समर्थन मूल्य / केंद्रों पर 4 दिन और होगी गेहूं की खरीदी, जिले में अभी 6 हजार किसान बाकी, चना खरीदी के एसएमएस भेजे

पिपरिया। मंडी सचिव को ज्ञापन देते हुए मजदूर संघ के सदस्य। पिपरिया। मंडी सचिव को ज्ञापन देते हुए मजदूर संघ के सदस्य।
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पिपरिया। मंडी सचिव को ज्ञापन देते हुए मजदूर संघ के सदस्य।पिपरिया। मंडी सचिव को ज्ञापन देते हुए मजदूर संघ के सदस्य।

  • जिले में पिछले साल से भी ज्यादा इस साल किसानों से हो चुकी है गेहूं की खरीदी

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 06:51 AM IST

हाेशंगाबाद. जिले में समर्थन मूल्य की खरीदी आगामी 4 दिन यानि 26 मई तक जारी रहेगी। शुक्रवार तक जिले में 76 हजार पंजीकृत किसानों में से 70 हजार किसानों से 9 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। अभी 6 हजार किसान शेष बचे हैं। किसानों को मैसेज भेजे गए हैं। केंद्रों पर अंतिम चरण में व्यापारियों का गेहूं पहुंचने की शिकायतों के चलते प्रशासन ने नियम कड़े कर दिए हैं। नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक दिलीप सक्सेना के मुताबिक जिले में इस बार अब तक की सबसे अधिक खरीदी हो रही है। पिछले साल 8 लाख 68 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था। इस बार शुक्रवार तक ही 9 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। 26 मई तक यह खरीदी साढ़े 9 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचने की उम्मीद है। इधर, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के सीईओ आरके दुबे ने बताया कि सभी 76 हजार किसानों को मैसेज भेजे जा चुके हैं। इनमें से एक बार भी खरीदी केंद्र नहीं पहुंचने वाले किसानों को दोबारा मैसेज भेजे गए हैं।

मैसेज नहीं मिलने पर कंट्रोल रूम में करें बात
खरीदी केंद्रों पर सौदा पत्रक से व्यापारियों द्वारा खरीदे गए गेहूं की बिक्री की आशंका के चलते प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। किसानों को मैसेज मिलने के बाद केंद्र पहुंचना जरूरी होगा। यदि तय तिथि के बाद वे खरीदी केंद्र पहुंचते हैं तो उनसे गेहूं नहीं खरीदा जाएगा। खरीदी केंद्रों पर पुराने मैसेज वाले किसानों को फोन कर बुलाने और 24 मई तक गेहूं बेचने को कहा गया है।

मंडी अधिनियम में हुए संशोधन का मजदूरों ने किया विरोध, मंडी सचिव को ज्ञापन देकर की निरस्त करने की मांग
मध्य प्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 में किए गए संशोधन को अनुचित और घातक बताते हुए शुक्रवार को मजदूर संघ ने विरोध जताया। मजदूर संघ ने मुख्यमंत्री के नाम कृषि उपज मंडी सचिव को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में संघ ने संशोधन को निरस्त करने की मांग की है। ज्ञापन में मजदूर संघ ने कहा है कि एक मई 2020 को मप्र कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 में संशोधन करते हुए प्रदेश की कृषि उपज मंडियों के अधिकार क्षेत्र के काम को एकाएक अनुचित एवं मनमाने तरीके से निजी कंपनियों के हवाले कर दिया है। इससे इलेक्ट्रानिक ट्रेडिंग का अधिकार निजी क्षेत्र को मिल गए हैं। इन मंडियों पर हजारों लाइसेंसशुदा हम्माल, मान्यता प्राप्त तुलावटी एवं अन्य कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम श्रेणी के व्यापारियों के प्रत्यक्ष रोजगार के साथ इन सबके आश्रित परिवारों के हजारों सदस्यों और मंडी के आसपास के छोटे दुकानदारों की जिंदगी बुरी तरह से प्रभावित होगी।

जिले के किसानों की 1 दिन में 40 क्विंटल होगी चने की खरीदी

जिले में से समर्थन मूल्य पर चना खरीदी के लिए सभी किसानाें काे एसएमएस भेज दिए गए हैं। एक किसान काे दाे बार एसएमएस नहीं भेजने की बात उपसंचालक कृषि जितेंद्र सिंह ने कही है। किसान केंद्राें पर एक किसान से एक दिन में 40 क्विंटल ही चना बेच सकता है। किसानाें काे पंजीयन के अनुसार 1 हेक्टेयर पर 20 क्विंटल के हिसाब से खरीदी करने के निर्देश विभाग ने दिए हैं। जिले में 4642 रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसानाें काे 21 मई काे मैसेज भेज दिया है। जिले में 11 खरीदी केंद्राें पर चने की खरीदी चल रही है। कृषि उपसंचालक जीतेंद्र सिंह ने कहा कि एक दिन में 40 क्विंटल चना किसान बेच सकता है। एक बार ही एसएमएस ही अाएगा।

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