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सड़कों पर घूमते मवेशियों से रोज हो रही दुर्घटनाएं:15 शासकीय गाेशालाओं में 1500 गाेवंश की क्षमता, 7 हजार आवारा, दुर्घटनाओं में गाेवशं भी घायल हाेते हैं और बड़े वाहनाें से टकराने के कारण गाेवंश की भी होती हैं मौत

हाेशंगाबाद4 दिन पहले
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शहर की सड़काें पर गोवंश का डेरा रहता है। - Dainik Bhaskar
शहर की सड़काें पर गोवंश का डेरा रहता है।

गाेवशं के कारण निरंतर सड़क दुर्घटनाएं हाे रही हैं। इसमें गाेवशं के साथ ही आमजन भी दुर्घटनाग्रस्त हाे रहा है। पिछले कई वर्षाें से जिले के मुख्य मार्गाें और शहराें के बाजाराें और काॅलाेनियाें में गाेवशंं काे हटाने के प्रयास विफल रहे हैं। जिले में 7 हजार से अधिक आवारा गाेवशं पशुपालन विभाग की गणना में आया है,लेकिन जिले में कुल 15 शासकीय गाेशाला हैं, जिनमें केवल 1500 गाेवंश रखने की क्षमता है। सड़क पर गाेवशं के कारण पिछले चार दिनाें से निरंतर दुर्घटनाएं हाे रही हैं। हाल ही में पिछले दाे दिनाें में सड़क पर गाेवशं से टकराने के कारण दाे बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हाे गए। हालांकि दुर्घटनाओं में गाेवशं भी घायल हाेते हैं और बड़े वाहनाें से टकराने के कारण गाेवंश की मौत भी हो जाती है।

गाेवंश आवारा नहीं: चाैबे

गोसंवर्धन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष शिव चौबे ने बताया कहीं भी गाेवंश आवारा और निराश्रित नहीं है। कहीं भी सरकार गाेशालाएं बना सकती है। निराश्रित गाेवंश काे उसमें उपचार और भाेजन की व्यवस्था करा सकती है। लाेग गाेवंश पालते हैं, लेकिन उन्हें दूध निकालकर छाेड़ दिया जाता है। सुसनेर के सांवरिया गांव में हमने गाै अभ्यारण का निर्माण कराया है, जिसमें करीब 6 हजार गाेवशं है। जिले में इतनी गाय रखने के लिए स्थान नहीं है। साथ ही शहराें में नपा गाेवशं काे पकड़ने का कार्य कर रही है, लेकिन उसमें संवेदनशीलता नहीं बरती जा रही। गाेवंश काे नुकसान पहुंचाए बगैर उन्हें पकड़ा जाना चाहिए।

नगरपालिका ने तय किया था जुर्माने: खंडेलवाल

पूर्व नपा अध्यक्ष अखिलेश खंडेलवाल ने बताया कि 2015-16 में शहर में गाेवशं काे शहर की सड़काें से हटाने का अभियान चलाया गया था। इस दाैरान बीटीआई गाेशाला में करीब 300 से अधिक गाेवंश शहर की सड़काें से पकड़कर लाया गया। इसमें पशुपालकाें पर 200 रुपए, 500 रुपए और तीन हजार रुपए तक जुर्माने किए गए। गाेवशं सड़काें से हटाने के लिए सख्ती से गाेपालकाें पर कार्रवाई की जाए ताकि वे इन्हें सड़कों पर न छाेड़ें।

पशुपालक गोवंश को खुला छोड़ देते

सांगाखेड़ा कला की सरकारी गाेशाला समन्वयक केके नायक ने बताया जिले में अधिकतर गाेवशं आवारा नहीं हैं। उनके लायक व्यवस्थाएं शासन स्तर पर जाे 15 गाेशालाएं संचालित हैं उनमें की जा रही है। लाेग अपने गाेवंश काे दूध निकालकर छाेड़ देते हैं। यह गाेवंश निराश्रित की श्रेणी में नही आता है। सांगाखेड़ा कलां में एक अभियान चलाया गया, जिसमें करीब 15 गाेवशं सड़काें से पकड़े। लेकिन इसमें से 90 प्रतिशत गाेवंश के मालिक पाए गए। केवल 10 प्रतिशत गाेवशं ही निराश्रित मिला। यही स्थिति जिले के अन्य शहराें और गांव में है।

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