खरे हुए सेवानिवृत्त:116 साल में 71 डीजे आए, चंद्रेश कुमार खरे पांचवें जज जो हाेशंगाबाद से हुए सेवानिवृत्त

सुमित शर्मा |हाेशंगाबाद10 महीने पहले
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राजनांदगांव से सफर शुरू: बच्ची से दुष्कर्म, हत्या के केस में सुनाया था फैसला - Dainik Bhaskar
राजनांदगांव से सफर शुरू: बच्ची से दुष्कर्म, हत्या के केस में सुनाया था फैसला
  • साफा बांधकर परिवार के साथ बग्घी में बैठाया, न्यायालय से बैंड बाजाें के साथ पहुंचे बंगला, कोर्ट कर्मचारी, जिला बार काउंसिल के सदस्यों ने भी दी खरे को विदाई

हाेशंगाबाद जिला एवं सत्र न्यायालय काे बने 116 साल हाे चुके हैं। इस दाैरान 71 जज पदस्थ हुए इनमें केवल 5 जज ही यहां से सेवानिवृत्त हुए। 31 दिसंबर काे न्यायालय के 71वें न्यायाधीश चंद्रेश कुमार खरे 5वें थे, जिन्हें हाेशंगाबाद से विदाई दी गई। काेर्ट कर्मचारी, अधिवक्ताओं ने न्यायाधीश खरे काे साफा पहनाकर परिवार सहित बग्घी में बैठाया और बैंड बाजाें के साथ बंगले तक पहुंचाया।

न्यायालय के प्रशासनिक अधिकारी विनोद श्रीवास्तव ने बताया फरवरी 1904 में लाला शिवनारायण सबसे पहले जज बने थे। गुरुवार काे न्यायाधीश चंद्रेश कुमार खरे का स्टाफ ने विदाई समारोह आयाेजित किया। इससे पहले जिला बार काउंसिल ने भी विदाई दी। स्टाफ ने उन्हें न्यायालय परिसर से बंगले तक बग्घी (घाेड़ा गाड़ी) में बैठाकर धूमधाम के साथ विदा किया गया। साफा पहनाकर बग्घी में बैठे न्यायाधीश चंद्रेश कुमार खरे काे बंगले तक विदा किया। सभी जज और मप्र न्यायिक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जितेंद्र मर्सकाेले और सचिव व प्रवक्ता मनीष रघुवंशी सहित कर्मचारी शामिल रहे।

राजनांदगांव से सफर शुरू: बच्ची से दुष्कर्म, हत्या के केस में सुनाया था फैसला
न्यायाधीश चंद्रेश कुमार खरे 2 जुलाई 1990 में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिला न्यायालय से पांच महीने की ट्रेनिंग की थी। सबसे पहले उन्हाेंने व्यावहारिक न्यायाधीश वर्ग-2 जिला न्यायालय दुर्ग में नियुक्त हुए थे। उन्हाेंने बताया कि जीवन का अहम फैसला जबलपुर में 2013 में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश रहते हुए किया। यह मामला सात वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म और हत्याकर बालिका के शव काे बाेरे में अपने ही घर में ही रखने का था।

फरवरी 2013 में फैसला सुनाकर आराेपी टट्टू उर्फ पंच काे मृत्युदंड की सजा सुनाई। इस मामले में अपील हाईकाेर्ट की गई जहां पर फैसला यथावत रखा। फिर सुप्रीम काेर्ट में इस मामले में आराेपी काे 25 साल की सजा सुनाई गई। न्यायधीश खरे ने नई पीढ़ी के न्यायाधीशों के लिए संदेश दिया कि वह ईमानदारी से अपना कार्य करें कभी किसी विषय पर कठिनाई आए ताे वरिष्ठाें का मार्गदर्शन अवश्य लें।

ये जज हाे चुके होशंगाबाद से रिटायर

  • पहले न्यायधीश एनएस चाैहान थे। जाे 54 वे न्यायधीश थे उन्हाेंने 27 दिसंबर 1986 को जॉइन किया और एक साल बाद 30 सितंबर 1987 को सेवानिवृत्त हुए।
  • दूसरे न्यायाधीश एचके दुबे रहे जाे न्यायालय में 65 वे न्यायधीश रहे। उन्हाेंने होशंगाबाद में 22 सितंबर 2007 को जॉइन किया तीन साल बाद 31 जुलाई 2010 काे सेवानिवृत्त हाे गए।
  • तीसरे न्यायाधीश राजीव सक्सेना थे। जाे 66 वे न्यायाधीश रहे। उन्हाेंने होशंगाबाद में 2 अगस्त 2010 से 31 जनवरी 2011 तक रहे।
  • चाैथे न्यायधीश एनके शुक्ला 67 वे जज रहे उन्होंने 1 अगस्त 2011 को जॉइन किया और 4 साल रहकर 31 जनवरी 2015 में रिटायर हुए।
  • न्यायाधीश चंद्रेश कुमार खरे हाेशंगाबाद जिला एवं सत्र न्यायालय से सेवानिवृत्त हाेने वाले पांचवे जज हैं। इनके पूर्व 4 न्यायधीश सेवानिवृत्त हुए हैं।

आलाेक अवस्थी हाेंगे नए डीजे
हाेशंगाबाद जिला एवं सत्र न्यायालय के नए न्यायाधीश आलाेक अवस्थी हाेंगे। वह वर्तमान में भाेपाल में विशेष न्यायधीश के पद पर पदस्थ हैं। वे 2 जनवरी काे ज्वाॅइन कर सकते हैं।

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