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चिंता में किसान:गेहूं की फसल में फाैजी कीट की इल्लियां लगने का खतरा, ग्रोथ पर पड़ रहा असर

हाेशंगाबादएक महीने पहले
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होशंगाबाद। खेत में किसानों को गेहूं की फसल में इल्ली बताते कृषि अधिकारी। - Dainik Bhaskar
होशंगाबाद। खेत में किसानों को गेहूं की फसल में इल्ली बताते कृषि अधिकारी।
  • मौसम में नमी की अधिकता से गेहूं को खतरा, कृषि अधिकारियाें ने किया गांवा का दौरा

चना में हर साल इल्ली का प्रकोप होता था, लेकिन अमूमन मक्के में लगने वाले कीट, इल्ली पहली बार इस बार जिले में गेहूं की फसल में लगती नजर आ रही है। गेहूं की फसल में इस बार आर्मी वर्म (फाैजी कीट) की नवजात इल्लियां लगने की संभावना है। गेहूं की ग्रोथ पर असर पड़ रहा है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि विज्ञानी भी इसे लेकर सतर्क हैं। वे किसानों को कीट नियंत्रण के लिए जागरूक कर रहे हैं। पिछली रबी और खरीफ की फसलें चौपट होने से परेशान किसानों के लिए मौसम ने नई मुसीबत पैदा कर दी है। क्षेत्र में गेहूं की फसल पर इल्ली का प्रकाेप दिखाई दे रहा है।

अफ्रीका महाद्वीप से आया कीट
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक अफ्रीका महाद्वीप से दक्षिण भारत में आए फॉल आर्मी वर्म कीट जिले में दिखाई दे रहे हैं। इससे पहले यह कीट रतलाम, सागर, छिंदवाड़ा और सिवनी जिले में गेहूं सहित अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा चुका है। उप संचालक कृषि जितेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में इस बार 2 लाख 75 हजार हेक्टेयर से ज्यादा में गेहूं और 50 हजार हेक्टेयर में चने की बोवनी की गई है।

निगरानी दल ने इन गांवों का किया दौरा
फसल निगरानी दल ने रोहना, सांवलखेड़ा, बैराखेड़ी, डोलरिया, शैल, रतवाड़ा तथा भरलाय, भमेड़ीदेव, पगढाल, नवलगांव, भैरोपुर, शिवपुर, भिलाड़ियाखुर्द आदि ग्रामों का निरीक्षण कर किसानों को सलाह दी। जिला स्तरीय फसल निगरानी दल में कृषि अनुसंधान केंद्र पवारखेड़ा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. केके मिश्रा, एसडीओ कृषि राजीव यादव, ग्रामीण कृषि विकास अधिकारी एसएस अली आदि शामिल रहे।

यह कारण : बादल छाने और मौसम में नमी की अधिकता से रबी फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। गेहूं में एक तरफ कीट का प्रकोप देखा जा रहा है, वहीं बार-बार मौसम में हो रहे बदलाव के कारण अनुकूल वातावरण नहीं मिलने को लेकर पौधों की ग्रोथ (बढ़वार) अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो पा रही है।

किसान रोगों से करें बचाव : जिला स्तरीय निगरानी दल ने बताए बचाव के लिए उपाय
प्रकाेप- 1 गेहूं फसल में आर्मी वर्म (फाैजी कीट) की नवजात इल्लियां छोटे पौधो की जड़ के पास से एवं बाली की अवस्था पर बल्लियों को काटकर जमीन पर गिरा देती है, इन इल्लियों की संख्या अधिक होने से फसल जल्दी नुकसान पहुंचाती हैं तथा रात के समय अधिक हानि पहुंचाती है।
यह करें किसान : इमामैक्टीन वेन्जोएट 250 ग्राम प्रति हेक्टर मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टर छिड़काव करें।

प्रकाेप- 2 गेहूं फसल में जड़ माहू का प्रकोप होता है, यह कीट फसल की पौध और कंसा अवस्था पर जड़ों में रस चूसकर नुकसान पहुंचाते है।
यह करें किसान: क्लोरोपायरीफास 20 ईसी कीटनाशक की 1.25 से 1.50 लीटर मात्रा प्रति हेक्टर अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल की 180 मि.ली. प्रति हेक्टर अथवा थायोमेथाक्जाम 25 डब्लूजी की 125 ग्राम मात्रा का प्रति हेक्टर की दर से प्रकोपित फसल पर छिड़काव करें।

प्रकाेप-3 आमतौर से गेहूं की फसल में इल्ली का प्रकोप नहीं होता है, लेकिन मौसम में आए परिवर्तन की वजह से इल्ली लग सकती हैं।
यह करें किसान : गेहूं की फसल में क्विंनलफोस कीटनाशक को 1500 मिली प्रति हेक्टेयर छिड़काव करने से इल्ली मर सकती हैं।

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