपए का बिल आता है। इससे ज्यादा होने पर 6.47 रुपए प्रति यूनिट का टैरिफ लागू होता है। हालांकि फिक्स चार्ज, एनर्जी चार्ज, सेस आदि मिला कर बिल की राशि कम से कम 900 रुपए हो जाती है। 200 यूनिट पर राशि 1501 और 300 यूनिट पर 2166 रुपए का बिल बन जाता है।

तय फॉर्मेट में प्रिंट नहीं होते बिल, समझ नहीं पाते लोग
स्पाॅट बिलिंग में जो बिल उपभोक्ताओं को दिए जा रहे हैं उन्हें पढ़ने में परेशानी होती है। दरअसल बिल जब प्रिंट होता है तो उसमें फाॅर्मेट के तय बिंदुओं के सामने सही प्रिंट नहीं आता है। इससे आसानी से बिल में लिखे आकंड़े समझ नहीं आते।

गलती कंपनी की, उपभोक्ता को राहत का अधिकार है

बिजली कंपनी समय से रीडिंग नहीं ले रही है और ज्यादा बिजली बिल का भार उपभाेक्ता पर पड़ रहा है। यह उपभाेक्ता काे आर्थिक नुकसान हुआ। ऐसे मामलाें में उपभाेक्ता फाेरम में कंपनी के विरुद्ध प्रकरण दर्ज करवा सकते हैं। क्याेंकि यह गलती मीटर रीडर और कंपनी की है। इससे होने वाला आर्थिक नुकसान उपभाेक्ता क्याें भुगते। उसे राहत पाने का पूरा अधिकार है।

  • 28 से 32 दिनाें तक रीडिंग ले सकते हैं। सब्सिडी किसी भी उपभाेक्ता की खत्म नहीं हाेती है। प्रतिदिन 5 यूनिट से ज्यादा नहीं जलती है ताे सब्सिडी मिलती है। -बीबीएस परिहार, जीएम बिजली कंपनी
  • मीटर रीडिंग का कैप पीरियड 35 दिन है। 35 दिन के अंदर ही मीटर रीडिंग ली जाती है। शहर में करीब 18 मीटर रीडर हैं। इस कारण भी रीडिंग लेेने में देरी हो जाती है। -अंकुर मिश्रा, डीजीएम बिजली कंपनी
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