जीएसटी की मार:1 जनवरी से महंगे होंगे कपड़े, फुटवेयर, 12% जीएसटी लगेगा

होशंगाबाद2 महीने पहले
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व्यापारी और उपभाेक्ताओं पर बढ़ेगा आर्थिक बाेझ, कपड़ा व्यवसायी परेशान। - Dainik Bhaskar
व्यापारी और उपभाेक्ताओं पर बढ़ेगा आर्थिक बाेझ, कपड़ा व्यवसायी परेशान।

1 जनवरी से कपड़े और फुटवेयर खरीदना महंगा हाेगा। भारत सरकार ने कपड़ा, रेडीमेड और फुटवेयर पर 7 प्रतिशत जीएसटी बढ़ा दी है। कर सलाहकार पुष्पेश पालीवाल ने बताया कपड़ा, रेडीमेड और फुटवेयर पर जीएसटी की दर 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दी है। व्यापारी काे अब रेडीमेड पर 12 प्रतिशत जीएसटी देना हाेगी।

जीएसटी की दर बढ़ने से व्यापारियाें पर बढ़ने वाले आर्थिक बाेझ का असर सीधे उपभाेक्ता की जेब पर पड़ेगा। 1 जनवरी से जीएसटी की दर बढ़ने से बाजार में थाेक और रिटेल के लिए आने वाला कपड़ा, रेडीमेड और फुटवेयर भी महंगी दर पर मिलेगा। इधर नाेटिफिकेशन जारी हाेने के बाद से ही कपड़ा व्यापारी परेशान हैं।

कपड़ा व्यापारियाें का कहना है कि पहले ही कपड़े पर दाेहरा जीएसटी लग रहा है। ऐसे में एक बार फिर 7 प्रतिशत जीएसटी बढ़ने से व्यापार पर विपरीत असर पड़ेगा। पहले से ही कपड़ाें की कीमत ज्यादा है। ऐसे में छाेटे व्यापारी लगातार जीएसटी की दर बढ़ने से व्यापार से दूर हाे रहे हैं।

संयुक्त व्यापार महासंघ सौंपेगा ज्ञापन

संयुक्त व्यापार महासंघ के अध्यक्ष दीपक हरिनारायण अग्रवाल ने बताया जीएसटी की दर बढ़ने से व्यापारियाें पर आर्थिक बाेझ बढ़ेगा। कपड़ा व्यापारियाें पर जीएसटी की दाेहरी मार पड़ेगी। इससे व्यापार काे हानि हाेगी। पहले ही काेराेना के कारण मार्केट टूटा हुआ है। माॅल और ऑनलाइन मार्केटिंग ने स्थानीय बाजार काे प्रभावित किया। दीपावली पर भी कपड़ा बाजार में राैनक नहीं रही। ऐसे में व्यापारी अपना व्यवसाय बदल रहे हैं। जीएसटी के विराेध में संयुक्त व्यापार महासंघ ज्ञापन साैंपेगा।

ऐसे बढ़ जाएगी कपड़े की 20 प्रतिशत कीमत

  • कपड़े के कच्चे माल पर पहले ही 12% जीएसटी निर्धारित है, रेडीमेड कपड़े पर 5% जीएसटी लगता है। पहले ही कपड़े पर 17 प्रतिशत जीएसटी देना पड़ती है। अब 7 % जीएसटी बढ़ने से राॅ मटेरियल पर 12 % और रेडीमेड पर 12 % कुल 24 % जीएसटी का भुगतान करना हाेगा।
  • व्यापारी जीएसटी के भुगतान के बाद ट्रांसपाेर्टेशन भी देना हाेगा। जिसके बाद उसे रिटेलर तक पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी हाे सकेगी। ऐसे में कपड़ा और फुटवेयर रिटेल मार्केट में आते-आते 20 फीसदी मंहगा हाे जाएगा।
  • मूलभूत आवश्यकताओं में कपड़ा भी प्राथमिक आवश्यकता है। यह सबसे अधिक खरीदा जाने वाला उत्पाद है। जीएसटी बढ़ने से उपभाेक्ता की जेब पर असर पड़ेगा।
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